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मणिपुर: 'जिरीबाम हत्याकांड में गिरफ्तार किए लोगों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं,' आदिवासी संगठनों का बड़ा दावा
Sat, 02 Aug 2025 11:55 AM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:55 AM IST
सार
मणिपुर के जिरीबाम हत्याकांड में दो लोगों की गिरफ्तारी पर आदिवासी संगठनों ने विरोध जताया है। ह्मार समुदाय से जुड़े इन लोगों पर कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का दावा किया गया है। एनआईए और असम पुलिस की इस कार्रवाई को मनमानी बताया जा रहा है। संगठनों ने दोनों की रिहाई की मांग की है और जांच पर सवाल उठाए हैं।
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मणिपुर में तैनात सुरक्षा बल
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिपुर के जिरीबाम जिले में पिछले साल छह मीतेई लोगों की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के समर्थन में अब कई आदिवासी संगठन आ गए हैं। इन संगठनों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए दोनों लोग निर्दोष हैं। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ये गिरफ्तारियां असम पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की संयुक्त कार्रवाई में की गई थीं।
चुराचांदपुर जिले की ‘ह्मार वूमेन एसोसिएशन’ ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि थांगलिएनलाल ह्मार और लालरोसांग ह्मार की गिरफ्तारी मनमानी है। बयान में कहा गया कि दोनों आरोपी मेहनतकश दिहाड़ी मजदूर हैं और अब तक उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं है। संगठन ने असम पुलिस और एनआईए पर मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीकों से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
असम और मिजोरम से की गईं गिरफ्तारियां
थांगलिएनलाल ह्मार को असम के कछार जिले के मोइनाथोल दिलकश घाट से गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, लालरोसांग ह्मार को मिजोरम की राजधानी आइजोल से पकड़ा गया। दोनों गिरफ्तारियां एनआईए और असम पुलिस की संयुक्त टीम ने कीं। ह्मार वूमेन एसोसिएशन ने दोनों की तत्काल रिहाई की मांग की है और कहा है कि यह गिरफ्तारियां समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश हैं।
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कुकी-जो काउंसिल ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए
एक अन्य संगठन ‘कुकी-जो काउंसिल’ ने भी इन गिरफ्तारियों की आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि थांगलिएनलाल ह्मार एक नाविक हैं और उनका किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। काउंसिल ने कहा कि गिरफ्तारी मनमानी प्रतीत होती है और इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
ये भी पढ़ें- 'युद्ध सिर्फ मोर्चे पर नहीं, पूरे देश की ताकत से लड़ा जाता', डीआरडीओ भवन में बोले रक्षा मंत्री
हत्या के बाद भड़का था जातीय तनाव
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में जब छह मीतेई लोगों को अगवा किया गया था, उसी दिन सुरक्षाबलों ने 10 संदिग्ध उग्रवादियों को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। इनकी लाशें बाद में पोस्टमार्टम के लिए असम भेजी गई थीं। इस घटना के बाद मीतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच पहले से चल रहा जातीय तनाव और भड़क उठा था और इसका असर असम तक फैल गया था।
ये भी पढ़ें- 'भारत की अंतरिक्ष तकनीक की हो रही सराहना', इसरो प्रमुख बोले- हमारी ताकत का लोहा दुनिया ने माना
गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपी
गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच दिसंबर 2024 में एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए ने जांच के दौरान कई लोगों की पहचान की थी, जिन पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। अब आदिवासी संगठनों द्वारा गिरफ्तारी पर सवाल उठाने के बाद, यह मामला और संवेदनशील हो गया है। मामले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।
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चुराचांदपुर जिले की ‘ह्मार वूमेन एसोसिएशन’ ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि थांगलिएनलाल ह्मार और लालरोसांग ह्मार की गिरफ्तारी मनमानी है। बयान में कहा गया कि दोनों आरोपी मेहनतकश दिहाड़ी मजदूर हैं और अब तक उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं है। संगठन ने असम पुलिस और एनआईए पर मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीकों से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
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असम और मिजोरम से की गईं गिरफ्तारियां
थांगलिएनलाल ह्मार को असम के कछार जिले के मोइनाथोल दिलकश घाट से गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, लालरोसांग ह्मार को मिजोरम की राजधानी आइजोल से पकड़ा गया। दोनों गिरफ्तारियां एनआईए और असम पुलिस की संयुक्त टीम ने कीं। ह्मार वूमेन एसोसिएशन ने दोनों की तत्काल रिहाई की मांग की है और कहा है कि यह गिरफ्तारियां समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश हैं।
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कुकी-जो काउंसिल ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए
एक अन्य संगठन ‘कुकी-जो काउंसिल’ ने भी इन गिरफ्तारियों की आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि थांगलिएनलाल ह्मार एक नाविक हैं और उनका किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। काउंसिल ने कहा कि गिरफ्तारी मनमानी प्रतीत होती है और इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
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हत्या के बाद भड़का था जातीय तनाव
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में जब छह मीतेई लोगों को अगवा किया गया था, उसी दिन सुरक्षाबलों ने 10 संदिग्ध उग्रवादियों को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। इनकी लाशें बाद में पोस्टमार्टम के लिए असम भेजी गई थीं। इस घटना के बाद मीतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच पहले से चल रहा जातीय तनाव और भड़क उठा था और इसका असर असम तक फैल गया था।
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गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपी
गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच दिसंबर 2024 में एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए ने जांच के दौरान कई लोगों की पहचान की थी, जिन पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। अब आदिवासी संगठनों द्वारा गिरफ्तारी पर सवाल उठाने के बाद, यह मामला और संवेदनशील हो गया है। मामले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।