फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Maratha quota: Manoj Jarange-Patil begins another hunger strike as ultimatum ends

Maharashtra: मराठा आरक्षण को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे मनोज जरांगे, सरकार पर गुमराह करने का आरोप

Wed, 25 Oct 2023 03:24 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 25 Oct 2023 03:24 PM IST
सार

जरांगे ने कहा कि मराठा आरक्षण पर फैसले को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 40 दिन इंतजार करने को कहा था, लेकिन उन्होंने फैसला नहीं किया इसलिए अनशन करने का फैसला किया है।
 

विज्ञापन
Maratha quota: Manoj Jarange-Patil begins another hunger strike as ultimatum ends
Manoj Jarange - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण लागू करने के लिए बुधवार से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को दी गई 40 दिन की समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध शुरू किया है।

विज्ञापन

अंतरवाली सराटी में आंदोलन शुरू

मराठा आरक्षण की मांग को राज्य में पुन: सुर्खियों में आए 40 वर्षीय जरांगे ने जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी में अपना आंदोलन शुरू किया।

विज्ञापन

सीएम ने नहीं लिया फैसला

अनशन पर बैठने से पहले जरांगे ने पत्रकारों से कहा, ‘मराठा आरक्षण पर फैसले को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुझसे 40 दिन इंतजार करने को कहा था, लेकिन उन्होंने फैसला नहीं किया इसलिए मैंने अपने गांव में अनशन करने का फैसला किया है।’

विज्ञापन
विज्ञापन

सितंबर में भी किया था भूख हड़ताल

जरांगे ने इस साल सितंबर में भी इस गांव में भूख हड़ताल की थी और मांग की थी कि मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया जाए। उन्होंने 14 सितंबर को भूख हड़ताल समाप्त करते हुए सरकार को आरक्षण लागू करने के लिए 24 अक्टूबर तक 40 दिन का समय दिया था।

सरकार जानबूझकर कर रही गुमराह

उन्होंने कहा, ‘मुझे बताया गया था कि राज्य भर में मराठा समुदाय के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए पुलिस मामले दो दिन के भीतर वापस ले लिए जाएंगे। यह आश्वासन दिए हुए 41 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एक भी मामला वापस नहीं लिया गया है। इसका मतलब है कि सरकार मराठा समुदाय को जानबूझकर गुमराह कर रही है।’

हम कुनबी प्रमाणपत्र के लिए…

जरांगे ने कहा, ‘माली समुदाय को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में मान्यता दी गई है क्योंकि इसका प्राथमिक कार्य कृषि माना जाता है। यही बात विदर्भ के मराठा समुदाय पर भी लागू होती है, जिन्हें उनकी कृषि गतिविधियों के कारण कुनबी के रूप में पहचाना जाता था और अब वे आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। अगर ऐसा हो सकता है तो हम कुनबी प्रमाणपत्र के लिए पात्र क्यों नहीं हैं, जबकि हमारा प्राथमिक व्यवसाय खेती है?'

मैं खुद एक मराठा परिवार से…

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिंदे ने मंगलवार को दशहरे पर एक रैली के दौरान कहा था, ‘किसी से अन्याय किए बिना और किसी का आरक्षण वापस लिए बिना, यह सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करेगी जो स्थायी होगा।’

शिंदे अपने भाषण के बीच में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने झुके और उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण देने का संकल्प लिया। शिंदे ने कहा कि चूंकि वह स्वयं एक साधारण मराठा परिवार से हैं, इसलिए वह उनका दुख एवं दर्द समझते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed