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Maharashtra: इस गांव ने पेश की मिसाल, अपशब्दों के इस्तेमाल पर जुर्माना! मिल चुका है सम्मान

Fri, 29 Nov 2024 01:41 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 29 Nov 2024 01:41 PM IST
सार

ग्राम पंचायत ने विधवा महिलाओं से जुड़े प्रतिगामी रीति-रिवाजों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। ग्राम प्रधान ने कहा कि हम विधवाओं को सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों में शामिल करते हैं। साथ ही पति की मौत के बाद विधवा महिलाओं के सिंदूर पोंछने, मंगलसूत्र उतारने और चूड़ियां तोड़ने जैसी प्रथाओं पर भी रोक है। 

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Maharashtra village ban use of profanities impose fine for women dignity
ग्राम पंचायत (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

महाराष्ट्र के एक गांव ने मिसाल पेश करते हुए अपशब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत ने फैसला किया है कि अगर कोई व्यक्ति अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उस पर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले की नेवासा तहसील के सौंदाला गांव ने यह शानदार पहल की है। गांव के सरपंच शरद अरगड़े ने बताया कि महिला सम्मान और उनकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। 
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अपशब्दों पर प्रतिबंध लगाने की बताई वजह
ग्राम प्रधान ने कहा कि 'जो लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि माताओं-बहनों के नाम पर वे जो कहते हैं, वह खुद उनके परिवार की महिलाओं पर भी लागू होता है। इसलिए हमने अपशब्दों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है और अपशब्दों का इस्तेमाल करने वालों पर 500 रुपये जुर्माना लगाने का फैसला किया है।' शरद अरगड़े ने कहा कि यह फैसला समाज में महिलाओं की गरिमा और उन्हें सम्मान देने का प्रयास है। सौंदाला गांव देश की वित्तीय राजधानी मुंबई से करीब 300 किलोमीटर दूर है और गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य तौर पर गन्ने की खेती पर निर्भर है। 
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विधवाओं को भी सम्मान से जीने का दिया अधिकार
गौरतलब है कि सौंदाला गांव की पंचायत पहले भी ऐसे क्रांतिकारी कदम उठा चुकी है। दरअसल सौंदाला ग्राम पंचायत ने विधवा महिलाओं से जुड़े प्रतिगामी रीति-रिवाजों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। ग्राम प्रधान ने कहा कि हम विधवाओं को सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों में शामिल करते हैं। साथ ही पति की मौत के बाद विधवा महिलाओं के सिंदूर पोंछने, मंगलसूत्र उतारने और चूड़ियां तोड़ने जैसी प्रथाओं पर भी रोक है।  1800 की आबादी वाले सौंदाला गांव को साल 2007 में विवाद मुक्त गांव घोषित करते हुए राज्य सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया था। 
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