{"_id":"6a1b3f912da6cb6c2405c5c3","slug":"mamata-banerjee-questions-security-and-hospital-treatment-after-attack-on-abhishek-banerjee-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: कहा- घायल अभिषेक के इलाज में अस्पताल ने की कोताही, सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: कहा- घायल अभिषेक के इलाज में अस्पताल ने की कोताही, सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल
Sun, 31 May 2026 01:20 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 31 May 2026 01:20 AM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था और अस्पताल के इलाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण डॉक्टरों को सही से काम नहीं करने दिया गया, जबकि बेले व्यू अस्पताल का कहना है कि अभिषेक बनर्जी को कोई गंभीर चोट नहीं आई है और उन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला
- फोटो : एक्स/एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर गहरा दुख जताया है। शनिवार रात संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए, बल्कि अस्पताल में अभिषेक के इलाज को लेकर बनी परिस्थितियों पर भी गंभीर आपत्ति जताई। ममता ने आरोप लगाया कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि पर हमला किया गया और बाद में उनके इलाज को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बनाया गया।
अस्पताल प्रशासन पर बाहरी दबाव का आरोप
ममता बनर्जी ने अस्पताल के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर अभिषेक को भर्ती करने की जरूरत नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों ले जाया गया? उन्होंने पूछा कि उन्हें करीब दो घंटे तक निगरानी में क्यों रखा गया और कई मेडिकल टेस्ट व स्कैन कराने की सलाह क्यों दी गई? ममता के अनुसार, अभिषेक रात करीब 8:15 बजे से लेकर रात 11 बजे तक डॉक्टरों की देखरेख में थे। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टरों ने इलाज और निगरानी को जरूरी माना, तो किसी भी बाहरी एजेंसी या ताकत को उस फैसले में दखल नहीं देना चाहिए था।
ममता ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर भारी दबाव डाला गया था। उन्होंने कहा कि चिकित्सा से जुड़े फैसले पूरी तरह से डॉक्टरों के हाथ में होने चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के इशारे पर। उन्होंने कहा कि राजनीति में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Attack on Abhishek Banerjee: ममता बोलीं- शासक बने हत्यारे; कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने शुभेंदु सरकार को घेरा
'हेलमेट न होता तो जा सकती थी जान'
ममता बनर्जी ने बताया कि डॉक्टरों की शुरुआती जांच में अभिषेक के चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर चोटों की बात सामने आई थी। अंदरूनी ब्लीडिंग या फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए एक्स-रे और स्कैन की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह हमला बेहद जानलेवा हो सकता था। अगर सही समय पर अभिषेक के सिर पर हेलमेट न होता, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। ममता ने पुलिस की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि पुलिस को इस दौरे की पहले से जानकारी थी, फिर भी सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
भाजपा पर साधा निशाना
ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भाजपा और पुलिस प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा को कानून और नियमों के तहत काम करना चाहिए। वे किसी मरीज को इलाज तक नहीं मिलने दे रहे हैं। ममता ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके सामने ही धमकियां दे रही थी और कह रही थी कि इलाज के लिए भी अनुमति की जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या अब मरीजों के इलाज के लिए भी भाजपा से अनुमति लेनी होगी? यह पूरी तरह से अमानवीय व्यवहार है। दूसरी तरफ, बेले व्यू अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा है कि मरीज पूरी तरह होश में है और बातचीत कर रहा है। छाती पर मामूली चोट के निशान के अलावा शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है।
विज्ञापन
अस्पताल प्रशासन पर बाहरी दबाव का आरोप
ममता बनर्जी ने अस्पताल के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर अभिषेक को भर्ती करने की जरूरत नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों ले जाया गया? उन्होंने पूछा कि उन्हें करीब दो घंटे तक निगरानी में क्यों रखा गया और कई मेडिकल टेस्ट व स्कैन कराने की सलाह क्यों दी गई? ममता के अनुसार, अभिषेक रात करीब 8:15 बजे से लेकर रात 11 बजे तक डॉक्टरों की देखरेख में थे। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टरों ने इलाज और निगरानी को जरूरी माना, तो किसी भी बाहरी एजेंसी या ताकत को उस फैसले में दखल नहीं देना चाहिए था।
विज्ञापन
ममता ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर भारी दबाव डाला गया था। उन्होंने कहा कि चिकित्सा से जुड़े फैसले पूरी तरह से डॉक्टरों के हाथ में होने चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के इशारे पर। उन्होंने कहा कि राजनीति में हिंसा की कोई जगह नहीं है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Attack on Abhishek Banerjee: ममता बोलीं- शासक बने हत्यारे; कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने शुभेंदु सरकार को घेरा
'हेलमेट न होता तो जा सकती थी जान'
ममता बनर्जी ने बताया कि डॉक्टरों की शुरुआती जांच में अभिषेक के चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर चोटों की बात सामने आई थी। अंदरूनी ब्लीडिंग या फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए एक्स-रे और स्कैन की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह हमला बेहद जानलेवा हो सकता था। अगर सही समय पर अभिषेक के सिर पर हेलमेट न होता, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। ममता ने पुलिस की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि पुलिस को इस दौरे की पहले से जानकारी थी, फिर भी सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
भाजपा पर साधा निशाना
ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भाजपा और पुलिस प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा को कानून और नियमों के तहत काम करना चाहिए। वे किसी मरीज को इलाज तक नहीं मिलने दे रहे हैं। ममता ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके सामने ही धमकियां दे रही थी और कह रही थी कि इलाज के लिए भी अनुमति की जरूरत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या अब मरीजों के इलाज के लिए भी भाजपा से अनुमति लेनी होगी? यह पूरी तरह से अमानवीय व्यवहार है। दूसरी तरफ, बेले व्यू अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा है कि मरीज पूरी तरह होश में है और बातचीत कर रहा है। छाती पर मामूली चोट के निशान के अलावा शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है।