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मणिपुर: विरोध के बाद सरकार ने म्यांमार के नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगाने वाला आदेश लिया वापस

Tue, 30 Mar 2021 10:38 AM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: प्रियंका तिवारी Updated Tue, 30 Mar 2021 10:38 AM IST
सार

  • म्यांमार में सेना अपने ही नागरिकों पर चला रही गोलियां
  • मणिपुर सरकार ने शरणार्थियों के प्रवेश को किया प्रतिबंधित

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Manipur: Government imposes ban on entry of Myanmar citizens ordered not to give shelter and food to refugees
म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर सेना की कार्रवाई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

म्यांमार में एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से लगातार खबरें आ रही हैं कि यहां के नागरिक सेना की कार्रवाई से बचने के लिए बड़ी संख्या में भारत की सीमाओं में घुसकर पलायन कर रहे हैं। इसे देखते हुए मणिपुर की एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने म्यांमार से आने वाले लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था, लेकिन जन आक्रोश की आशंका से बचने के लिए तीन दिन बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया।

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बता दें, इस आदेश को लेकर मणिपुर के चार जिलों चंदेल, तेंगुपाल, कम्जोंग, उखरुल और चूड़ाचांदपुर के कमिश्नरों को पत्र भेजा गया था। यह सारे जिले मणिपुर की सीमा से काफी नजदीक हैं। सरकार की तरफ से पत्र में आदेश दिया गया था कि केवल मानवीय या फिर मेडिकल इमरजेंसी के आधार पर ही म्यांमार के नागरिकों को देश में प्रवेश दिया जाए। असल में मणिपुर सरकार को डर है कि म्यांमार के नागरिक भारत में शरणार्थी बनकर घुसने का प्रयास कर सकते हैं क्योंकि म्यांमार की सेना कार्रवाई के नाम पर अपने ही नागरिकों पर गोलियां चला रही है।

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मणिपुर के गृह सचिव एच ज्ञान प्रकाश की तरफ से जारी इस पत्र में कहा गया था कि सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार के नागरिक भारत में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में जिलों को निर्देश दिया जाता है कि वे उन्हें देश में न घुसने दें। इतना ही नहीं, पत्र में यह भी आदेश दिया गया कि शरणार्थियों के लिए न राहत शिविर बनाएं और न खाने-पीने का इंतजाम करें। वे शरण मांगने आएं तो उन्हें हाथ जोड़कर वापस भेजें। ज्ञात हो कि आदेश में आधार पंजीकरण रोकने की बात भी कही गई थी।
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आदेश की हो रही आलोचना
26 मार्च को जारी इस आदेश की काफी आलोचना की जा रही है। इस आदेश को भारत में शरण देने की परंपरा के खिलाफ और अमानवीय कहा जा रहा है। एक रिपोर्ट की मानें तो मिजोरम के एक अधिकारी के हवाले से सोमवार को बताया गया है कि म्यांमार में पिछले माह सैनिक तख्तापलट यहां के कम से कम 1000 नागरिक मिजोरम में सीमा पार कर शरण ले चुके हैं। इनमें से 100 लोगों को वापस भेजा गया था, लेकिन वह फिर से मणिपुर में ही कहीं छुप गए हैं।

इस बीच म्यांमार से आ रहे शरणार्थियों के प्रवेश को रोकने की कोशिशों के खिलाफ मिजोरम में बढ़ रहे जन आक्रोश के बाद अधिकारी ने सोमवार को एक अन्य परामर्श जारी करते हुए कहा कि पिछले पत्र में उल्लेखित सामग्री गलत थी। इसमें कहा गया, ‘ऐसा लगता है कि पत्र की बातों को गलत तरीके से समझा गया। राज्य सरकार सभी मानवीय कदम उठा रही है, जिसमें शरणार्थियों को इंफाल ले जाना, घायलों का इलाज कराना शामिल है। राज्य सरकार हर संभव मदद मुहैया कराती रहेगी।’


प्रकाश ने कहा, ‘मुझे सरकार का यह फैसला बताने के निर्देश दिए गए हैं कि उसने 26 मार्च को लिखे पत्र को वापस लेने का फैसला किया है।’ मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे शरणार्थियों को पनाह देते का अनुरोध किया था और कहा था कि म्यांमार में बड़े पैमाने पर मानवीय तबाही हो रही है और सेना निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रही है।एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि पड़ोसी देश से अवैध प्रवास को रोकने के 10 मार्च के दिशानिर्देशों के बाद केंद्र से कोई आदेश नहीं मिला है।

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