फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Maintain work-life balance says Justice Datta on shortage of judges in Bombay High court and high workload

High Court: 'काम और जीवन का संतुलन बनाकर रखें', बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की कमी पर जस्टिस दत्ता की सलाह

Sun, 06 Jul 2025 02:13 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 06 Jul 2025 02:13 PM IST
सार

न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि वर्तमान समय में 10,000 यूनिट बिजली की अनुमति पर्याप्त नहीं है, क्योंकि करीब 40 साल पहले इसे तय किया गया था, तब एयर कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, वॉशिंग मशीन, डिश वॉशर आदि नहीं थे।

विज्ञापन
Maintain work-life balance says Justice Datta on shortage of judges in Bombay High court and high workload
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में जजों की कमी पर बात की और कहा जजों को सलाह दी कि वे जीवन और काम में संतुलन बनाकर चलें और अपनी सेहत के साथ कोई समझौता न करें। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस दत्ता ने ये बातें कही। इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई को सम्मानित किया गया। 
विज्ञापन


जजों की कमी पर कसा तंज
बॉम्बे उच्च न्यायालय में जजों की कमी पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि 'साल 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की संख्या 75 से 94 तक पहुंच गई थी। 2013 से 2020 के बीच सिर्फ एक बार बॉम्बे उच्च न्यायालय में जजों की संख्या ने 75 का आंकड़ा छुआ, लेकिन उसके बाद यह आंकड़ा कभी नहीं छुआ गया, 94 जजों की तो बात ही छोड़ दीजिए।' बॉम्बे उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने जीवन और काम में संतुलन बनाकर रखने की बात कही और काम के चक्कर में सेहत से समझौता न करने की सलाह दी।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Bihar: 'भाजपा-नीतीश ने बिहार को भारत की क्राइम कैपिटल बना दिया', गोपाल खेमका की हत्या पर सरकार पर बरसे राहुल
विज्ञापन
विज्ञापन


'एक महीने बाद कोई आपको याद नहीं रखेगा'
जस्टिस दत्ता ने कहा 'अपना समय निजी और पेशेवर कामकाज के बीच बांटें। अपने परिवार को समय दें, क्योंकि अगर आपको कुछ हो जाता है, तो लोग आपसे एक महीने तक सहानुभूति रखेंगे, लेकिन एक महीने के बाद कोई भी आपकी सेवा को याद नहीं रखेगा।' उन्होंने जजों को मिलने वाली बिजली यूनिट की सीमा के नियमों में संशोधन का भी आग्रह किया। न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि वर्तमान समय में 10,000 यूनिट बिजली की अनुमति पर्याप्त नहीं है, क्योंकि करीब 40 साल पहले इसे तय किया गया था, तब एयर कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, वॉशिंग मशीन, डिश वॉशर आदि नहीं थे।

उन्होंने सीजेआई गवई से सीमा बढ़ाने के लिए संशोधन लाने का अनुरोध किया। इसी तरह, उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ईंधन के लिए भत्ते को 200 लीटर प्रति माह के बजाय 2,400 लीटर प्रति वर्ष किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन दोनों प्रस्तावों को अतीत में खारिज कर दिया गया था, और उन्होंने सीजेआई से इन पर पुनर्विचार करने की अपील की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed