फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Manipur crisis Irom Sharmila says AFSPA is not solution

मणिपुर: अफ्स्पा बढ़ाना संकट का समाधान नहीं, बोलीं इरोम शर्मिला; पीएम मोदी पर भी साधा निशाना

Thu, 28 Sep 2023 04:10 PM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 28 Sep 2023 04:10 PM IST
सार

इंफाल घाटी के 19 पुलिस थाना क्षेत्रों और पड़ोसी असम के साथ अपनी सीमा साझा करने वाले क्षेत्र को छोड़कर, बुधवार को मणिपुर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम या एएफएसपीए को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया।

विज्ञापन
Manipur crisis Irom Sharmila says AFSPA is not solution
मणिपुर की आयरन लेडी शर्मिला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में अफ्स्पा बढ़ाए जाने के एक दिन बाद, अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने कहा कि "दमनकारी कानून" संघर्ष का राज्य में समाधान नहीं है। 

विज्ञापन

प्रदेश में आयरन लेडी के नाम से मशहूर शर्मिला ने गुरुवार को एक टेलीफोनिक साक्षात्कार में न्यूज एजेंसी से कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को समान नागरिक संहिता जैसे प्रस्तावों के माध्यम से एकरूपता के लिए काम करने के बजाय विविधता का सम्मान करना चाहिए। 
विज्ञापन


इंफाल घाटी के 19 पुलिस थाना क्षेत्रों और पड़ोसी असम के साथ अपनी सीमा साझा करने वाले क्षेत्र को छोड़कर, बुधवार को मणिपुर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम या एएफएसपीए को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया। उन्होंने कहा कि अफस्पा का विस्तार राज्य में समस्याओं या जातीय हिंसा का समाधान नहीं है। केंद्र और मणिपुर सरकार को क्षेत्र की विविधता का सम्मान करना होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


शर्मिला ने आगे कहा कि विभिन्न जातीय समूहों के मूल्यों, सिद्धांतों और प्रथाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत अपनी विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन केंद्र सरकार और भाजपा समान नागरिक संहिता जैसे प्रस्तावों के माध्यम से एकरूपता बनाने में अधिक रुचि रखते हैं। 

पीएम मोदी पर साधा निशाना
शर्मिला ने सवाल उठाया कि मई में हिंसा भड़कने के बाद से पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर का दौरा क्यों नहीं कर सके। उन्होंने दवा किया कि अगर प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य का दौरा किया होता और लोगों से बात की होती, तो अब तक समस्याएं हल हो गई होतीं। इस हिंसा का समाधान करुणा और प्रेम में है, लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा इस मुद्दे को सुलझाने के लिए उत्सुक नहीं है और चाहती है कि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे।  

मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की गलत नीतियों ने मणिपुर को इस अभूतपूर्व संकट की ओर धकेल दिया है। यह कहते हुए कि जातीय हिंसा में राज्य के युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, और इन व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण ही युवक और महिला की मौत हुई है,  शर्मिला की आंखों में आंसू आ गए। 

महिलाओं की स्थिति पर उठाए सवाल
उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में महिलाओं की स्थिति को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा। मणिपुर की महिलाएं AFSPA और इस जातीय हिंसा का खामियाजा भुगत रही हैं। अगर आप महिलाओं की गरिमा की रक्षा नहीं कर सकते, तो महिला सशक्तिकरण की बातें और महिला आरक्षण विधेयक का कोई मतलब नहीं रहेगा। 

इसके अलावा उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मणिपुर की महिलाएं कुछ अलग हैं?" मुख्य भूमि भारत के लोगों से? सिर्फ इसलिए कि हम अलग दिखते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है।

लड़ने के नाम पर करोड़ों बर्बाद 
शर्मिला, जो एएफएसपीए को निरस्त करने की मांग को लेकर 16 साल की लंबी भूख हड़ताल पर थीं, ने सोचा कि यह कानून कब तक पूर्वोत्तर में समस्याओं का समाधान करेगा। वह बोलीं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हमें इस औपनिवेशिक कानून को कब तक आगे बढ़ाना चाहिए? उग्रवाद से लड़ने के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद किए जाते हैं, जिसका उपयोग पूर्वोत्तर के समग्र विकास के लिए किया जा सकता था। 




इंटरनेट महीनों से निलंबित है और बुनियादी अधिकार छीन लिए जाते हैं। अगर मुंबई या दिल्ली में कानून व्यवस्था की समस्या हो तो क्या आप AFSPA लगा सकते हैं?
शर्मिला ने 2000 में इंफाल के पास मालोम में एक बस स्टॉप पर सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर दस नागरिकों की हत्या के बाद एएफएसपीए के खिलाफ अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने 2016 में इसे समाप्त करने से पहले 16 साल तक अपना शांतिपूर्ण प्रतिरोध किया। 51 वर्षीय अधिकार कार्यकर्ता 2017 में शादी हो गई और जुड़वां लड़कियों की मां अब बेंगलुरु में बस गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed