{"_id":"642d89c654e7d4aadb097af5","slug":"marine-commando-chandaka-govind-indian-navy-lost-his-life-during-free-fall-training-of-special-forces-2023-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indian Navy: बंगाल में पैरा-जंप अभ्यास के दौरान मरीन कमांडो की मौत; पैराशूट नहीं खुलने से हुआ हादसा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Indian Navy: बंगाल में पैरा-जंप अभ्यास के दौरान मरीन कमांडो की मौत; पैराशूट नहीं खुलने से हुआ हादसा
Wed, 05 Apr 2023 11:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 05 Apr 2023 11:18 PM IST
सार
घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (सीओआई) का गठन किया गया है। प्रथम दृष्टया, ऐसा लगता है कि दुर्भाग्यपूर्ण सैनिक का मुख्य पैराशूट खुलने में विफल रहा।
विज्ञापन
Chandaka Govind
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय नौसेना के एक विशेष बल के जवान की बुधवार तड़के पश्चिम बंगाल में असफल पैरा-जंप के बाद अपनी जान गंवा दी। उसकी पहचान आंध्र प्रदेश निवासी चंदका गोविंद के रूप में हुई है। बताया गया है कि उसका पैराशूट नहीं खुलने से यह हादसा हुआ। नौसेना प्रमुख आर हरि कुमार ने उनके इस निधन पर गहरा शोक जताया है।
विज्ञापन
रक्षा प्रवक्ता के मुताबिक, गोविंद विशाखापत्तनम में नौसेना के समुद्री कमांडो (मार्कोस) के लिए समर्पित बेस आईएनएस कर्ण से जुड़े थे। बताया जा रहा है कि गोविंद का पैराशूट नहीं खुला, जिस कारण वह बुधवार सुबह पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के बरजोरा में एक कारखाने पास गिरे। पुलिस उन्हें बरजोरा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, गोविंद पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले के पानागढ़ में वायु सेना स्टेशन अर्जन सिंह में प्रशिक्षण प्राप्त पैराट्रूपर्स की एक टीम का हिस्सा था, जो सी130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान से नियमित ड्रॉप के दौरान लापता हो गया था।
विज्ञापन
घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (सीओआई) का गठन किया गया है। प्रथम दृष्टया, ऐसा लगता है कि दुर्भाग्यपूर्ण सैनिक का मुख्य पैराशूट खुलने में विफल रहा। उल्लेखनीय है कि आधुनिक समय के पैराशूट बेहद अच्छे होते हैं और विशेष बलों के कर्मियों द्वारा 40 किमी तक की दूरी से अपने लक्ष्यों को निर्देशित किया जा सकता है।