क्या बंगाल चुनाव में चलेगा 'मां' कैंटीन का 'जादू': पांच रुपये में लोगों को मिल रहा भरपेट खाना
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पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान छिड़ चुका है और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने 291 सिपहसालार भी तैनात कर दिए हैं। अब नजरें भाजपा उम्मीदवारों पर टिक गई हैं। इस बीच बंगाल में सबसे ज्यादा चर्चा 'मां' कैंटीन की हो रही है। दरअसल, गरीबों के लिए यह कैंटीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फरवरी 2021 के दौरान की थी, जिसमें पांच रुपये में लोगों को भरपेट खाना मिलता है। अब सवाल उठता है कि क्या इस कैंटीन का 'जादू' चुनाव में चलेगा? क्या दीदी को अपनी इस योजना का सियासी फायदा मिलेगा?
कब शुरू हुई यह कैंटीन?
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 'मां' कैंटीन 15 फरवरी 2021 को शुरू की गई थी। राज्य के शहरी विकास एवं नागरिक मामलों के विभाग के आंकड़ों की मानें तो 25 फरवरी तक 'मां' कैंटीन में एक लाख 19 हजार 112 लोगों को खाना परोसा जा चुका है। दावा किया जा रहा है कि दो सप्ताह से भी कम समय में यह कैंटीन लोगों द्वारा काफी पसंद की जा रही है।
क्या-क्या मिलता है खाने में?
बता दें कि 'मां' कैंटीन की शुरुआत गरीबों को भरपेट खाना देने के मकसद से शुरू की गई है। राज्य में मौजूद हर कैंटीन दोपहर 12:30 बजे खुलती है और तीन बजे तक यहां खाना मिलता है। पांच रुपये की थाली में लोगों को चावल, दाल, सब्जी और अंडा करी मिलता है। 'मां' कैंटीन की लोकप्रियता इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि कैंटीन बंद होने से पहले ही पूरा खाना खत्म हो जाता है।
कैंटीन के बारे में क्या कहते हैं लोग?
'मां' कैंटीन से कोलकाता में रहने वाले गरीब लोग बेहद खुश हैं। सिक्युरिटी गार्ड का काम करने वाले जाकिर नास्कर बताते हैं कि पहले वह खाने पर रोजाना 35 रुपये खर्च करते थे। अब उन्हें भरपेट खाना महज पांच रुपये मिल जाता है, जिससे वह बेहद खुश हैं। वहीं, नबकुमार माझी कहते हैं कि गरीबों के लिए यह काफी अच्छी पहल है। इससे गरीबों को खाने के बारे में चिंता नहीं करनी पड़ती है।