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मालेगांव धमाका: BJP सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जमानती वारंट से जुड़ी कार्रवाई पर रोक; NIA अदालत ने दिया आदेश
Wed, 20 Mar 2024 08:43 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 20 Mar 2024 08:43 PM IST
सार
मालेगांव धमाका मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जमानती वारंट से जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। एनआईए अदालत ने प्रज्ञा को 27 मार्च को अदालत में पेश होकर बयान दर्ज कराने का निर्देश भी दिया।
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प्रज्ञा ठाकुर को कोर्ट में पेश होकर बयान दर्ज कराने का निर्देश
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोट मामले की जांच कर रही है। मुंबई की विशेष अदालत ने इस मामले में आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर को 27 मार्च को कोर्ट में पेश होकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने इसी आदेश में भाजपा सांसद के खिलाफ जारी जमानती वारंट की तामील पर रोक लगा दी है। खबरों के मुताबिक भोपाल लोकसभा सीट से निर्वाचित भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। बीमार भाजपा सांसद का इलाज जारी है। अदालत ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को अभी तक वारंट नहीं दिया गया है, ऐसे में इस पर रोक लगाई जाती है। प्रज्ञा अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराएंगी।
गौरतलब है कि एनआईए की विशेष अदालत ने बार-बार की चेतावनी के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं होने पर प्रज्ञा के खिलाफ 11 मार्च को 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया था। विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने ठाकुर को 20 मार्च को पेश होने और वारंट रद्द करने का निर्देश दिया था। 20 मार्च को भी प्रज्ञा अदालत में पेश होने में विफल रहीं।
मुंबई आने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
बुधवार को सुनवाई के दौरान प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने अर्जी दाखिल की। उन्होंने जमानती वारंट पर रोक लगाने की अपील के साथ न्यायाधीश को सूचित किया कि उनकी मुवक्किल अदालत के समक्ष पेश होने के लिए मुंबई आईं, लेकिन हवाई अड्डे पर उतरने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस पर एनआईए न्यायाधीश ने कहा, 11 मार्च को सांसद के खिलाफ जारी जमानती वारंट अभी तक उन्हें तामील नहीं कराया गया है। ऐसे में जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर तब तक रोक लगाई जाती है जब तक आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को अस्पताल से छुट्टी नहीं मिल जाती।
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अदालत का फरमान- 27 मार्च को अदालत में पेश हों प्रज्ञा
कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) की धारा 313 के प्रावधानों के तहत प्रज्ञा 27 मार्च को अदालत में पेश होकर अपना अंतिम बयान दर्ज कराएं। कानून के इस प्रावधान के तहत कोर्ट को आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति मिलती है।
क्या है वारंट
बता दें कि जमानती वारंट एक ऐसा निर्देश है जिसमें गिरफ्तार व्यक्ति अदालत के समक्ष उपस्थित होता है। उसके साथ पर्याप्त जमानतदार भी होते हैं और जमानत मिल जाती है। अदालत के आदेश के बाद आरोपी को रिहा किया जा सकता है।
प्रज्ञा और छह अन्य आरोपियों पर दर्ज है मामला; 15 साल से अधिक पुराना है मामला
गौरतलब है कि प्रज्ञा ठाकुर और छह अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आतंकवाद विरोधी कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 15 साल से अधिक पुराने इस मामले में एनआईए अदालत फिलहाल सीआरपीसी के तहत आरोपियों के बयान दर्ज कर रही है।
क्या है मामला
29 सितंबर, 2008 को उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर रखे विस्फोटक उपकरण में धमाका हुआ था। मुंबई से लगभग 200 किमी दूर हुए इन धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी। 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे। शुरुआत में महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने जांच की। करीब तीन साल के बाद 2011 में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया।
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गौरतलब है कि एनआईए की विशेष अदालत ने बार-बार की चेतावनी के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं होने पर प्रज्ञा के खिलाफ 11 मार्च को 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया था। विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने ठाकुर को 20 मार्च को पेश होने और वारंट रद्द करने का निर्देश दिया था। 20 मार्च को भी प्रज्ञा अदालत में पेश होने में विफल रहीं।
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मुंबई आने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
बुधवार को सुनवाई के दौरान प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने अर्जी दाखिल की। उन्होंने जमानती वारंट पर रोक लगाने की अपील के साथ न्यायाधीश को सूचित किया कि उनकी मुवक्किल अदालत के समक्ष पेश होने के लिए मुंबई आईं, लेकिन हवाई अड्डे पर उतरने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस पर एनआईए न्यायाधीश ने कहा, 11 मार्च को सांसद के खिलाफ जारी जमानती वारंट अभी तक उन्हें तामील नहीं कराया गया है। ऐसे में जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर तब तक रोक लगाई जाती है जब तक आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को अस्पताल से छुट्टी नहीं मिल जाती।
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अदालत का फरमान- 27 मार्च को अदालत में पेश हों प्रज्ञा
कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) की धारा 313 के प्रावधानों के तहत प्रज्ञा 27 मार्च को अदालत में पेश होकर अपना अंतिम बयान दर्ज कराएं। कानून के इस प्रावधान के तहत कोर्ट को आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति मिलती है।
क्या है वारंट
बता दें कि जमानती वारंट एक ऐसा निर्देश है जिसमें गिरफ्तार व्यक्ति अदालत के समक्ष उपस्थित होता है। उसके साथ पर्याप्त जमानतदार भी होते हैं और जमानत मिल जाती है। अदालत के आदेश के बाद आरोपी को रिहा किया जा सकता है।
प्रज्ञा और छह अन्य आरोपियों पर दर्ज है मामला; 15 साल से अधिक पुराना है मामला
गौरतलब है कि प्रज्ञा ठाकुर और छह अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आतंकवाद विरोधी कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 15 साल से अधिक पुराने इस मामले में एनआईए अदालत फिलहाल सीआरपीसी के तहत आरोपियों के बयान दर्ज कर रही है।
क्या है मामला
29 सितंबर, 2008 को उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर रखे विस्फोटक उपकरण में धमाका हुआ था। मुंबई से लगभग 200 किमी दूर हुए इन धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी। 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे। शुरुआत में महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने जांच की। करीब तीन साल के बाद 2011 में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया।