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Manipur: एन बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, नए CM की नियुक्ति तक संभालेंगे पद
Sun, 09 Feb 2025 06:24 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 09 Feb 2025 06:24 PM IST
सार
Manipur: मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बीच एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। बीरेन सिंह ने इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
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एन बीरेन सिंह ने दिया मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार शाम मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति तक पद संभालने के लिए कहा है। पिछले साल के अंत में राज्य में जातीय हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने जनता से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि यह पूरा साल बेहद खराब रहा। मैं राज्य के लोगों से तीन मई 2023 से लेकर आज तक जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए माफी मांगता हूं। कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। कई लोगों ने अपना घर छोड़ दिया। मुझे इसका दुख है। पिछले तीन-चार महीनों में शांति की स्थिति देखकर मुझे उम्मीद है कि 2025 में राज्य में सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी।
एन बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे में क्या कहा
राज्यपाल को सौंपे गए अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा, मैं नोंगथोम्बम बीरेन सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं। मणिपुर के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। मैं केंद्र सरकार अत्यंत आभारी हूं, जिन्होंने समय पर कार्यवाही, हस्तक्षेप, विकास कार्य और विभिन्न परियोजनाओं को लागू किया, ताकि मणिपुर के हर एक नागरिक के हित की रक्षा की जा सके। मेरी केंद्र सरकार से ईमानदार अपील है कि वे इसी तरह काम जारी रखें। मैं कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को आपके सामने रखना चाहता हूं-
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1- मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा जाना चाहिए, जिसका हजारों वर्षों का समृद्ध और सभ्य इतिहास है।
2- सीमा पर घुसपैठ रोकी जानी चाहिए और अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की नीति बनाई जाए।
3- नशे और नशे के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखी जाना चाहिए।
4- एमएफआर की कड़ी और पूरी तरह से सुरक्षित नई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें बायोमेट्रिक जांच सख्ती से की जाए।
5- सीमा पर समयबद्ध और तेजी से काम जारी रहना चाहिए।
मणिपुर के राज्यपाल ने विधानसभा के आगामी सत्र रद्द
मणिपुर में 10 फरवरी से शुरू होने वाले 12वीं विधानसभा के सातवें सत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। विधानसभा सचिव के. मेघजीत सिंह द्वारा रविवार को जारी एक नोटिस से यह जानकारी मिली। नोटिस में कहा गया है कि मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 12वीं मणिपुर विधानसभा के सातवें सत्र को आहूत करने के पिछले निर्देश को तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिया है।
हिंसा के चलते दबाव में थे बीरेन सिंह
राज्य में मई 2023 से जातीय हिंसा चल रही है, जिसमें अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। नवंबर में मणिपुर के जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके तीन बच्चों की हत्या के बाद भी बवाल हुआ। राज्य में लगातार हो रही हिंसा के चलते एन बीरेन सिंह भारी दबाव में थे और उनको पद से हटाने की मांग जोर पकड़ रही थी। एनडीए की सहयोगी एनपीपी ने भी मणिपुर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और नेतृत्व परिवर्तन करने की मांग की थी।
कैसे शुरू हुई हिंसा
मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हिंसा पिछले साल तीन मई को उस समय शुरू हुई थी, जब मणिपुर उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आदिवासी छात्रों संघ (ATSUM) ने एक रैली आयोजित की थी, जिसमें मणिपुरी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद से राज्य में हिंसा का सिलसिला जारी है, और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।
संबंधित वीडियो-
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Manipur CM N Biren Singh hands over the letter of resignation from the post of Chief Minister to Governor Ajay Kumar Bhalla at the Raj Bhavan in Imphal. pic.twitter.com/zcfGNVdPPo
— ANI (@ANI) February 9, 2025विज्ञापन
एन बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे में क्या कहा
राज्यपाल को सौंपे गए अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा, मैं नोंगथोम्बम बीरेन सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं। मणिपुर के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। मैं केंद्र सरकार अत्यंत आभारी हूं, जिन्होंने समय पर कार्यवाही, हस्तक्षेप, विकास कार्य और विभिन्न परियोजनाओं को लागू किया, ताकि मणिपुर के हर एक नागरिक के हित की रक्षा की जा सके। मेरी केंद्र सरकार से ईमानदार अपील है कि वे इसी तरह काम जारी रखें। मैं कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को आपके सामने रखना चाहता हूं-
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1- मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा जाना चाहिए, जिसका हजारों वर्षों का समृद्ध और सभ्य इतिहास है।
2- सीमा पर घुसपैठ रोकी जानी चाहिए और अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की नीति बनाई जाए।
3- नशे और नशे के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखी जाना चाहिए।
4- एमएफआर की कड़ी और पूरी तरह से सुरक्षित नई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें बायोमेट्रिक जांच सख्ती से की जाए।
5- सीमा पर समयबद्ध और तेजी से काम जारी रहना चाहिए।
मणिपुर के राज्यपाल ने विधानसभा के आगामी सत्र रद्द
मणिपुर में 10 फरवरी से शुरू होने वाले 12वीं विधानसभा के सातवें सत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। विधानसभा सचिव के. मेघजीत सिंह द्वारा रविवार को जारी एक नोटिस से यह जानकारी मिली। नोटिस में कहा गया है कि मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 12वीं मणिपुर विधानसभा के सातवें सत्र को आहूत करने के पिछले निर्देश को तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिया है।
हिंसा के चलते दबाव में थे बीरेन सिंह
राज्य में मई 2023 से जातीय हिंसा चल रही है, जिसमें अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। नवंबर में मणिपुर के जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके तीन बच्चों की हत्या के बाद भी बवाल हुआ। राज्य में लगातार हो रही हिंसा के चलते एन बीरेन सिंह भारी दबाव में थे और उनको पद से हटाने की मांग जोर पकड़ रही थी। एनडीए की सहयोगी एनपीपी ने भी मणिपुर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और नेतृत्व परिवर्तन करने की मांग की थी।
कैसे शुरू हुई हिंसा
मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हिंसा पिछले साल तीन मई को उस समय शुरू हुई थी, जब मणिपुर उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आदिवासी छात्रों संघ (ATSUM) ने एक रैली आयोजित की थी, जिसमें मणिपुरी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद से राज्य में हिंसा का सिलसिला जारी है, और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।
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