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मालदीव : हार के बावजूद राष्ट्रपति पद तुरंत नहीं छोड़ेंगे यामीन, भारत के लिए खुला रणनीतिक रास्ता
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Sep 2018 10:58 AM IST
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अब्दुल्ला यामीन
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मालदीव में हुए चुनाव परिणाम की घोषणा कर दी गई है। राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के एकमात्र उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को विजयी घोषित किया जा चुका है। वहां के निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चुनाव हार गए हैं। यामीन भारत विरोधी और चीन के पक्ष में रुझान रखने वाले नेता बताए जाते हैं। इस नये घटनाक्रम को मालदीव में भारत की बड़ी जीत माना जा रहा है। नई दिल्ली अपने राज्य केरल से सटे इस पड़ोसी देश (मालदीव) की हर घटना पर गहराई से निगाह रख रही है।
वहां की अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। ऐसे में विपक्ष के पास उम्मीदवारों का टोटा पड़ गया था। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के मुकाबले में सोलिह खड़े हुए तो सभी चार राजनीतिक दलों के विपक्ष के नेताओं ने इब्राहिम सोलिह को अपना समर्थन दे दिया। इस राजनीतिक कूटनीति पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार को काफी उम्मीदें थी।
रवीश का अनुमान था मालदीव में परिणाम अब्दुल्ला यामीन के विपरीत आने की पूरी संभावना है। चुनाव बाद पर्यवेक्षकों ने भी अब्दुल्ला यामीन द्वारा निष्पक्ष चुनाव न कराने संबंधी आरोप लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद अब्दुल्ला यामीन पिछड़ गए। सोलिह को 58 प्रतिशत से अधिक मत मिले।
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मालदीव के चुनाव में कुछ दिलचस्प पहलू भी है। मालदीव की आबादी साढ़े तीन लाख के करीब है। इसमें से ढाई लाख के करीब मतदाता हैं। बड़ी संख्या में लोग श्रीलंका और मलेशिया में रहते हैं। पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भी श्रीलंका में शरण ले रखी है। इसलिए चुनाव को संपन्न कराने के लिए मालदीव ने श्रीलंका और मालदीव में भी मतदान केंद्र बनाया था।
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वहां की अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। ऐसे में विपक्ष के पास उम्मीदवारों का टोटा पड़ गया था। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के मुकाबले में सोलिह खड़े हुए तो सभी चार राजनीतिक दलों के विपक्ष के नेताओं ने इब्राहिम सोलिह को अपना समर्थन दे दिया। इस राजनीतिक कूटनीति पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार को काफी उम्मीदें थी।
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रवीश का अनुमान था मालदीव में परिणाम अब्दुल्ला यामीन के विपरीत आने की पूरी संभावना है। चुनाव बाद पर्यवेक्षकों ने भी अब्दुल्ला यामीन द्वारा निष्पक्ष चुनाव न कराने संबंधी आरोप लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद अब्दुल्ला यामीन पिछड़ गए। सोलिह को 58 प्रतिशत से अधिक मत मिले।
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मालदीव के चुनाव में कुछ दिलचस्प पहलू भी है। मालदीव की आबादी साढ़े तीन लाख के करीब है। इसमें से ढाई लाख के करीब मतदाता हैं। बड़ी संख्या में लोग श्रीलंका और मलेशिया में रहते हैं। पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भी श्रीलंका में शरण ले रखी है। इसलिए चुनाव को संपन्न कराने के लिए मालदीव ने श्रीलंका और मालदीव में भी मतदान केंद्र बनाया था।
मालदीव में सत्ता हस्तांतरण है चुनौती
maldive china
विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार अगले कुछ समय मालदीव के लिए बहुत संवेदनशील हैं। हालांकि मालदीव की जनता सोलिह के समर्थन में सड़क पर है। सोलिह ने अपना संदेश दिया है, लेकिन मालदीव की सरकार अभी वहां के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चला रहे हैं।
यामीन खुद तख्ता पलटकर सत्ता में आए थे। मालदीव की सेना, पुलिस अभी उनके आदेश पर काम कर रही है। इसलिए मालदीव में सत्ता का हस्तांतरण सबसे बड़ी चुनौती है। सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्वक निबट जाने के बाद धीरे-धीरे मालदीव एक बार फिर पटरी पर आ जाएगा। माना जा रहा है कि जेल में बंद राजनीतिक कैदियों की रिहाई तथा व्यवस्था को मजबूती देने वाले प्रयास तेजी से आगे बढ़ेंगे।
मिलेगी चिंता से मुक्ति
हिंद महासागरीय क्षेत्र में मालदीव समुद्र क्षेत्र में बैठा भारत का रडार माना जाता रहा है। केरल के तटों से मालदीव की दूरी बस ढाई घंटे के हवाई सेवा की ही है। भारत ने मालदीव में बड़े पैमाने में निवेश कर रखा है। भारत के साथ-साथ चीन की कंपनियों ने भी निवेश किया है।
अब्दुल्ला यामीन के समय में चीन का दखल बढ़ा और यह भारत के लिए चिंता की बात थी। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भारत द्वारा मालदीव को दिए गए हेलीकाप्टर आदि को लौटाने का निर्णय ले लिया था। माना जा रहा है कि मालदीव में शांतिपूर्ण तरीके से हस्तातंरण के बाद भारत की भूमिका फिर बढ़ सकती है।
यामीन खुद तख्ता पलटकर सत्ता में आए थे। मालदीव की सेना, पुलिस अभी उनके आदेश पर काम कर रही है। इसलिए मालदीव में सत्ता का हस्तांतरण सबसे बड़ी चुनौती है। सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्वक निबट जाने के बाद धीरे-धीरे मालदीव एक बार फिर पटरी पर आ जाएगा। माना जा रहा है कि जेल में बंद राजनीतिक कैदियों की रिहाई तथा व्यवस्था को मजबूती देने वाले प्रयास तेजी से आगे बढ़ेंगे।
मिलेगी चिंता से मुक्ति
हिंद महासागरीय क्षेत्र में मालदीव समुद्र क्षेत्र में बैठा भारत का रडार माना जाता रहा है। केरल के तटों से मालदीव की दूरी बस ढाई घंटे के हवाई सेवा की ही है। भारत ने मालदीव में बड़े पैमाने में निवेश कर रखा है। भारत के साथ-साथ चीन की कंपनियों ने भी निवेश किया है।
अब्दुल्ला यामीन के समय में चीन का दखल बढ़ा और यह भारत के लिए चिंता की बात थी। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भारत द्वारा मालदीव को दिए गए हेलीकाप्टर आदि को लौटाने का निर्णय ले लिया था। माना जा रहा है कि मालदीव में शांतिपूर्ण तरीके से हस्तातंरण के बाद भारत की भूमिका फिर बढ़ सकती है।