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इस बदलाव के बिना गांधी जी का सपना रह जाएगा अधूरा, एक बड़ा वर्ग इस सुविधा से है वंचित 

Wed, 02 Oct 2019 09:12 PM IST
आसिम खान अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 02 Oct 2019 09:12 PM IST
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Mahatma Gandhiji dream will not complete without toilets for disabled people
स्वच्छ भारत अभियान - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अवसर पर कहा था कि महात्मा गांधी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो जाए। इसके लिए सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया और इसके तहत पूरे देश में करोड़ों शौचालय बनवाए। अब तक कई गांव, जिले और राज्य खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। लेकिन सरकार के द्वारा व्यक्तिगत परिवारों को दिए जा रहे शौचालयों में सुगम्यता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। 

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विशेषज्ञों के मुताबिक सहायता के रूप में दिए जा रहे शौचालयों के डिजाइन दिव्यांग जनों के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं हैं। इसकी वजह से देश की एक बड़ी आबादी, जो कि दिव्यांग है, इन शौचालयों का उपयोग नहीं कर सकती। (हालांकि, सार्वजनिक जगहों पर बनने वाले शौचालयों में दिव्यांग लोगों के लिए विशेष टॉयलेट्स बनवाए जाते हैं।)
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कैसा होना चाहिए डिजाइन
दिव्यांग लोगों के लिए विशेष टॉयलेट्स बनवाने के क्षेत्र में काम कर रही एक संस्था स्वयं के शीर्ष अधिकारी सुभाष वशिष्ठ ने अमर उजाला को बताया कि सबको शौचालय उपलब्ध करवाने के लक्ष्य में दिव्यांग आबादी भी आनी चाहिए। इसके लिए सरकार को शौचालय की डिजाइन में बदलाव करना चाहिए जिससे यह सबके लिए सुगम्य हो सके। सबके उपयोग के लिए बनने वाले शौचालय के कमरे का साइज 2200 X 2000 मिमी से कम नहीं होना चाहिए। कमोड की सीट जमीन से 480 मिमी ऊपर होना चाहिए जिसके साथ में पकड़ने के लिए हैंडल भी बनवाया जाना चाहिए।
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विशेष परिस्थिति में सहायता के लिए हाथ से पहुंचने की दूरी पर एक अलार्म की बनावट के लिए जगह भी होनी चाहिए। दरवाजे पर आने-जाने में सुगम्यता के साथ-साथ फर्श फिसलन से मुक्त होनी चाहिए। विशेषज्ञ के मुताबिक सुगम्य टॉयलेट बनाने की कीमत सामान्य टॉयलेट से बहुत अधिक नहीं है। लेकिन इसके बनाने की विधि अवश्य अलग है। इसके लिए इसे बनाने वाले कारीगरों को भी ट्रेंड किया जाना चाहिए।

हर परिवार के लिए जरूरत
विशेषज्ञ के मुताबिक, सामान्य रूप से हमारी समझ यह होती है कि जिस परिवार में कोई दिव्यांग व्यक्ति है, उसी घर में विशेष टॉयलेट की आवश्यकता होती है। लेकिन सच यह है कि वृद्ध व्यक्ति, बीमार या घर की गर्भवती महिलाओं को भी सामान्य भारतीय डिजाइन का टॉयलेट उपयोग करने में दिक्कत आती है। बुजुर्गों के घुटने में समस्या होने की स्थिति में उनके लिए टॉयलेट इस्तेमाल करना चुनौती बन जाती है। यही कारण है कि टॉयलेट जैसी चीज सुगम्य तकनीकी से बनाया जाना चाहिए जिसे सब इस्तेमाल कर सकें।


भारत की कितनी आबादी है दिव्यांग
वर्ष 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक भारत की लगभग 2.21 फीसदी आबादी या लगभग 2.68 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार से दिव्यांग हैं। दिव्यांग आबादी में 56 फीसदी या 1.5 करोड़ पुरुष हैं, जबकि 44 फीसदी या 1.18 करोड़ महिलाएं हैं। वर्ष 2001 में हुई जनगणना में दिव्यांग लोगों की जनसंख्या 2.19 करोड़ थी। अगर इस जनसंख्या में बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को भी जोड़ लिया जाए तो एक बड़ी आबादी को विशेष टॉयलेट्स की जरूरत होती है।

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