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राजपथ पर 22 झांकियों में महात्मा गांधी के जीवन को दर्शाया गया, दिल्ली की झांकी रही केंद्र बिंदु

Sat, 26 Jan 2019 06:51 PM IST
Avdhesh Kumar भाषा,नई दिल्ली
भाषा,नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 26 Jan 2019 06:51 PM IST
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Mahatma's life was shown in 22 floats on Rajpath, Delhi's tableau center focussed
महात्मा गांधी की झांकी

देश के 70वें गणतंत्र दिवस के दौरान राजपथ पर निकाली गई 22 झांकियों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की झलक देखने को मिली। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर इस बार राजपथ पर निकाली गई 22 झांकियों में बापू के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया। इनमें राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की 16 झांकियां थी जबकि विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों- कृषि, ऊर्जा, पेयजल और स्वच्छता, भारतीय रेलवे, सीआईएसएफ और सीपीडब्ल्यूडी की छह झांकियां थी।

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उत्तराखंड की झांकी में कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम को दिखाया गया था जहां 1929 में महात्मा गांधी ने कुछ समय बिताया था।
 
जम्मू कश्मीर की झांकी का विषय ‘‘गांधी की आशा की किरण - हमारी समग्र संस्कृति’’ था। झांकी में बापू को उनके चरखे और घाटी की जातीय विविधता के साथ दिखाया गया।
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पश्चिम बंगाल की झांकी में महात्मा गांधी के जीवन के दो चरणों को दिखाया गया- भारत की आजादी के दौरान उनका प्रवास और रवींद्रनाथ टैगोर के साथ जुड़ाव।
 
गुजरात की झांकी में बापू की ‘‘ऐतिहासिक दांडी मार्च’’ की झलक दिखी। इसी तरह कर्नाटक की झांकी में ‘‘गांधीजी और बेलगावी में कांग्रेस के सम्मेलन’’ की झलक देखने को मिली। महाराष्ट्र की झांकी में ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’’ की झलक थी।
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गोवा की झांकी का विषय ‘‘अनेकता में एकता’’ था जबकि त्रिपुरा की झांकी का विषय, ‘गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण’’ था।
 
पंजाब की झांकी में ‘‘जलियांवाला बाग’’ को दिखाया गया जबकि सिक्किम की झांकी का विषय ‘‘कृषि और पर्यावरण अहिंसा’’ था।
 
राज्यों के साथ ऊर्जा मंत्रालय, रेल मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और अन्य विभागों की झांकी में भी बापू के जीवन की झलक देखने को मिली।
 
 दिल्ली की झांकी में महात्मा गांधी के 1915 से 1948 के बीच बिड़ला हाउस में बिताए 720 दिनों की झलक दिखाई गई। झांकी में बापू के दिल्ली में बिताए गए दिनों की झलक दिखाई गई।। पहली बार बापू यहां 1915 में आए थे।  झांकी में गांधी स्मृति को दिखाया गया, जिसे पहले बिड़ला हाउस के नाम से जाना जाता था। राष्ट्रपिता ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन भी यहीं बिताए थे।
 
झांकी में सबसे आगे गांधी की एक प्रतिमा नजर आ रही थी जिसके पीछे चरखा बना था। वहीं झांकी के बीच के हिस्से में गांधी बिड़ला हाउस के लॉन में प्रार्थना सभा कराते नजर आए। बापू के समर्थकों को बिड़ला हाउस के अंदर से प्रार्थना स्थल की ओर आता भी दिखाया गया। झांकी के पीछे के हिस्से में बिड़ला हाउस की शांत सफेद एवं सुंदर खिड़कियां दिखाई गईं।

 
राजपथ पर दिल्ली की झांकी एक साल बाद नजर आई। 2013 में दिल्ली की झांकी में दिल्ली की विविध संस्कृति तथा विभिन्न पृष्ठभूमि और निवासियों को दिखाया गया था। इसके बाद तीन साल तक राजपथ से दिल्ली की झांकी नदारद रही । फिर 2017 में इसने ‘मॉडल सरकारी स्कूल’ थीम के साथ वापसी की। दिल्ली सरकार द्वारा पिछले साल केन्द्र को अपना प्रस्ताव भेजने में देरी के कारण दिल्ली की झांकी परेड में शामिल नहीं हो पाई थी।

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