सरकार से पूछिए कि पठानकोट हमले के बाद क्या किया: मेजर जनरल अशोक मेहता
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केन्द्र सरकार से पूछिए कि पठान कोट के हमले के बाद क्या किया? रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटा.) अशोक मेहता ने सरकार से यह सवाल यह पूछा है। मेहता का कहना है कि जहां तक उनकी जानकारी है कि सरकार ने सवा साल पहले देश के अग्रिमएयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले के बाद कुछ नहीं किया है।
मेहता का कहना है कि यही हाल पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता द्वारा अंतरराष्ट्रीयसीमा की सुरक्षा के बाबत सौंपी गई सौंपी गई रिपोर्ट का है। पूर्व मेजर जनरल का कहना है कि जब पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर हमला हुआ था तो उसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कंपोस ने एकरिपोर्ट दी थी।
यह रिपोर्ट सुरक्षा तैयारियों के बाबत थी। लेकिन अभी तक उस पर कोई पहल नहीं हुई है। यही स्थिति मधुकर गुप्ता की रिपोर्ट काहै। सरकार ने अभी तक उस पर क्या कदम उठाए हैं, वहीं जाने। मेजर जनरल का कहना है कि दरअसल सैन्य आधुनिकीकरण और सुरक्षाखामियों को दूर करने के मामले में सरकार कुछ करती ही नहीं।
हमारी आत्मरक्षा और एक्शन में कमियां हैं
जम्मू-कश्मीर सीमा पर हमारी आत्मरक्षा और कार्रवाई करने के तरीके में कुछ कमियां हैं। मेजर जनरल (रिट.) मेहता का कहना है कि हमेंपाकिस्तान की हर हरकत का उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए। वहीं सुरक्षा को लेकर भी कुछ खास किए जाने की जरूरत है। 2003 में सीमापर सेंसर, फेंसिंग आदि का काम हुआ था। अब समय, तकनीक, आतंकियों के प्रशिक्षण आदि के सामने यह कारगर नहीं है।
दूसरे 70 साल सेनियंत्रण रेखा पर लिंक पिट्रोलिंग का तरीका वही है। स्टैडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) में भी बदलाव की जरूरत है। लेकिन इस मामले में कोईखास पहल नहीं हो रही है। आतंकी आते हैं और सैन्य शिविर को भी निशाना बना देते हैं। जब तक सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएगीतबतक सीमा पर पाकिस्तान की हरकतों पर कोई लगाम लगानी मुश्किल है।
सर्जिकल स्ट्राइक राजनीतिक फायदे के लिए !
जनरल मेहता के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक केवल 2-3 किमी भीतर तक जाकर ही संभव है। इससे कुछ नहीं होने वाला है। जबतक कि सरकारपाकिस्तान को उसी की भाषा में ईंट का जवाब ईंट से नहीं देती है। पड़ोसी देश के सुरक्षा बलों को भी उसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती।
हमने दी थी जार्ज को सलाह
जनरल मेहता का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज को सलाह दी थी।उन्हें एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे जिहाद और छद्म युद्ध के विरुद्ध लडऩे वाली फौज का जिक्र था। ताकि पाकिस्तान केजिहाद का उसी भाषा में जवाब दिया जा सके। इसे सेना के ही जवानों, अधिकारियों को छांटकर तैयार किया जाना था। इसके उद्देश्य मेंपाकिस्तान के भीतर तक जाकर वहां तबाही फैलानी की योजना शामिल थी। जनरल मेहता का कहना है कि जार्ज ने इसे काफी गंभीरता से लियाथा, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ।
पाकिस्तानी क्यों काट ले जाते हैं सिर ?
इसका बस एक ही मकसद होता है कि भारत सरकार कश्मीर के मुद्दे परपाकिस्तान से बात करे। मेजर जनरल के अनुसार 2003 से 2007 के बीच इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। क्योंकि तब भारत पाकिस्तान सेकश्मीर पर बातचीत कर रहा था। यूपीए सरकार के समय में 2013 में केवल एक बार इस तरह की बर्बर घटना हुई थी, लेकिन भाजपा सरकार केसमय तीन बार ऐसा हुआ।
मुझे क्या पता सरकार ने रिपोर्ट पर क्या किया?
पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता का कहना है, 'मैंने पाकिस्तान से लगती भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा तैयारियों के बाबत अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। कुछ महीने पहलेगृहमंत्रालय ने भी इस रिपोर्ट पर कुछ कहा था। लेकिन मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है कि सरकार इस रिपोर्ट पर आगे क्या किया। घुसपैठरोकने के लिए रिपोर्ट प कितना सरकार की अमल करने की योजना है। इस बारे में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ही बता सकता है।'