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मेनका चाहती थीं दो रिपोर्टरों को ब्लैकलिस्ट कराना, सरकार ने किया इनकार

Tue, 12 Apr 2016 01:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 12 Apr 2016 01:44 PM IST
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maneka gandhi wanted two reporters on blacklist, government denied

सरकार और मी‌डिया में तनातनी नई नहीं हैं, लेकिन मोदी सरकार के एक मंत्री ने नाराजगी एवज में दो रिपोर्टरों को ही ब्लैकलिस्ट करने की मांग कर डाली। केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने दो रिपोर्टरों को दी गई मान्यता वापस लेने की मांग की, हालांकि प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने उनकी मांग मानने से मना करा दिया। 

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मेनका गांधी ने रायटर्स के दो रिपोर्टेरों आदित्य कालरा और एंड्रयू मैकआस्किल को सरकार द्वारा दी गई मान्यता वापस लेने की मांग की। रायटर्स ने 19 अक्टूबर, 2015 की एक रिपोर्ट को वापस लेने या किसी भी प्रकार की तब्दीली करने से इनकार कर दिया था। एजेंसी ने कुपोषण के मद में खर्च किए जाने वाले बजट में कटौती पर खबर प्रकाशित किया था।
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मेनका ने उस खबर में बजट कटौती की आलोचना करते हुए कहा था कि जो पैसा मिल रहा है उससे केवल 2.7 मिलियन हेल्‍थ वर्कर्स को जनवरी महीने की तनख्वाह भर दी जा सकती है। मंत्रालय की योजनाओं को कटौती के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। 

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मोदी सरकार की सार्वजनिक रूप से की गई दुर्लभ आलोचना'

maneka gandhi wanted two reporters on blacklist, government denied
Narendra modi - फोटो : Reuters

रायटर्स ने अपनी खबर में मेनका की टिप्पणियों को 'मोदी सरकार की सार्वजनिक रूप से की गई दुर्लभ आलोचना' करार दिया था। हालांकि खबर प्रकाशित होने के बाद महिला व बाल विकास मंत्रालय ने रायटर्स के दावों का खंडन किया और कहा कि एजेंसी ने मेनका गांधी के बयानों की 'गलत और शरारतपूर्ण' व्याख्या की। 

मंत्रालय द्वारा दी गई सफाई में कहा गया कि कई ऐसी बातों को, जिन्हें मेनका गांधी का बयान बताया ‌जा रहा है, बिलकुल गलत है और मंत्रालय रायटर्स के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा। 

मेनका गांधी ने निजी सचिव मनोज के अरोड़ा ने मामले में सूचना व प्रसारण मंत्रालय के सचिव सुनील अरोड़ा को एक पत्र लिखा को कहा ‌कि दो रिपोर्टरों को कालरा और मैकआस्किल की पीआईबी द्वारा दी गई मान्यता रद्द कर दी जाए। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने मामला पीआईबी को सौंप दिया, जिसने सात मार्च को दिए गए जवाब में कहा कि वो मान्यता वापस नहीं ले सकते, क्योंकि मान्यता संबंधी सेंट्रल प्रेस एक्रेडिशन गाइडलाइंस में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि गलत रिपोर्टिंग या शरारतपूर्ण रिपोर्टिंग पर मान्यता वापस ले ली जाए। 

पीआईबी ने महिला व बाल विकास मंत्रालय को सलाह दी की वो ये मामला भारतीय प्रेस परिषद को भेजे। गलत रिपोर्टिंग और पत्रकारिता के मानदंडों के उल्लंघन का मामला उसी के कार्यक्षेत्र में आता है। 

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