{"_id":"671102df3a081dd237056f11","slug":"marital-harassment-will-decide-constitutional-validity-of-laws-granting-immunity-to-husbands-says-sc-2024-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Marital Rape: 'पतियों को छूट देने वाले कानूनों की सांविधानिक वैधता तय करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Marital Rape: 'पतियों को छूट देने वाले कानूनों की सांविधानिक वैधता तय करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Thu, 17 Oct 2024 05:58 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 17 Oct 2024 05:58 PM IST
सार
Marital Rape: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह तय करेगा कि आईपीसी और बीएनएस में ऐसे प्रावधानों की सांविधानिक वैधता है या नहीं, जो अपनी पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने पर पति को दुष्कर्म के आरोपों से संरक्षण देते हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह यह तय करेगा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में ऐसे प्रावधानों की सांविधानिक वैधता है या नहीं, जो अपनी पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने पर पति को दुष्कर्म के आरोपों से संरक्षण देते हैं। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र की इस दलील पर याचिकाकर्ताओं के विचार मांगे कि ऐसे कृत्य को दंडनीय बनाने से वैवाहिक संबंधों पर गंभीर असल पड़ेगा और विवाह संस्था में मुश्किलें पैदा होंगी।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने बहस की शुरुआत की और आईपीसी व बीएनएस में वैवाहिक दुष्कर्म के प्रावधानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, यह एक सांविधानिक प्रश्न है। हमारे सामने दो फैसले हैं और हमें तय करना है। मुख्य मुद्दा दंडात्मक प्रावधानों की सांविधानिक वैधता है।
विज्ञापन
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, आप कह रहे हैं कि यह (दंडात्मक प्रावधान) अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। संसद ने जब इस प्रावधान को बनाया, तब इसका मकसद था कि अगर एक आदमी अपनी 18 वर्ष से अधिक उम्र की पत्नी के साथ यौन संबंधन बनाता है, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि अगर दंड संहिताओं में पति को मिली सुरक्षा को समाप्त कर दिया जाए, तो उस स्थिति में यह अफराध मुख्य दुष्कर्म के प्रावधान के तहत आएगा या क्या अदालत एक अलग अपराध बना सकती है या इस अपवाद (धारा) की वैधता की वैधता पर निर्णय ले सकती है। मामले पर सुनवाई जारी है।
आईपीसी की धारा 375 के अपवाद खंड (जिसे अब बीएनएस द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है) के मुताबिक एक व्यक्ति अगर अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाता है, अगर पत्नी नाबालिग नहीं है, तो इस दुष्कर्म नहीं माना जा सकता है। नए कानून के मुताबिक भी धारा 63 (दुष्कर्म) का अपवाद खंड कहता है कि एक व्यक्ति अगर अपनी पत्नी से यौन संबंध स्थापित करता है, अगर पत्नी 18 वर्षी से कम आयु की नहीं है, तो वह दुष्कर्म नहीं है।
केंद्र का कहना है कि तेजी से बदले सामाजिक और पारिवारिक ढांचे में संशोधित प्रावधानों का दुरुपयोग भी संभव हो सकता है, क्योंकि किसी व्यक्ति के लिए यह साबित करना मुश्किल होगा कि (यौन संबंध बनाने में) सहमति थी या नहीं।