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Manipur: मणिपुर घटना के बाद डर की वजह से मिजोरम छोड़ रहा मैतेई समुदाय, सरकार ने की विमान भेजने की पेशकश
Sun, 23 Jul 2023 12:08 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजवाल
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:08 PM IST
सार
मिजोरम में रहने वाले मिजो लोगों के, मणिपुर के कुकी और जोमी जनजाति के लोगों के साथ गहरे जातीय संबंध हैं। मणिपुर में जिन महिलाओं के साथ ज्यादती की गई, वह कुकी और जोमी जनजाति की ही थीं।
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मिजोरम से शुरू हुआ पलायन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बीते दिनों मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने की घटना का असर पड़ोसी राज्य मिजोरम पर भी पड़ा है। बता दें कि डर की वजह से मिजोरम में रह रहे मैतेई समुदाय ने पलायन शुरू कर दिया है। मिजोरम में एक पूर्व आतंकी संगठन की ओर से राज्य में रह रहे मैतेई समुदाय के लोगों के लिए धमकी जारी करने के बाद समुदाय के 41 लोग सड़क मार्ग से असम पहुंचे हैं। वहीं, तीन विमानों से 78 लोग असम पहुंचे। हालांकि ये मैतेई समुदाय के हैं या नहीं, स्पष्ट नहीं है।
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अधिकारियों ने बताया कि अभी पता नहीं है कि इनमें से कितने लोग भय के कारण गए हैं, क्योंकि यह सभी वाणिज्यिक उड़ानें थीं। वहीं, मणिपुर में रह रहे मिजो समुदाय के 31 छात्र राज्य की गंभीर स्थिति को देखकर मिजोरम लौट गए हैं। दूसरी ओर मणिपुर में हिंसा के बीच मिजोरम में मिजो संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।
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असम पहुंचने वालों में प्रोफेसर भी
सड़क मार्ग से असम जाने वाले मैतेई लोग सिलचर पहुंचे हैं और उन्हें लखीपुर विकास खंड के एक भवन में रखा गया है। ये सभी संपन्न परिवारों के लोग हैं जो किसी अनहोनी से पहले सुरक्षा के लिहाज से मिजोरम से निकले हैं। इनमें कुछ प्रोफेसर और सरकारी अधिकारी भी हैं। मिजोरम में अब तक मैतेई समुदाय के खिलाफ कोई हिंसा नहीं हुई है।
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एक बयान से फैला डर
बता दें कि मिजोरम में रहने वाले मिजो लोगों के, मणिपुर के कुकी और जोमी जनजाति के लोगों के साथ गहरे जातीय संबंध हैं। मणिपुर में जिन महिलाओं के साथ ज्यादती की गई, वह कुकी और जोमी जनजाति की ही थीं। ऐसे में पूर्व उग्रवादी संगठन मिजो नेशनल फ्रंट के सहयोगी संगठन पीस अकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA) ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि 'मिजोरम में रह रहे मैतेई समुदाय के लोग अपनी सुरक्षा के लिए राज्य छोड़ दें। बयान में कहा गया कि मणिपुर की घटना से मिजो लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, ऐसे में मिजोरम, अब मैतेई लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है।'
मिजोरम में रहते हैं दो हजार मैतेई लोग
मिजोरम में करीब दो हजार मैतेई समुदाय के लोग रहते हैं। ये अधिकतर राजधानी आइजवाल और इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं। PAMRA के बयान के बाद मिजोरम में रहने वाले मैतई समुदाय में डर फैल गया और लोगों ने पलायन शुरू कर दिया। हालांकि मिजोरम की सरकार ने लोगों को विश्वास दिलाया है कि उन्हें मिजोरम में कोई खतरा नहीं है और मैतई बहुल कई जगहों पर पुलिस की तैनाती भी की गई है। हालांकि इसके बावजूद लोग मिजोरम से पलायन कर रहे हैं।
हिंसा के बाद से मणिपुर से हो रहा पलायन
मणिपुर सरकार ने भी एक बयान जारी कहा है कि हम मिजोरम में रह रहे मैतेई समुदाय के लोगों के संपर्क में हैं और अगर उन्हें जरूरत है तो राज्य सरकार लोगों को लाने के लिए चार्टर्ड विमान भेज सकती है। बता दें कि मणिपुर में जारी हिंसा के बाद से अभी तक 12 हजार से ज्यादा कुकी और जोमी जनजाति के लोग मिजोरम में शरण ले चुके हैं।