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Attack on Abhishek Banerjee: ममता बोलीं- शासक बने हत्यारे; कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने शुभेंदु सरकार को घेरा
Sat, 30 May 2026 07:46 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 30 May 2026 07:46 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राजनीति गरमा गई है। ममता बनर्जी, खरगे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे सुनियोजित साजिश बताया है। वहीं, भाजपा ने घटना से खुद को अलग करते हुए हिंसा की निंदा की है।
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अभिषेक बनर्जी पर हमला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा के आरोपों को लेकर गरमा गई है। दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद सियासी माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। अभिषेक बनर्जी जब चुनाव बाद हिंसा प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, उसी दौरान उन पर पत्थर, अंडे और जूते फेंके गए। घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा और इस हमले को लोकतंत्र पर हमला बताया।
घटना के बाद ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि शासक ही हत्यारे बन गए हैं। ममता ने कहा कि इस तरह की राजनीति शर्मनाक है और लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस ने भी इस घटना का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि हमला पहले से तय साजिश का हिस्सा था। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए ऐसी घटनाएं कराई जा रही हैं।
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ममता बनर्जी बोलीं- अस्पताल प्रशासन को दी रही धमकी
ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पतालों और अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि अभिषेक बनर्जी का इलाज न हो सके। ममता ने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन को पुलिस की ओर से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर दुखी हैं, लेकिन उन पर दबाव बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा कानून के हिसाब से काम नहीं कर रही और मरीजों के इलाज तक में दखल दे रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस अस्पताल में उनके सामने दबाव बना रही थी और हालात अमानवीय हो चुके हैं।
अभिषेक आईटीयू में भर्ती, कुणाल का दावा- अस्पताल पर भी दबाव
अभिषेक बनर्जी को मिंटो पार्क स्थित अस्पताल मेंभर्ती कराया गया है। शनिवार रात अस्पताल के बाहर तृणमूल नेता कुणाल घोष ने बताया कि अभिषेक का अस्पताल के इंटेंसिव थैरेपी यूनिट (आईटीयू) में इलाज चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अस्पताल पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले अभिषेक को ईएम बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। उस अस्पताल में उपचार नहीं मिलने का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही लगा चुकी हैं। कुणाल घोष ने कहा, अनुभव बहुत खराब रहा। अस्पताल प्रशासन दबाव में है। कहा जा रहा है कि इलाज के लिए किसी की अनुमति लेनी होगी। एक घायल व्यक्ति इलाज के लिए आया है, उसके उपचार के लिए अनुमति क्यों लेनी पड़ेगी। इससे साफ है कि अस्पताल प्रशासन पर दबाव है।
क्या तृणमूल कांग्रेस ने हमले को साजिश बताया?
तृणमूल कांग्रेस की नेता सुष्मिता देव ने इस हमले को “पहले से सोची-समझी साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि यह आम लोगों का गुस्सा नहीं था, बल्कि तृणमूल कांग्रेस को डराने और चुप कराने की कोशिश थी। पार्टी की दूसरी नेता सागरिका घोष ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अभिषेक बनर्जी पर हमला हो रहा था, तब पुलिस मौके पर नजर नहीं आई। तृणमूल नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा में बड़ी लापरवाही हुई है।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी हिंसा का कारण नहीं बन सकते। खरगे ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना को “जानलेवा हमला” बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में अराजक माहौल पैदा हो गया है और भाजपा सिर्फ नफरत और हिंसा की राजनीति कर रही है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताया है।
भाजपा ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस हमले से पार्टी को अलग बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पहले तृणमूल कांग्रेस के शासन में हिंसा झेली है। उन्होंने दावा किया कि कई भाजपा समर्थकों और महिलाओं के साथ पहले मारपीट हुई थी। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इसके बावजूद भाजपा सरकार के दौरान तृणमूल नेताओं को पूरी सुरक्षा मिली हुई है।
अभिषेक बनर्जी ने हमले को लेकर क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने इस हमले को उन्हें जान से मारने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे। तृणमूल सांसद का कहना है कि अगर किसी राजनीतिक नेता पर खुलेआम हमला हो सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। बंगाल की राजनीति में हिंसा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।
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ममता बनर्जी को जैसे ही अभिषेक बनर्जी के अस्पताल पहुंचने की जानकारी मिली, वह तुरंत कालीघाट स्थित अपने आवास से अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने अभिषेक की सेहत की जानकारी ली और डॉक्टरों से बातचीत की। इस दौरान अभिषेक की मां लता बनर्जी भी अस्पताल में मौजूद रहीं। तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सांसद भी अस्पताल पहुंचे। घटना के बाद पार्टी नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
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ममता बनर्जी बोलीं- अस्पताल प्रशासन को दी रही धमकी
ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पतालों और अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि अभिषेक बनर्जी का इलाज न हो सके। ममता ने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन को पुलिस की ओर से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर दुखी हैं, लेकिन उन पर दबाव बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा कानून के हिसाब से काम नहीं कर रही और मरीजों के इलाज तक में दखल दे रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस अस्पताल में उनके सामने दबाव बना रही थी और हालात अमानवीय हो चुके हैं।
अभिषेक आईटीयू में भर्ती, कुणाल का दावा- अस्पताल पर भी दबाव
अभिषेक बनर्जी को मिंटो पार्क स्थित अस्पताल मेंभर्ती कराया गया है। शनिवार रात अस्पताल के बाहर तृणमूल नेता कुणाल घोष ने बताया कि अभिषेक का अस्पताल के इंटेंसिव थैरेपी यूनिट (आईटीयू) में इलाज चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अस्पताल पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले अभिषेक को ईएम बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। उस अस्पताल में उपचार नहीं मिलने का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही लगा चुकी हैं। कुणाल घोष ने कहा, अनुभव बहुत खराब रहा। अस्पताल प्रशासन दबाव में है। कहा जा रहा है कि इलाज के लिए किसी की अनुमति लेनी होगी। एक घायल व्यक्ति इलाज के लिए आया है, उसके उपचार के लिए अनुमति क्यों लेनी पड़ेगी। इससे साफ है कि अस्पताल प्रशासन पर दबाव है।
क्या तृणमूल कांग्रेस ने हमले को साजिश बताया?
तृणमूल कांग्रेस की नेता सुष्मिता देव ने इस हमले को “पहले से सोची-समझी साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि यह आम लोगों का गुस्सा नहीं था, बल्कि तृणमूल कांग्रेस को डराने और चुप कराने की कोशिश थी। पार्टी की दूसरी नेता सागरिका घोष ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अभिषेक बनर्जी पर हमला हो रहा था, तब पुलिस मौके पर नजर नहीं आई। तृणमूल नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा में बड़ी लापरवाही हुई है।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी हिंसा का कारण नहीं बन सकते। खरगे ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना को “जानलेवा हमला” बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में अराजक माहौल पैदा हो गया है और भाजपा सिर्फ नफरत और हिंसा की राजनीति कर रही है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताया है।
भाजपा ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस हमले से पार्टी को अलग बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पहले तृणमूल कांग्रेस के शासन में हिंसा झेली है। उन्होंने दावा किया कि कई भाजपा समर्थकों और महिलाओं के साथ पहले मारपीट हुई थी। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इसके बावजूद भाजपा सरकार के दौरान तृणमूल नेताओं को पूरी सुरक्षा मिली हुई है।
अभिषेक बनर्जी ने हमले को लेकर क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने इस हमले को उन्हें जान से मारने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे। तृणमूल सांसद का कहना है कि अगर किसी राजनीतिक नेता पर खुलेआम हमला हो सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। बंगाल की राजनीति में हिंसा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।