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कोविड प्रोटोकॉल: बदल जाएंगी कोरोना के इलाज की बहुत सी दवाएं, WHO की सिफारिश के बाद रेमडेसिविर भी जल्द हो सकती है बाहर

Sat, 22 May 2021 03:07 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 22 May 2021 03:07 PM IST
सार

डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि यह बीमारी अभी नई है। इसके इलाज के तरीकों पर लगातार शोध जारी हैं। यही वजह है कि इलाज के प्रोटोकॉल की जो गाइडलाइंस हैं उनमें बदलाव होते रहते हैं। डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि इस वक्त इलाज में प्रयोग की जाने वाली दवाओं पर शोध चल रहे हैं...

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Many other medicines may be exit soon after plasma therapy is discontinued in the treatment protocol of coronavirus
अस्पताल में कोरोना मरीज - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना के इलाज में इस्तेमाल बंद होने के बाद जल्द और भी बहुत सी दवाएं बाहर हो सकती हैं। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं और उनके प्रोटोकॉल को तय करने वाली कमेटी के एक्सपर्ट बहुत सी दवाओं पर शोध कर रहे हैं। इन शोधों के नतीजों के बाद तय होगा कि कौन सी दवाएं बाहर की जाएंगी और कौन सी नई दवाएं जोड़ी जाएंगी। सबसे ज्यादा चर्चा रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि इस एंटी-वायरल ड्रग्स पर शोध चल रहा है। जैसे ही नतीजे आएंगे उसके बाद तय होगा कि इसे कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकोल में रखा जाए या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार इस बात का उल्लेख करता आया है कि इस इंजेक्शन की कोरोना के इलाज में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है। अब उसने इसे हटाने को लेकर सिफ़ारिश भी कर दी है।

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कम कारगर दवाएं होंगी बाहर

कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और प्रोटोकॉल को तय करने वाली कमेटी के चेयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि यह बीमारी अभी नई है। इसके इलाज के तरीकों पर लगातार शोध जारी हैं। यही वजह है कि इलाज के प्रोटोकॉल की जो गाइडलाइंस हैं उनमें बदलाव होते रहते हैं। डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि इस वक्त इलाज में प्रयोग की जाने वाली दवाओं पर शोध चल रहे हैं। उनका कहना है शोध के नतीजों के बाद तय होगा कि कौन सी दवाई इस बीमारी के इलाज में और ज्यादा कारगर है और कौन सी दवा कारगर नहीं है। डॉक्टर अरोड़ा के मुताबिक जो दवाएं कम कारगर होंगी उन्हें प्रोटोकॉल से बाहर कर दिया जाएगा। इसके अलावा और भी कुछ दवाएं जिनका इस बीमारी के इलाज में फायदा हो रहा है, उन्हें प्रोटोकॉल के लिहाज से जोड़ा भी जा सकता है।

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शोध के नतीजों का इंतजार

रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि इस एंटीवायरल ड्रग पर शोध चल रहा है। उनका कहना है कि अभी इस ड्रग पर चल रहे शोध के नतीजे सामने नहीं आए हैं। जैसे ही नतीजे आएंगे, उसके बाद में इस एंटी-वायरल ड्रग टेस्ट में इसके इस्तेमाल पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल आज की तारीख में इस दवा का ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है जिस तरीके से रेमडेसिविर को लेकर दुनिया भर में विवाद छिड़े हैं उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दवा को भी प्रोटोकॉल ट्रीटमेंट से अलग कर दिया जाएगा।

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सालों तक होते रहेंगे बदलाव

कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और उनके प्रोटोकॉल का ना सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में लगातार शोध के माध्यम से बदलाव हो रहा है। दुनिया के प्रमुख मेडिकल जर्नल द लैंसेट में बीते शुक्रवार को प्लाज्मा थेरेपी को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में की गई रिसर्च और उसका नतीजा प्रकाशित हुआ। उसके बाद भारत समेत दुनिया के तमाम देशों ने प्लाजमा थेरेपी को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल करने से रोक लगा दी। इस जर्नल में प्रकाशित और भी कई लेखों के मुताबिक कोरोना के इलाज में दवाओं के इस्तेमाल पर शोध चल रहे हैं। चंडीगढ़ पीजीआई में माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर अरुणलोक चक्रवर्ती कहते हैं की इस नई बीमारी पर पूरी दुनिया में शोध चल रहा है। हर बार शोध के जो नतीजे आते हैं, उनके आधार पर इलाज के पैटर्न में बदलाव किया जाता है। उनका कहना है कि आने वाले कई सालों तक इस बीमारी और इसके इलाज के प्रोटोकॉल में लगातार परिवर्तन होते रहेंगे। क्योंकि वायरस का लगातार बदलाव जारी रहेगा और उसी के आधार पर इलाज की नई गाइडलाइंस बनती रहेंगी।

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