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कोविड-19: कनाडा-कोरिया के बाद न्यूजीलैंड भी आया आगे, जानें भारत के सारे मददगार देशों के नाम
Wed, 28 Apr 2021 05:00 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार संभव
Updated Wed, 28 Apr 2021 05:00 PM IST
सार
कनाडा ने 10 मिलियन डॉलर देने का एलान किया तो साउथ कोरिया ने मेडिकल सप्लाई भेजने की बात कही। इस बीच न्यूजीलैंड ने करीब 7 लाख अमेरिकी डॉलर देने का एलान किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
देश इस वक्त कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और रोजाना साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए मामले मिल रहे हैं। ऐसे में दूसरे देश भारत की मदद के लिए आगे आए हैं। इसी कड़ी में कनाडा ने 10 मिलियन डॉलर देने का एलान किया तो साउथ कोरिया ने मेडिकल सप्लाई भेजने की बात कही। इस बीच न्यूजीलैंड ने करीब 7 लाख अमेरिकी डॉलर देने का एलान किया है। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ननाइया महुता ने बुधवार (28 अप्रैल) को यह घोषणा की।
न्यूजीलैंड हेराल्ड ने महुता के हवाले से लिखा, 'द्वीपीय देश कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ को 10 लाख न्यूजीलैंड डॉलर का योगदान करेगा।' अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ (आईएफआरसी) ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन सांद्रक और अन्य जरूरी चिकित्सकीय सामग्री की अपूर्ति में सीधे तौर पर स्थानीय इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ काम कर रहा है।
ये देश भी कर रहे मदद
बता दें कि भारत की मदद करने वाले देशों में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस और ब्रिटेन के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, चीन, कनाडा, थाईलैंड आदि शामिल हैं। इन देशों से ऑक्सीजन के अलावा वेंटिलेटर और मास्क भी आ रहे हैं। सिंगापुर ने भारत के लिए ऑक्सीजन से भरे दो विमान भेजे तो कनाडा ने 60 करोड़ की मदद देने का एलान किया। इसके अलावा ब्रिटेन ने 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर्स की पहली खेप भेज चुका है।
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अमेरिका से ऑक्सीजन से जुड़ी सप्लाई के साथ जांच और इलाज के लिए दवाओं और उससे जुड़े कच्चे माल के मोर्चे पर भी मदद आनी शुरू होने वाली है। वहीं, वैक्सीन की भी मदद के बारे में बातचीत जारी है। अमेरिकी कंपनियां गूगल, एपल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और डिलॉएट समेत कई कारोबारी संगठनों के जरिये आर्थिक और तकनीकी मदद भारत को मिल रही है। फ्रांस भी अगले हफ्ते तक 5 लिक्विड ऑक्सीजन कंटेनर भेज देगा। ऑस्ट्रेलिया से भी बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स, सर्जिकल मास्क, दस्ताने और गॉगल्स आएंगे।
ये देश भी बने संकटमोचक
भारत ने हमारी मदद की, हम भी करेंगे : जर्मन राजदूत ने कहा
इस बीच भारत में पदस्थ जर्मनी के राजदूत वॉल्टर जे. लिंडर ने कहा कि कोविड-19 के दौरान भारत ने वैक्सीन व दवाएं बनाकर विश्व व हमारी मदद की अब हम हमारे दोस्त की मदद करेंगे। हम भारत में एक बड़ा ऑक्सीजन प्लांट लाने को तैयार हैं। इससे कई लोगों को ऑक्सीजन मिल सकेगी। हम विदेश मंत्रालय, रेडक्रॉस व अन्य संगठनों के संपर्क में है, इस प्लांट को कैसे लाया जा सकता है।
सोशल मीडिया के मैसेज देख पसीज रहा दिल
लिंडर ने कहा कि मैं स्वयं को आधा भारतीय व आधा जर्मन मानता हूं। जब मैं अस्पतालों में बेड व अन्य साधानों के लिए लोगों के परेशान होने के सोशल मीडिया में मैसेज व फोटो देखता हूं तो मेरा दिल पसीज जाता है। यहां के लोग बहुत नरम हैं। हम जल्द इस संकट से उबरेंगे और भारत की सुंदरता को देखेंगे।
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न्यूजीलैंड हेराल्ड ने महुता के हवाले से लिखा, 'द्वीपीय देश कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ को 10 लाख न्यूजीलैंड डॉलर का योगदान करेगा।' अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ (आईएफआरसी) ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन सांद्रक और अन्य जरूरी चिकित्सकीय सामग्री की अपूर्ति में सीधे तौर पर स्थानीय इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ काम कर रहा है।
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ये देश भी कर रहे मदद
बता दें कि भारत की मदद करने वाले देशों में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस और ब्रिटेन के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, चीन, कनाडा, थाईलैंड आदि शामिल हैं। इन देशों से ऑक्सीजन के अलावा वेंटिलेटर और मास्क भी आ रहे हैं। सिंगापुर ने भारत के लिए ऑक्सीजन से भरे दो विमान भेजे तो कनाडा ने 60 करोड़ की मदद देने का एलान किया। इसके अलावा ब्रिटेन ने 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर्स की पहली खेप भेज चुका है।
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अमेरिका से ऑक्सीजन से जुड़ी सप्लाई के साथ जांच और इलाज के लिए दवाओं और उससे जुड़े कच्चे माल के मोर्चे पर भी मदद आनी शुरू होने वाली है। वहीं, वैक्सीन की भी मदद के बारे में बातचीत जारी है। अमेरिकी कंपनियां गूगल, एपल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और डिलॉएट समेत कई कारोबारी संगठनों के जरिये आर्थिक और तकनीकी मदद भारत को मिल रही है। फ्रांस भी अगले हफ्ते तक 5 लिक्विड ऑक्सीजन कंटेनर भेज देगा। ऑस्ट्रेलिया से भी बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स, सर्जिकल मास्क, दस्ताने और गॉगल्स आएंगे।
ये देश भी बने संकटमोचक
| आयरलैंड | 700 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर, एक ऑक्सीजन जनरेटर, 365 वेंटिलेटर |
| बेल्जियम | 9000 डोज रेमडेसिविर |
| रोमानिया | 80 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर और 75 ऑक्सीजन सिलेंडर |
| लग्जमबर्ग | 58 वेंटिलेटर |
| पुर्तगाल | 50503 रेमडिसिविर, 20 हजार लीटर ऑक्सीजन प्रति सप्ताह |
| स्वीडन | 120 वेंटिलेटर |
| जर्मनी | मोबाइल ऑक्सीजन प्लांट, 120 वेंटिलेटर, 8 करोड़ एन 95 मास्क |
| ब्रिटेन | 495 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर, 140 वेंटिलेटर |
भारत ने हमारी मदद की, हम भी करेंगे : जर्मन राजदूत ने कहा
इस बीच भारत में पदस्थ जर्मनी के राजदूत वॉल्टर जे. लिंडर ने कहा कि कोविड-19 के दौरान भारत ने वैक्सीन व दवाएं बनाकर विश्व व हमारी मदद की अब हम हमारे दोस्त की मदद करेंगे। हम भारत में एक बड़ा ऑक्सीजन प्लांट लाने को तैयार हैं। इससे कई लोगों को ऑक्सीजन मिल सकेगी। हम विदेश मंत्रालय, रेडक्रॉस व अन्य संगठनों के संपर्क में है, इस प्लांट को कैसे लाया जा सकता है।
सोशल मीडिया के मैसेज देख पसीज रहा दिल
लिंडर ने कहा कि मैं स्वयं को आधा भारतीय व आधा जर्मन मानता हूं। जब मैं अस्पतालों में बेड व अन्य साधानों के लिए लोगों के परेशान होने के सोशल मीडिया में मैसेज व फोटो देखता हूं तो मेरा दिल पसीज जाता है। यहां के लोग बहुत नरम हैं। हम जल्द इस संकट से उबरेंगे और भारत की सुंदरता को देखेंगे।