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SIR Row: ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले एसआईआर कराने पर उठाए सवाल, बोलीं- असम को क्यों छोड़ा गया?

Tue, 03 Feb 2026 03:56 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 03 Feb 2026 03:56 PM IST
सार

CM Mamata Banerjee On SIR: ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले इस कार्रवाई के समय और नीयत पर सवाल खड़े किए। भाजपा शासित असम में एसआईआर न होने का भी मुद्दा उठाया। आइए विस्तार से जानते हैं इस दौरान मुख्यमंत्री ममता ने क्या कुछ कहा।

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Mamata Banerjee raises questions about SIR process before elections ask Why was Assam left out
सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर पर उठाए सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

एसआईआर पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंगाल में इसे लेकर लगातार विवाद बढ़ रहा है। इसी बीच नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्र और चुनाव तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया जा रहा। ममता बनर्जी ने इसे चुनाव से ठीक पहले की गई संदिग्ध कार्रवाई बताया।

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ममता बनर्जी ने कहा कि उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग एसआईआर प्रक्रिया के पीड़ित हैं और ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। उनके अनुसार कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को न तो ठीक से सूचना दी जा रही है और न ही उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिल रहा है।
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ममता ने सीईसी के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से समर्थन मांगा। एक दिन पहले, बनर्जी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ एसआईआर मुद्दे पर कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ हुई बैठक को बीच में छोड़कर बाहर निकल गई थीं और आरोप लगाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अहंकार दिखाया और उन्हें अपमानित किया।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को जवाबदेह ठहराने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से कानून लाने के विचार का तृणमूल कांग्रेस समर्थन करती है या नहीं, इस सवाल पर बनर्जी ने कहा, हम भी चाहते हैं कि उन्हें (मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को) पद से हटाया जाए।उन्होंने कहा, हमारे पास पर्याप्त आंकड़े (सांसद) नहीं हैं, लेकिन एक प्रावधान है। इसे दर्ज किया जाएगा। अगर वे (कांग्रेस) ऐसा कुछ करते हैं, तो हम भी अपने पार्टी सांसदों से इस पर चर्चा करेंगे। जब जनहित की बात आती है, तो हम मिलकर काम करते हैं।

बनर्जी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी आगामी राज्य चुनावों में अकेले चुनाव लड़ेगी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल करने के बजाय चुनाव में उनका सामना करने की चुनौती दी। बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हटाए जा रहे नामों में अधिकतर तृणमूल समर्थकों के नाम हैं। उन्होंने कहा, शत-प्रतिशत नाम तृणमूल कांग्रेस के (लोगों के) हैं… एक-दो नाम शायद साख बचाने के लिए अन्य पार्टियों के है।

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ममता बनर्जी ने उठाए ये सवाल

  • चुनाव से ठीक पहले एसआईआर प्रक्रिया क्यों शुरू की गई?
  • इतनी बड़ी जांच दो-तीन महीने में बिना पहले से योजना के कैसे पूरी की जा सकती है?
  • चार चुनावी राज्यों में से तीन में एसआईआर हो रहा है, लेकिन भाजपा शासित असम में क्यों नहीं?
  • एसआईआर के कथित पीड़ितों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा।
  • कई लोग एसआईआर से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोग इससे परेशान भी हैं।


चुनाव से पहले समय पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने एसआईआर की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। उन्होंने पूछा कि क्या इतनी बड़ी जांच बिना लंबी तैयारी के दो–तीन महीने में पूरी की जा सकती है। उनके मुताबिक इससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनती है।

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भाजपा शासित राज्य का भी किया जिक्र
ममता बनर्जी ने कहा कि चार चुनावी राज्यों में से तीन में एसआईआर किया जा रहा है, लेकिन भाजपा शासित असम में यह प्रक्रिया नहीं हो रही। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण करार दिया। उनका आरोप है कि विपक्ष शासित राज्यों को निशाना बनाकर यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग से मुलाकात और विरोध
उन्होंने बताया कि एक दिन पहले वह प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने गई थीं और एसआईआर से प्रभावित लोगों को भी साथ ले गईं। ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक के दौरान उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हुआ, जिसके विरोध में उन्होंने बैठक छोड़ दी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।

पीड़ितों को न्याय दिलाने का दावा
ममता बनर्जी ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे वास्तविक नागरिक हैं और लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी ऐसे लोगों की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा के लिए यह अभियान जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो बड़े स्तर पर आंदोलन भी होगा।



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