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Supreme Court: 'विवाह व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन का अभिन्न अंग', कोर्ट ने दिव्यांग महिला की मुआवजा राशि बढ़ाई
Wed, 11 Dec 2024 05:47 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 11 Dec 2024 05:47 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बौद्धिक अक्षमता वाली महिला का मुआवजा बढ़ाकर, 50.87 लाख रुपये कर दिया। महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट के नवंबर 2017 के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने उसे 11.51 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि शादी या साथ रहना व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा। कोर्ट ने सड़क हादसे के कारण 75 फीसदी बौद्धिक अक्षम महिला को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाकर 50.87 लाख रुपये कर दिया। जस्टिस बी.आर.गवई और जस्टिस के.वी.विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि महिला उस समय साथ साल की थी, जब 2009 में यह दुर्घटना हुई थी और मेडिकल प्रमाणपत्र के मुताबिक वह मध्यम स्तर की बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित है।
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महिला ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की थी अपील
पीठ ने कहा, उसका शरीर प्रभावी रूप से बढ़ता रहेगा, लेकिन वह हमेशा एक छोटी बच्ची जैसी ही रहेगी। कोर्ट ने कहा, अपीलकर्ता (महिला) ने न केवल अपनी बचपन की अवस्था खो दी है, बल्कि उसका वयस्क जीवन भी प्रभावित हो गया है। शादी और साथ रहना एक व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि महिला बच्चों बच्चों को जन्म देने में सक्षम हो सकती है। लेकिन उसे वैवाहिक जीवन के सामान्य सुखों का अनुभव करना लगभग असंभव होगा। इसलिए कोर्ट ने महिला का मुआवजा बढ़ाकर, 50.87 लाख रुपये कर दिया। महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट के नवंबर 2017 के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने उसे 11.51 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
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तेज रफ्तार कार ने मार दी थी टक्कर
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि महिला पूरी जिंदी किसी न किसी पर निर्भर रहेगी और उम्र बढ़ने के साथ भी वह मानसिक रूप से एक दूसरी कक्षा की बच्ची की तरह रहेगी। कोर्ट ने बताया कि जून 2009 में महिला अपने परिवार के साथ पैदल चल रही थी, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी थी। मुआवजे के लिए एक दावा याचिका मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत दायर की गई थी, जिसमें उसे 5.90 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। बाद में महिला की ओर से मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसने मुआवाज बढ़ाकर 11.51 लाख रुपये कर दिया था।
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महिला के वकील ने दी सुप्रीम कोर्ट में ये दलील
महिला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डॉक्टर के प्रमाण पत्र के अनुसार महिला 75 फीसदी बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित है। वकील ने दलील दी कि मध्यम बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित बच्चे आमतौर पर दूसरी कक्षा के बच्चे जैसे कौशल सीख सकते हैं और केवल करीबी निगरानी में काम कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए यह भी कहा कि महिला को आय या कमाई की क्षमता की हानि, दर्द और कष्ट, विवाह के अवसरों का नुकसान, सहायक शुल्क और भविष्य के चिकित्सा उपचार के तहत मुआवजा बढ़ा गया है।
कार चालक और बीमा कंपनी करेंगे मुआवजे का भुगतान
पीठ ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण गलत था कि महिला को केवल एक पार्ट-टाइम सहायक की जरूरत होगी। इसके विपरीत हमारी राय यह है कि अपीलकर्ता को पूरी जिंदगी एक पूर्णकालिक सहायक की जरूरत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया और कहा कि अगर पहले कोई राशि दी गई है, तो उस समायोजित किया जा सकता है। इसके साथ ही पीठ ने तय किया कि कार चालक और बीमा कंपनी दोनों को संयुक्त रूप से मुआवजे का भुगतान करना होगा।
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