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Rajnath Singh: 'युद्ध सिर्फ मोर्चे पर नहीं, पूरे देश की ताकत से लड़ा जाता', डीआरडीओ भवन में बोले रक्षा मंत्री
Sat, 02 Aug 2025 05:28 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 02 Aug 2025 05:28 AM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ भवन में आयोजित नागरिक सेवा दिवस पर कहा कि मौजूदा अनिश्चित दौर में नागरिक-सैन्य सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर CDS और सेना प्रमुखों की सराहना की। उन्होंने कहा कि युद्ध सिर्फ सैनिक नहीं लड़ते, बल्कि पूरा देश और व्यवस्था उसके साथ खड़ी होती है।
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के अनिश्चित दौर और तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए नागरिक-सैन्य तालमेल को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में मिली सफलता के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस), तीनों सेना प्रमुखों और रक्षा सचिव की सराहना की।
डीआरडीओ भवन में 84वें सशस्त्र बल मुख्यालय (एएफएचक्यू) में शुक्रवार को नागरिक सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अनिश्चितता पर कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन हमारी तैयारियों पर हमारा पूरा नियंत्रण संभव है। उन्होंने कहा कि जब भी सशस्त्र बल युद्ध लड़ते हैं, तो उनके पराक्रम को पूरे देश का समर्थन प्राप्त होता है। जब एक सैनिक युद्ध लड़ता है तो एक तरह से पूरा देश और पूरी व्यवस्था उसके साथ लड़ती है।
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नागरिक-सैन्य सहयोग पर जोर
उन्होंने कहा, युद्ध में नागरिक-सैन्य सहयोग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम इसे समझते हैं। सिंह ने कहा, आज हम यह आकलन नहीं कर सकते कि दुनिया के जो हिस्से शांतिपूर्ण हैं, वहां भविष्य में क्या स्थिति होगी। तीन-चार महीने पहले, क्या हमने सोचा था कि हमें इतनी जल्दी ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देना पड़ेगा। रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने सेना प्रमुखों के साथ अपनी बैठकों में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हमें हमेशा तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा, हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि युद्ध की तैयारी शांति काल में ही कर लेनी चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक मजबूत सैन्य शक्ति के लिए एक सशक्त प्रशासनिक प्रणाली बेहद आवश्यक है। सिंह ने युद्ध के साथ-साथ शांति काल में भी देश की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एएफएचक्यू सिविलियन सर्विसेज की सराहना की।
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हमले के बाद मैंने सैन्य अधिकारियों से पूछा, क्या आप कार्रवाई को तैयार हैं
रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद बैठक में मैंने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से पूछा कि क्या आप कार्रवाई के लिए तैयार हैं। सभी ने एक स्वर में कहा, हां बिल्कुल। सिंह ने कहा कि इस बैठक में सीडीएस, तीनों सेना प्रमुख, रक्षा सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा अनुसंधान व विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत के साथ मंत्रालय के अफसर उपस्थित थे।
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डीआरडीओ भवन में 84वें सशस्त्र बल मुख्यालय (एएफएचक्यू) में शुक्रवार को नागरिक सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अनिश्चितता पर कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन हमारी तैयारियों पर हमारा पूरा नियंत्रण संभव है। उन्होंने कहा कि जब भी सशस्त्र बल युद्ध लड़ते हैं, तो उनके पराक्रम को पूरे देश का समर्थन प्राप्त होता है। जब एक सैनिक युद्ध लड़ता है तो एक तरह से पूरा देश और पूरी व्यवस्था उसके साथ लड़ती है।
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नागरिक-सैन्य सहयोग पर जोर
उन्होंने कहा, युद्ध में नागरिक-सैन्य सहयोग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम इसे समझते हैं। सिंह ने कहा, आज हम यह आकलन नहीं कर सकते कि दुनिया के जो हिस्से शांतिपूर्ण हैं, वहां भविष्य में क्या स्थिति होगी। तीन-चार महीने पहले, क्या हमने सोचा था कि हमें इतनी जल्दी ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देना पड़ेगा। रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने सेना प्रमुखों के साथ अपनी बैठकों में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हमें हमेशा तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा, हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि युद्ध की तैयारी शांति काल में ही कर लेनी चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक मजबूत सैन्य शक्ति के लिए एक सशक्त प्रशासनिक प्रणाली बेहद आवश्यक है। सिंह ने युद्ध के साथ-साथ शांति काल में भी देश की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एएफएचक्यू सिविलियन सर्विसेज की सराहना की।
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हमले के बाद मैंने सैन्य अधिकारियों से पूछा, क्या आप कार्रवाई को तैयार हैं
रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद बैठक में मैंने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से पूछा कि क्या आप कार्रवाई के लिए तैयार हैं। सभी ने एक स्वर में कहा, हां बिल्कुल। सिंह ने कहा कि इस बैठक में सीडीएस, तीनों सेना प्रमुख, रक्षा सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा अनुसंधान व विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत के साथ मंत्रालय के अफसर उपस्थित थे।