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भारतीय दूतावास ने 150 कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला, हजारों यात्री अभी भी फंसे

Wed, 04 Jul 2018 02:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 02:21 AM IST
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Manasarovar pilgrims stranded in Nepal due to bad weather
कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए हजारों यात्री फंसे हुए हैं - फोटो : ANI

नेपाल के रास्ते कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए 150 तीर्थयात्रियों को काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से सुरक्षित निकाल लिया गया है। साथ ही यात्रा के दौरान 2 तीर्थयात्रियों के शवों को भी हेलिकॉप्टर के जरिए वापस लाया जा रहा है। इससे पहले कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री खराब मौसम के चलते नेपालगंज-सिमीकोट-हिलसा रूट पर फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। 

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काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बयान जारी करते हुए कहा कि हिलसा से सिमीकोट गए 150 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हिलसा में बुनियादी ढांचे की कमी के चलते बचाव कार्यों में दिक्कतें आ रही थीं, वहीं सिमीकोट में बोर्डिंग, आवास, संचार और  चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। 
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दूतावास ने बताया कि उन्होंने स्थानीय अथॉरिटी और फ्लाइट ऑपरेटर्स से संपर्क करके 9 कॉमर्शियल उड़ानों के जरिए 158 यात्रियों को सिमीकोट से नेपालगंज सुरक्षित निकाल लिया। नेपालगंज में सभी तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं और 3 घंटे की सड़क यात्रा के जरिए  लखनऊ पहुंचा जा सकता है। वहीं दूतावास नेपाल सेना के साथ भी संपर्क में हैं, ताकि मौसम में सुधार होते ही हेलीकॉप्टर के जरिए उड़ान भरी जा सके। 
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दूतावास ने अपने बयान में कहा कि स्पेशल हेलीकॉप्टर्स के जरिए 2 तीर्थयात्रियों के शवों को भी काठमांडू से नेपाल लाया जा रहा है। इनमें केरल की लीला महेंद्र नारायण (56) की 2 जुलाई को सिमीकोट में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की वजह से मौत हो गई थी, वहीं सत्या लक्ष्मी नारायण सुब्बा राव की 3 जुलाई को तिब्बत में हार्ट अटैक से मौत गई थी। 

दूतावास ने अपने चार सदस्यों की टीम 3 जुलाई को नेपालगंज भेज चुकी है। यह टीम जल्द से जल्द सिमीकोट और हिलसा पहुंच जाएगी, जहां वे अपना कैंप लगा कर तीर्थयात्रियों को सहायता उपलब्ध कराएंगे। 

अभी भी फंसे हैं हजारों तीर्थयात्री

Manasarovar pilgrims stranded in Nepal due to bad weather
बचाव अभियान जारी
गौरतलब है कि सिमीकोट में 525, 550 हिलसा और तिब्बत की तरफ 500 तीर्थयात्री फंसे हुए थे, जिनमें से 150 को निकाल लिया गया है। भारतीय दूतावास वहां फंसे सभी तीर्थयात्रियों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही उनके वहां रहने और खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था की जा रही है। 

वहीं, इन तीर्थयात्रियों को वहां से निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ते पर भी विचार किया जा रहा है। दूतावास ने नेपाल की ओर से अपर्याप्त चिकित्सा और नागरिक सुविधाओं का हवाला देते हुए सभी टूर ऑपरेटर्स से तिब्बत की तरफ से गए तीर्थयात्रियों को कुछ समय तक वहीं रोकने के लिए भी कहा है। 

साथ ही मिशन ने स्थानीय एयरलाइंस से अतिरिक्त एयरक्राफ्ट को तैयार रखने के लिए कहा गया, ताकि मौसम साफ होते ही नेपालगंज और सिमिकोट में फंसे तीर्थयात्रियों को जल्द से जल्द निकाला जा सके। इसके अलावा इन तीर्थयात्रियों को निकालने के लिए सिमिकोट-सुरखेत/सिमिकोट-जुमला/सिमिकोट-मुगु जैसे दूसरे रूटों का भी इस्तेमाल करने को कहा है। वहीं, बीमार लोगों को जल्द से जल्द निकालने के लिए नेपाल सेना के हैलीकॉप्टर्स की भी मदद ली जा रही है। 
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