{"_id":"6a1b96a2493a53f7390c0d45","slug":"maratha-quota-manoj-jarange-ends-fast-after-talks-with-government-delegation-submitted-12-point-proposal-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनोज जरांगे ने खत्म किया अनशन: महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, सौंपा 12 सूत्रीय प्रस्ताव","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मनोज जरांगे ने खत्म किया अनशन: महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, सौंपा 12 सूत्रीय प्रस्ताव
Sun, 31 May 2026 07:32 AM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, जालना
पीटीआई, जालना
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 31 May 2026 07:32 AM IST
सार
मराठा आरक्षण के नेता मनोज जरांगे ने फडणवीस सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल की अपील पर उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया। जरांग ने पिछले वर्ष 29 अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में बड़ा आंदोलन शुरू किया था।
विज्ञापन
मराठा आरक्षण के नेता मनोज जरांगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। सरकार की ओर से उन्हें 12 सूत्री प्रस्ताव सौंपा गया था। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में शनिवार सुबह शुरू किया गया यह अनशन पिछले तीन वर्षों में उनका नौवां अनिश्चितकालीन उपवास था। उन्होंने शनिवार देर रात के बाद अपना अनशन समाप्त किया।
जरांगे ने शनिवार को भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे बैठकर सरकार पर दबाव बनाया। इसके बाद सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर 12 सूत्री प्रस्ताव सौंपा और अनशन समाप्त करने की अपील की। सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने किया।
ये भी पढ़ें: Weather: दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में आंधी-बारिश की संभावना, कई राज्यों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी
विज्ञापन
12 सूत्रीय प्रस्ताव में क्या-क्या?
मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार 58 लाख पहले से चिन्हित कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने पर सहमत हो गई है। उन्होंने बताया कि ये दस्तावेज ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे, जबकि इनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभागीय आयुक्त कार्यालय की होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार 15 दिन बाद जाति वैधता प्रमाणपत्र प्रक्रिया की समीक्षा करने पर भी सहमत हुई है। साथ ही उन्होंने मराठा और कुनबी समुदाय के लिए अलग मंत्रालय की मांग का समर्थन जारी रखने की बात कही। जरांगे ने कहा कि सरकार ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 15 दिनों के भीतर आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है।
अनशन के दौरान बिगड़ी तबीयत
अनशन के दौरान जरांगे की तबीयत भी बिगड़ गई थी। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें कई बार उल्टियां हुईं और उनका रक्तचाप भी कम हो गया था। अनशन समाप्त करने से पहले सरकारी डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की थी। जालना के सिविल सर्जन राजेंद्र पाटिल ने कहा, ''जरांगे को दो-तीन बार उल्टियां हुईं। उनका रक्तचाप भी कम हो गया था और तेज धूप में बैठे रहने के कारण उन्हें डिहाइड्रेशन भी हो गया।''
डॉक्टर ने बताया कि उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण छत्रपति संभाजीनगर के एक अस्पताल में किया जाएगा। मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे ने बिना किसी शेड या सुरक्षा व्यवस्था के खुले में अनशन शुरू किया था। जैसे ही आंदोलन शुरू हुआ, मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल मौके पर पहुंचे और जरांगे से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए सकारात्मक रूप से प्रतिबद्ध है।
ये भी पढ़ें: वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत: दोनों देश के बीच 60 अरब रुपये का समझौता, पहली बार हुआ आधिकारिक खुलासा
जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने, हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड लागू करने तथा आरक्षण आंदोलन में शामिल मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई थी। उन्होंने ओबीसी समुदाय की तर्ज पर मराठा समाज के लिए अलग मंत्रालय बनाए जाने की मांग भी की थी।
विज्ञापन
जरांगे ने शनिवार को भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे बैठकर सरकार पर दबाव बनाया। इसके बाद सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर 12 सूत्री प्रस्ताव सौंपा और अनशन समाप्त करने की अपील की। सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने किया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Weather: दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में आंधी-बारिश की संभावना, कई राज्यों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी
विज्ञापन
12 सूत्रीय प्रस्ताव में क्या-क्या?
मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार 58 लाख पहले से चिन्हित कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने पर सहमत हो गई है। उन्होंने बताया कि ये दस्तावेज ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे, जबकि इनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभागीय आयुक्त कार्यालय की होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार 15 दिन बाद जाति वैधता प्रमाणपत्र प्रक्रिया की समीक्षा करने पर भी सहमत हुई है। साथ ही उन्होंने मराठा और कुनबी समुदाय के लिए अलग मंत्रालय की मांग का समर्थन जारी रखने की बात कही। जरांगे ने कहा कि सरकार ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 15 दिनों के भीतर आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है।
अनशन के दौरान बिगड़ी तबीयत
अनशन के दौरान जरांगे की तबीयत भी बिगड़ गई थी। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें कई बार उल्टियां हुईं और उनका रक्तचाप भी कम हो गया था। अनशन समाप्त करने से पहले सरकारी डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की थी। जालना के सिविल सर्जन राजेंद्र पाटिल ने कहा, ''जरांगे को दो-तीन बार उल्टियां हुईं। उनका रक्तचाप भी कम हो गया था और तेज धूप में बैठे रहने के कारण उन्हें डिहाइड्रेशन भी हो गया।''
डॉक्टर ने बताया कि उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण छत्रपति संभाजीनगर के एक अस्पताल में किया जाएगा। मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे ने बिना किसी शेड या सुरक्षा व्यवस्था के खुले में अनशन शुरू किया था। जैसे ही आंदोलन शुरू हुआ, मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल मौके पर पहुंचे और जरांगे से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए सकारात्मक रूप से प्रतिबद्ध है।
ये भी पढ़ें: वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत: दोनों देश के बीच 60 अरब रुपये का समझौता, पहली बार हुआ आधिकारिक खुलासा
जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने, हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड लागू करने तथा आरक्षण आंदोलन में शामिल मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई थी। उन्होंने ओबीसी समुदाय की तर्ज पर मराठा समाज के लिए अलग मंत्रालय बनाए जाने की मांग भी की थी।