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परिवार के लिए छोड़ी वर्दी, पति हुए बलिदान: अब फिर वायुसेना में सेवा देंगी प्रियंका; सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Fri, 25 Sep 2026 07:49 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 25 Sep 2026 07:49 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वायुसेना अधिकारी प्रियंका सक्सेना को फिर से भारतीय वायुसेना में शामिल करने का आदेश दिया है। प्रियंका 10 साल तक वायुसेना में सेवा कर चुकी थीं और 2013 में पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण बाहर हुई थीं। पति विंग कमांडर हर्षित सिन्हा की 2021 में मिग-21 हादसे में मौत के बाद उन्होंने दोबारा सेवा में आने की मांग की थी। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष राहत देते हुए उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन साफ किया कि यह फैसला सिर्फ उनके मामले तक सीमित रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी प्रियंका सक्सेना को दोबारा भारतीय वायुसेना में शामिल करने का आदेश दिया है। प्रियंका पहले वायुसेना में 10 साल सेवा कर चुकी हैं। उन्होंने 2013 में पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण सेवा छोड़ दी थी। बाद में उनके पति विंग कमांडर हर्षित सिन्हा की 24 दिसंबर 2021 को जैसलमेर एयरफील्ड के पास मिग-21 बाइसन विमान हादसे में मौत हो गई। उनकी दो नाबालिग बेटियां हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी है। हालांकि अदालत ने साफ किया है कि यह फैसला केवल प्रियंका के मामले की खास परिस्थितियों तक सीमित रहेगा और इसे दूसरे मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने उनकी पुरानी सेवा को इतना महत्व क्यों दिया?
शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रियंका की पहले की वायुसेना सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह सिर्फ युद्ध विधवा ही नहीं हैं, बल्कि खुद भी पहले वायुसेना अधिकारी रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उनका मामला दो आधारों पर बनता है।
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वह पहले भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के तौर पर सेवा दे चुकी हैं और उनके पास सैन्य सेवा का अनुभव है।
वह एक ऐसे वायुसेना अधिकारी की विधवा भी हैं, जिनकी मौत मिग-21 बाइसन विमान हादसे में हुई थी। अदालत ने माना कि उनकी पुरानी सेवा को देखते हुए उन्हें दोबारा बिल्कुल शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देने की जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा, 'उनकी पिछली सेवा को महत्व दिया जाना चाहिए और उनके सेवा अनुभव को देखते हुए उन्हें नए सिरे से प्रशिक्षण की जरूरत भी नहीं होनी चाहिए, जो शैक्षणिक योग्यता के आधार पर शामिल होने वाली अन्य युद्ध विधवाओं के लिए जरूरी है।'
यह भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: विपक्ष कर रहा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, लेकिन इसे लेकर क्या कहता है देश का संविधान?
प्रियंका ने 2013 में वायुसेना क्यों छोड़ी थी?
प्रियंका ने अपनी शॉर्ट सर्विस कमीशन की अवधि पूरी करने के बाद आगे सेवा जारी रखने या स्थायी कमीशन लेने का विकल्प नहीं चुना था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं। उन्हें अपनी बेटी की देखभाल करनी थी और अपने पति का साथ देना था, जो फाइटर पायलट थे।
पति की मौत के बाद प्रियंका ने वायुसेना और दूसरे संबंधित अधिकारियों से दोबारा सेवा में लेने की मांग की। उनकी मांग को खारिज कर दिया गया। इसमें उनकी उम्र 35 साल से ज्यादा होना भी एक आधार था। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने सरकार से ऐसी महिला अधिकारियों के लिए नीति पर विचार करने को कहा था, लेकिन प्रियंका को वहां प्रभावी राहत नहीं मिली।
वायुसेना में वापसी के लिए प्रियंका को किन शर्तों को पूरा करना होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के 18 मई 2023 और 2 जुलाई 2024 के आदेशों को रद्द कर दिया है। प्रियंका को दोबारा वायुसेना में शामिल करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। उन्हें अगले लागू कोर्स में एक साल की रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करनी होगी और ट्रेनिंग के दौरान प्रशिक्षुओं पर लागू नियम उनके ऊपर भी लागू होंगे।
उन्हें निर्धारित मेडिकल मानकों को पूरा करना होगा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर 11वें साल की सेवा में बहाल किया जाएगा। उनकी पहले की सेवा को सेवा अवधि में गिना जाएगा। वह शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी रहेंगी और लागू नीति के तहत उन्हें चार साल का विस्तार मिलेगा।
क्या यह फैसला दूसरी युद्ध विधवाओं पर भी लागू होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को विशेष रूप से स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि प्रियंका के मामले की परिस्थितियां अलग हैं और इसलिए उन्हें दी गई राहत को सामान्य नियम या मिसाल नहीं माना जाएगा। उनकी वरिष्ठता मौजूदा पीयर ग्रुप के साथ तय की जाएगी। इसके अलावा लागू नीति के अनुसार उन्हें स्थायी कमीशन और पदोन्नति के लिए भी विचार किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी है। हालांकि अदालत ने साफ किया है कि यह फैसला केवल प्रियंका के मामले की खास परिस्थितियों तक सीमित रहेगा और इसे दूसरे मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।
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कोर्ट ने उनकी पुरानी सेवा को इतना महत्व क्यों दिया?
शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रियंका की पहले की वायुसेना सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह सिर्फ युद्ध विधवा ही नहीं हैं, बल्कि खुद भी पहले वायुसेना अधिकारी रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उनका मामला दो आधारों पर बनता है।
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वह पहले भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के तौर पर सेवा दे चुकी हैं और उनके पास सैन्य सेवा का अनुभव है।
वह एक ऐसे वायुसेना अधिकारी की विधवा भी हैं, जिनकी मौत मिग-21 बाइसन विमान हादसे में हुई थी। अदालत ने माना कि उनकी पुरानी सेवा को देखते हुए उन्हें दोबारा बिल्कुल शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देने की जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा, 'उनकी पिछली सेवा को महत्व दिया जाना चाहिए और उनके सेवा अनुभव को देखते हुए उन्हें नए सिरे से प्रशिक्षण की जरूरत भी नहीं होनी चाहिए, जो शैक्षणिक योग्यता के आधार पर शामिल होने वाली अन्य युद्ध विधवाओं के लिए जरूरी है।'
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प्रियंका ने 2013 में वायुसेना क्यों छोड़ी थी?
प्रियंका ने अपनी शॉर्ट सर्विस कमीशन की अवधि पूरी करने के बाद आगे सेवा जारी रखने या स्थायी कमीशन लेने का विकल्प नहीं चुना था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं। उन्हें अपनी बेटी की देखभाल करनी थी और अपने पति का साथ देना था, जो फाइटर पायलट थे।
पति की मौत के बाद प्रियंका ने वायुसेना और दूसरे संबंधित अधिकारियों से दोबारा सेवा में लेने की मांग की। उनकी मांग को खारिज कर दिया गया। इसमें उनकी उम्र 35 साल से ज्यादा होना भी एक आधार था। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने सरकार से ऐसी महिला अधिकारियों के लिए नीति पर विचार करने को कहा था, लेकिन प्रियंका को वहां प्रभावी राहत नहीं मिली।
वायुसेना में वापसी के लिए प्रियंका को किन शर्तों को पूरा करना होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के 18 मई 2023 और 2 जुलाई 2024 के आदेशों को रद्द कर दिया है। प्रियंका को दोबारा वायुसेना में शामिल करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। उन्हें अगले लागू कोर्स में एक साल की रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करनी होगी और ट्रेनिंग के दौरान प्रशिक्षुओं पर लागू नियम उनके ऊपर भी लागू होंगे।
उन्हें निर्धारित मेडिकल मानकों को पूरा करना होगा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर 11वें साल की सेवा में बहाल किया जाएगा। उनकी पहले की सेवा को सेवा अवधि में गिना जाएगा। वह शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी रहेंगी और लागू नीति के तहत उन्हें चार साल का विस्तार मिलेगा।
क्या यह फैसला दूसरी युद्ध विधवाओं पर भी लागू होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को विशेष रूप से स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि प्रियंका के मामले की परिस्थितियां अलग हैं और इसलिए उन्हें दी गई राहत को सामान्य नियम या मिसाल नहीं माना जाएगा। उनकी वरिष्ठता मौजूदा पीयर ग्रुप के साथ तय की जाएगी। इसके अलावा लागू नीति के अनुसार उन्हें स्थायी कमीशन और पदोन्नति के लिए भी विचार किया जाएगा।