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Icra: चुनावों के कारण पूंजीगत खर्च से चूक सकते हैं कई राज्य, रिपोर्ट में दावा- 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था खर्च
Mon, 27 Nov 2023 06:27 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 27 Nov 2023 06:27 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार, अपने बजट अनुमानों को बनाए रखने के लिए 21 राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूसरी छमाही में पूंजीगत खर्च की दर 28 प्रतिशत पर बनी रहे। हालांकि, यह आचार संहिता के बाद से संभव नहीं है।
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- फोटो : iStock
विस्तार
राज्यों के चुनावों और अगले साल आम चुनाव के साथ राजस्व में गिरावट से चालू वित्त वर्ष में कई राज्य अपने पूंजीगत खर्च लक्ष्य से चूक सकते हैं। इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार, पहली छमाही में राज्यों का पूंजीगर्त खर्च रिकॉर्ड 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था। दूसरी छमाही में इसके घटने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार, अपने बजट अनुमानों को बनाए रखने के लिए 21 राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूसरी छमाही में पूंजीगत खर्च की दर 28 प्रतिशत पर बनी रहे। हालांकि, यह आचार संहिता के बाद से संभव नहीं है। आम चुनाव से पहले मार्च तिमाही में आचार संहिता लग सकती है। रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड शामिल नहीं हैं।
3.5 लाख करोड़ तक बढ़ा घाटा
21 राज्यों का संयुक्त राजस्व व राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर की अवधि में क्रमशः 70,000 करोड़ रुपये और 3.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया। एक साल पहले की अवधि में यह क्रमशः 50,000 करोड़ रुपये और 2.4 लाख करोड़ रुपये था।
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रिपोर्ट के अनुसार, अपने बजट अनुमानों को बनाए रखने के लिए 21 राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूसरी छमाही में पूंजीगत खर्च की दर 28 प्रतिशत पर बनी रहे। हालांकि, यह आचार संहिता के बाद से संभव नहीं है। आम चुनाव से पहले मार्च तिमाही में आचार संहिता लग सकती है। रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड शामिल नहीं हैं।
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3.5 लाख करोड़ तक बढ़ा घाटा
21 राज्यों का संयुक्त राजस्व व राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर की अवधि में क्रमशः 70,000 करोड़ रुपये और 3.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया। एक साल पहले की अवधि में यह क्रमशः 50,000 करोड़ रुपये और 2.4 लाख करोड़ रुपये था।
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