Parliament Session: खरगे ने अदाणी मामले में क्यों लिया इस देश की खु्फिया एजेंसी का नाम, जेपीसी गठन की मांग
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अदाणी मामले में केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में ही नियम 267 के तहत अदाणी का मुद्दा उठाया।
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कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अदाणी मामले में केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में ही नियम 267 के तहत अदाणी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी गठित करने की मांग की है। विपक्षी दल के सदस्यों ने जब यह मामला उठाया तो सदन स्थगित कर दिया गया। खरगे का कहना था, आज जो सदन स्थगित हुआ, इसकी वजह क्या थी, मुझे तो मालूम नहीं था। हमने तो 267 के तहत अदाणी का मुद्दा उठाया था। अदाणी समूह पर करप्शन, ब्राइबरी और फाइनेंशियल इररेगुलेरिटीज के गंभीर आरोप हैं। उसके बारे में हम सदन के सामने कुछ बातें रखना चाहते थे। यह लगभग 2,030 करोड़ रुपये की रिश्वत का मामला है। जनता के पैसे का इस्तेमाल रिश्वत देने के लिए किया गया, इसके बारे में हम चेयरमैन साहब को भी समझाना चाहते थे। खरगे ने इस मामले में बांग्लादेश, मलेशिया, इस्राइल और सिंगापुर का जिक्र किया।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, पार्लियामेंट में अगर प्रधानमंत्री आते तो ठीक था। हम इस मुद्दे को उनके सामने रखने वाले थे। इस रिश्वत का रिकॉर्ड भी अदाणी ग्रुप के जो चेयरमैन हैं, सीईओ हैं, उन्होंने तो इसका रिकॉर्ड भी रखा है। वे जानते हैं कि किसको किस रेट पर पैसे दिए गए। कितने पैसे दिए गए, इसका सब रिकॉर्ड उनके पास वहां पर अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने यह सीज कर लिया है। उनके पास यह रिकॉर्ड है और इससे पहले भी अदाणी ग्रुप के लोग स्टॉक हेराफेरी भी और अकाउंटिंग फ्रॉड और ओवर इन्वॉयसिंग और सेल कंपनीज, इनका भी इस्तेमाल स्टॉक प्राइस में मैनिपुलेशन के लिए किया गया है। बतौर खरगे, ऐसे आरोप भी लगते रहे हैं। जहां-जहां मोदी जाते हैं, वहां-वहां इस समूह को कांट्रैक्ट मिलते हैं। यह बहुत लंबी लिस्ट है। जिस-जिस जगह मोदी गए हैं, उस-उस जगह, कौन-कौन से कांट्रैक्ट उनको मिले हैं। यह मैं बता सकता हूं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, इसलिए हम चाहते थे कि इस पर डिस्पैशनेटली हाउस में डिस्कशन हो। हमने 267 के तहत जो भी बिजनेस हैं, उसको आप पोस्टपोन करो। सिर्फ इसके ऊपर चर्चा ले लो। इस मामले में देश का नुकसान हो रहा है। डायरेक्टली, दुनिया का भरोसा हम पर से उठ रहा है। ऐसे वक्त में हमें यह चीजें हाउस में लाना जरूरी है। देश को बचाने के लिए हमने यह मुद्दा उठाया था, हाउस को डिस्टर्ब करने के लिए नहीं, लेकिन मोदी कहते हैं हम लोग हाउस को डिस्टर्ब करते हैं, हुड़दंग मचाते हैं। जब वे खुद बांग्लादेश गए तो वहां पर अदाणी को झारखंड इलेक्ट्रिसिटी एक्सपोर्ट, यह प्रोजेक्ट उसको एलोकेशन करने के लिए दे दिए।
खरगे ने कहा, मलेशिया मेगा कंटेनर प्रोजेक्ट, पीएम मोदी मार्च 2017 में वहां गए थे। अप्रैल 2017 में संबंधित समूह को यह कांट्रैक्ट मिल गया। इजराइल ड्रोन मैनुफैक्चरिंग हाइफा पोर्ट अक्वायर्ड, जब पीएम मोदी जुलाई 2017 में इजराइल गए थे तो दिसंबर 2018 में इजराइल ड्रोन मैनुफैक्चरिंग हाइफा पोर्ट अक्वायर्ड, उसी समूह को दे दिया गया। जब वे सिंगापुर गए तो वहां भी उसी समूह को एक फर्म से बड़ा निवेश मिला। यहां पर उनकी दो विजिट हुई। इसी तरह से श्रीलंका कंटेनर टर्मिनल पोर्ट पर 2020 में प्राइम मिनिस्टर ने विजिट की तो 2020 में वह कांट्रैक्ट भी अदाणी ग्रुप को मिल गया। नेपाल में दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को टेकओवर करने का ऑन गोइंग प्रोसेस चल रहा है।
वियतनाम में दो हवाई अड्डों के विकास का प्रोसेस, वहां पीएम जुलाई-अगस्त 2024 में गए थे। अभी यह काम ऑन गोइंग है। उसी के साथ ग्रीस में तीन पोर्ट एक्वायर करने के लिए बात चल रही है। वहां पर अगस्त 2023 में पीएम ने विजिट किया था। खरगे ने कहा, मैं इसलिए आपको बता रहा हूं कि जहां-जहां प्राइम मिनिस्टर गए हैं, वहां-वहां इनको कांट्रैक्ट मिला है। एक कंपनी के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार को प्रमोट करने, रिश्वत के भुगतान को फैसिलिटेट करने के केंद्र सरकार के यह पीएसयू और एसईसीआई की भूमिका को लेकर सवाल है। यह सवाल उनके लिए है और यह जहां जहां मोदी जाते हैं, वहां-वहां इस कंपनी को, इन लोगों को कांट्रैक्ट मिलता है, यह कैसे मिलता है। हमने यही सवाल तो उठाया है। सदन में इसकी डिटेल चर्चा होनी चाहिए। बदकिस्मती है कि इस विषय पर चर्चा करने के लिए हमको सरकार ने कुछ भी नहीं बोला। चेयरमैन साहब ने हमसे कहा, यह मुद्दा उठा नहीं सकते।
ऐसे अर्जेंट मुद्दों को उठाने के लिए ही 267 का नियम है। मणिपुर जैसा मुद्दा भी इसी के तहत आता है। इन्हें उठाने के लिए हमको मौका देना चाहिए। हम यह चाहते हैं कि इस पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी, जेपीसी गठित किया जाए। जेपीसी में सब मालूम हो जाएगा। वहां पर सभी फाइल्स मंगा सकते हैं। जेपीसी में सारे लोग और उसमें उनकी पार्टी के लोग ज्यादा रहते हैं, हमारे लोग रहते हैं, दूसरी पार्टी के लोग रहते हैं। हर एक को रिप्रेजेंटेशन उसमें मिलता है। वो मिलने के बाद दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। ऐसे में हमारी डिमांड है कि जेपीसी गठित करो। सच्चाई बाहर आने दो। रिश्वत मामला, इस पर डिटेल में डिस्कस होना चाहिए। जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बनाकर इस मुद्दे की तह तक पहुंचा जा सकता है। खरगे ने कहा, रिश्वत में इन्होंने कितना रुपया दिया और क्यों। प्राइम मिनिस्टर जो बाहर गए, जाते वक्त इन्हीं को क्यों लेकर गए हैं। इनसे पहले आकर हर चीज इनको कैसे मिल रही है, यही हम बोलना चाहते हैं।