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Maharashtra: 'मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता जब तक जारी रहेगा अनशन', मनोज जारांगे ने किया एलान

Sat, 09 Sep 2023 07:21 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 09 Sep 2023 07:21 PM IST
सार

जारांगे ने कहा कि हमारी मांग है कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाण पत्र मिले। उन्होंने मुंबई में मराठा समुदाय के नेताओं और सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता के ताजा नतीजे को भी खारिज कर दिया।

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Manoj Jarange says wont end fast till Marathas get Kunbi certificates
Manoj Jarange - फोटो : Social Media

विस्तार

मराठा आरक्षण के मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र में राजनीति जोरों पर है, जालना में अनशन पर बैठे मनोज जारांगे ने मांग की है कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाए। हालांकि इसको लेकर सीएम शिंदे ने सकारात्मक रुख अपनाया है। लेकिन इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने शनिवार को अपना रुख कड़ा करते हुए कहा कि जब तक महाराष्ट्र में मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत कुनबी जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा और उन्होंने रविवार से पानी और दवा लेना बंद करने की धमकी दी।

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 कैबिनेट के फैसले से खुश नहीं जारांगे
इस हफ्ते की शुरुआत में, महाराष्ट्र कैबिनेट ने फैसला किया कि मराठवाड़ा क्षेत्र के उन मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे जिनके पास निजाम युग के राजस्व या शिक्षा दस्तावेज हैं जो उन्हें कुनबी के रूप में पहचानते हैं।  कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह इस मामले में किसी भी मदद के लिए अपने तेलंगाना सीएम से भी बात करेंगे। कैबिनेट के फैसले के आधार पर, सात सितंबर को एक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी किया गया था, लेकिन यह जारांगे को संतुष्ट करने में विफल रहा।
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जारांगे ने कहा कि हमारी मांग है कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाण पत्र मिले। उन्होंने मुंबई में शुक्रवार देर रात मराठा समुदाय के नेताओं और सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता के ताजा नतीजे को भी खारिज कर दिया।
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कुनबी, कृषि से जुड़ा एक समुदाय है, जिसे महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है और शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण लाभ का भी मिलता है। मराठवाड़ा क्षेत्र महाराष्ट्र का हिस्सा बनने से पहले तत्कालीन हैदराबाद साम्राज्य का हिस्सा था। 

जारांगे की तीन और मांगें
जारांगे ने सात सितंबर जीआर में संशोधन की मांग के अलावा तीन और मांगें की हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने 2004 में कुनबियों, मराठा-कुनबियों और कुनबी-मराठों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में मान्यता देते हुए एक जीआर निकाला था, लेकिन यह बहुत कठोर था और इससे उन लोगों को लाभ नहीं हुआ जो कोटा के हकदार थे। उन्होंने सरकार से उस जीआर में संशोधन करने को कहा है। 


उन्होंने पिछले सप्ताह जालना जिले में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस मामले वापस लेने की भी मांग की है।  मराठा आरक्षण का मामला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जब पुलिस ने पिछले हफ्ते अंतरवाली साराटी में हिंसक भीड़ पर लाठीचार्ज किया था, जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर अधिकारियों को जारांगे को अस्पताल में स्थानांतरित करने से मना कर दिया था।

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