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राजनीति: ममता-केजरीवाल भी चलेंगे अखिलेश वाला सियासी दांव! क्या कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया 'सीट वाला' बयान?

Sun, 24 Sep 2023 03:31 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 24 Sep 2023 03:31 PM IST
सार

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरीके से अपनी पार्टी को आगे रखते हुए यह बयान दिया कि वह टिकट मांग नहीं रहे हैं, बल्कि दे रहे हैं। उसके सियासी गलियारों में तमाम मायने निकाले जा रहे हैं।

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Mamata Banerjee Arvind Kejriwal will play Akhilesh Yadav political trick this become challenge for Congress
अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी और ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने यह कहकर गठबंधन में बड़ी सियासी हलचल पैदा कर दी है कि "वह सीटें मांग नहीं रहे बल्कि सीटें दे रहे हैं"। सियासी गलियारों में कहा यही जा रहा है कि अगर अखिलेश यादव की तर्ज पर ही अन्य राज्यों के प्रमुख विपक्षी दल चलने लगे तो कांग्रेस के लिए आने वाले लोकसभा चुनाव में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जो स्थिति विपक्षी गठबंधन में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की है वही पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की है। 

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उसी तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि "अगर जिस राज्य में गठबंधन में शामिल दलों का सबसे बड़ा जनाधार होगा वहां पर उसको सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी" के फॉर्मूले पर टिकट बंटवारे की स्थिति बनी तो कांग्रेस के लिए व्यक्तिगत तौर पर बड़ी चुनौतियां आ सकती हैं। हालांकि शुरुआती दौर में जिस राज्य में जिसकी सबसे ज्यादा बड़ी पार्टी होगी उसी आधार पर INDIA गठबंधन में टिकटों के बंटवारे की मांग भी हुई थी। वहीं कांग्रेस और समजावादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पूरा विपक्ष इस वक्त एकजुट होकर चुनाव की तैयारी में है। सीटों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है।
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरीके से अपनी पार्टी को आगे रखते हुए यह बयान दिया कि वह टिकट मांग नहीं रहे हैं, बल्कि दे रहे हैं। उसके सियासी गलियारों में तमाम मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला कहते हैं कि अखिलेश यादव का यह बयान उस आधार पर दिया गया है जिस पर गठबंधन की नींव रखते वक्त टिकटों के बंटवारे की चर्चा हुई थी। 
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शुक्ला कहते हैं कि तब तक यही हुआ था कि जिसकी जिस राज्य में सबसे ज्यादा सीटें होंगी या सबसे बड़ा दल होगा उसकी हिस्सेदारी लोकसभा के चुनाव में टिकटों के लिहाज से सबसे ज्यादा होगी। अब अगर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सीटें ले रहे हैं या वह यह कह रहे हैं कि वह सीटें किसी से मांग नहीं रहे बल्कि दे रहे हैं तो इसमें गलत क्या है। उनका कहना है कि कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में इस वक्त उतना वजूद नहीं है कि वह समाजवादी पार्टी के लिए सीटों का ऑफर कर सके। कांग्रेस के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती भी है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से अखिलेश यादव ने टिकट बंटवारे पर बयान दिया है उस बयान का असर देश के अलग-अलग राज्यों में भी देखाने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषक उमाकांत दुबे कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी विपक्ष की सबसे बड़ी नेता है और राज्य में उनकी ही सरकार है। अगर अखिलेश यादव के इस बयान को टिकटों के बंटवारे से पहले का बड़ा सियासी स्ट्रोक माना जाए तो पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की तरह ममता बनर्जी की सबसे बड़ी दावेदारी और भागीदारी होनी चाहिए। 

इसी तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल विपक्ष में बड़ी पार्टी के तौर पर सबसे बड़े नेता हैं और सरकार भी उनकी है। दुबे कहते हैं कि यह मांग INDIA गठबंधन के दौरान उठी थी कि जिस राज्य में गठबंधन का सहयोगी दल सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर होगा उसकी उतनी ही सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि इस पर आम सहमति तो नहीं बनी थी लेकिन इस मांग के उठने और अखिलेश यादव के टिकट मांगने की बजाय टिकट देने वाले बयान को जोड़कर देखा जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला कहते हैं कि अगर गठबंधन के नेताओं के इन बयानों को देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के लिए निजी तौर पर कई राज्यों में बड़ी चुनौतियां सामने नजर आ रही हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनकर टिकटों के बंटवारे के लिहाज से खड़ी है। 

ठीक उसी तरह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस भी कांग्रेस के लिए टिकटों के बंटवारे के लिहाज से बड़ी चुनौती है। आम आदमी पार्टी का टिकटों के बंटवारे को लेकर पहले से ही टकराहट सामने आ चुकी है। दिल्ली में जहां आम आदमी पार्टी सभी सीटों पर मजबूत तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं कांग्रेस लगातार यह दावा कर रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी रही थी। 

इसलिए दिल्ली में टिकट बंटवारे के लिहाज से उसकी दावेदारी को किसी भी स्तर पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। बृजेश शुक्ला कहते हैं कि इसी तरह बिहार में भी कांग्रेस सीटों को देने की बजाय लेने की स्थिति में ही नजर आ रही है। हालांकि महाराष्ट्र में पहले से चल रहे हैं महाअगाड़ी गठबंधन के चलते बहुत सी परिस्थितियां अन्य राज्यों की तुलना में सामान्य है। लेकिन चुनौतियों की लिहाज से कांग्रेस वहां भी अपनी मनमर्जी से सीटों को देने की स्थिति में नहीं है।

हालांकि, इस पूरी सियासत पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि अखिलेश यादव के बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से तमाम तरह के नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत कहते हैं की अखिलेश यादव अगर उत्तर प्रदेश में सीटों को मांगने की बजाय सीटों को छोड़ने की बात कर रहे हैं तो उसमें गलत क्या कह रहे हैं। 

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन INDIA की सबसे बड़ी पार्टी है। अगर वह सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ती भी है तो अंततः उसका फायदा INDIA को ही होने वाला है। कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि अखिलेश यादव ने इस दौरान यह भी कहा कि सीटों के बंटवारे पर विपक्षी दल एक होकर आपसी सामंजस्य के साथ सीटों का बंटवारा करेंगे। इसलिए यह कहना कि अखिलेश यादव इस बयान से बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है तो यह महज भारतीय जनता पार्टी की अपनी एक सोच हो सकती है।


समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद और विपक्षी दलों के कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य जावेद अली कहते हैं कि सवाल सीटों की संख्या का है ही नहीं। वह कहते हैं कि सिर्फ इसे एक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। जावेद अली कहते हैं कि विपक्षी गठबंधन INDIA मजबूत स्थिति में है और सीटों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरीके का कोई विवाद है ही नहीं। टिकट चाहे सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी को मिले या कांग्रेस पार्टी को। तृणमूल कांग्रेस को मिले या आम आदमी पार्टी को। जेडीयू, राजद और शिवसेना समेत राकपा को मिले या गठबंधन के किसी अन्य सहयोगी को मिले। लेकिन जो भी सीटें जिसको मिलेगी उसके आए परिणाम अंततः INDIA गठबंधन को ही मजबूत करेंगे। इस चुनाव में सीटें किसको कितनी मिलेंगी यह बड़ा सवाल किसी तरह से नहीं है।

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