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'पशु दिवस पर निकला लोमड़ियों का मार्च’: ठाकरे बंधुओं की रैली पर बोले शेलार- जीते तो ईवीएम अच्छी हारे तो खराब

Sun, 04 Oct 2026 03:00 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 04 Oct 2026 03:00 PM IST
सार

 महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठाकरे बंधुओं की रैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे विश्व पशु दिवस पर निकला 'लोमड़ियों का मार्च' बताते हुए विपक्ष पर चुनाव हारने के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

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March of foxes on Animal Day Shelar on Thackeray brothers rally EVMs are good if they win bad if they lose
आशीष शेलार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता आशीष शेलार ने रविवार को शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाली गई विरोध रैली पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि विश्व पशु दिवस के मौके पर निकाली गई यह रैली असल में ‘लोमड़ियों का मार्च’ है। शेलार ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और दूसरे विपक्षी दल चुनाव जीतने में नाकाम रहने के बाद चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठा रहे हैं।

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‘गरजना मोर्चा नहीं, लोमड़ियों का मार्च’
शेलार ने कहा, 'आज विश्व पशु दिवस है। रैली और उसके नाम को देखकर मुझे लगता है कि यह ‘गरजना मोर्चा’ नहीं, बल्कि ‘कोल्हेकुई मोर्चा’ यानी लोमड़ियों का मार्च है। लोमड़ियां कह रही हैं कि अंगूर खट्टे हैं।” उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने में अपनी नाकामी का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ा जा रहा है। उनके मुताबिक, यह चालाक लोगों का जमावड़ा है।
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'पहले खुद को आईना दिखाइए'
चुनाव आयोग के फैसलों और उसकी कार्यप्रणाली पर ठाकरे बंधुओं के हमले को लेकर भी शेलार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को अपने ही राजनीतिक रिश्ते और मतभेदों को देखना चाहिए। शेलार ने कहा, 'अगर आप देखना चाहते हैं कि मतभेदों के बाद किस तरह आम सहमति बनाई जाती है, तो चुनाव आयोग की ओर देखने की क्या जरूरत है? उद्धवजी और राज ठाकरे, पहले खुद को आईने में देखिए।' 
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‘ईवीएम भाजपा सरकार की देन नहीं’
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर शेलार ने कहा कि ईवीएम की शुरुआत भाजपा सरकार ने नहीं की थी। उन्होंने बताया कि ईवीएम का विकास 1970 के दशक के आखिर में शुरू हुआ था और वर्ष 1982 में केरल में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया था। 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान जनप्रतिनिधित्व कानून में भी संशोधन किए गए थे।

‘ईवीएम से जीते तो ठीक, हार गए तो गलत?’
शेलार ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 2007 और 2012 में मुंबई नगर निकाय चुनाव जीते थे और 2017 में भी ईवीएम के जरिए सत्ता बरकरार रखी थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीती थीं। उनके मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी ईवीएम के जरिए मुंबई के नगर निकाय चुनावों में जीत दर्ज की है। शेलार ने कहा, 'जब आप जीतते हैं तो ईवीएम अच्छी होती है, लेकिन जब कोई दूसरा जीतता है तो वही ईवीएम गलत हो जाती है। राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस का यही रुख है।' 

मतदाता सूची के मुद्दे पर भी राज ठाकरे को घेरा
भाजपा नेता ने मतदाता सूची को लेकर भी राज ठाकरे पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज ठाकरे खुद मतदाता सूची को दुरुस्त करने की मांग कर चुके थे। शेलार ने कहा कि राज ठाकरे ने अक्टूबर और नवंबर 2025 के साथ-साथ जनवरी 2026 में भी मतदाता सूची में दोहरे, मृत और फर्जी मतदाताओं को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने इन्हीं बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि अब राज ठाकरे एसआईआर का विरोध क्यों कर रहे हैं।

‘90 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग पूरी’
शेलार ने दावा किया कि एसआईआर के तहत अब तक 90 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है और बाकी मामलों पर अभी फैसला होना बाकी है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा और मजबूत बनाना है।

सीईसी हटाने और महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव की मांग पर सवाल
सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव कराने की मांग पर भी शेलार ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव इससे पहले नवंबर 2024 में हो चुके थे। शेलार ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद छह राज्यों में चुनाव हुए। इनमें से तीन राज्यों में भाजपा या राजग की जीत हुई, जबकि तीन राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें सत्ता में आईं। उन्होंने सवाल किया, 'अगर नतीजा तीन-तीन का है, तो फिर आरोप लगाने का आधार क्या है?'


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‘विपक्ष का आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं’
शेलार ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यात्मक नहीं बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रवैया ऐसा है कि 'हम जीतें तो जीत सही है और कोई दूसरा जीते तो उसकी जीत गलत है।' भाजपा नेता ने रविवार को निकाली गई ‘गर्जना मोर्चा’ रैली को 'कमजोर और खारिज की जा चुकी राजनीतिक ताकतों' का प्रदर्शन बताया।

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