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Maharashtra: शिवसेना के दोनों गुटों को मिला नया नाम, उद्धव के हाथ में मशाल, शिंदे क्यों रहे खाली हाथ?

Mon, 10 Oct 2022 09:15 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Mon, 10 Oct 2022 09:15 PM IST
सार

आइये जानते हैं उद्धव गुट को मशाल चुनाव चिह्न क्यों मिला? शिंदे गुट को कौन सा चुनाव चिह्न मिल सकता है? इससे पहले कब चुनाव आयोग ने किसी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न को लेकर इस तरह का फैसला लिया?

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Maharashtra: Uddhav Thackeray's Shiv Sena gets new election symbol, party name; why Shinde remained empty hand
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में होने वाले आगामी उप-चुनाव के लिए शिवसेना उद्धव गुट को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है। उद्धव गुट को चुनाव चिह्न के साथ पार्टी का नया नाम भी आवंटित किया गया है। उद्धव गुट की शिवसेना का नया नाम शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे मिला है। वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना को भी नया मिल गया है। इस गुट वाली पार्टी को चुनाव आयोग ने बालासाहेबची शिवसेना नाम आवंटित किया है। 
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आइये जानते हैं चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को ये नाम और निशान क्यों दिया? उद्धव गुट को मशाल चुनाव चिह्न क्यों मिला? शिंदे गुट को कौन सा चुनाव चिह्न मिल सकता है? इससे पहले कब चुनाव आयोग ने किसी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न को लेकर इस तरह का फैसला लिया?
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Uddhav Vs Shinde over Shiv Sena: SC tells EC to decide - Rediff.com India  News
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चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को ये नाम और निशान क्यों दिया?

दरअसल, तीन नवंबर को महाराष्ट्र के अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। इस सीट से अब तक शिवसेना के रमेश लटके विधायक थे। रमेश अपने परिवार के साथ दुबई गए थे, जहां दिल का दौरा पड़ने के कारण 12 मई को उनका निधन हो गया। 


चुनाव आयोग ने तीन नवंबर को यहां उपचुनाव कराने का फैसला लिया है। इसके लिए शिंदे गुट और भाजपा ने मिलकर यहां से पूर्व पार्षद मुरजी पटेल को अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया है। पटेल के सामने उद्धव गुट का उम्मीदवार भी होगा। उद्धव गुट को कांग्रेस, एनसीपी का भी समर्थन मिला है। उद्धव ठाकरे के हटने और शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के बाद ये पहला चुनाव है। ऐसे में दोनों गुटों के लिए ये चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। 

इस चुनाव में दोनों गुट आमने सामने होंगे। इसे लेकर दोनों गुटों ने शिवसेना के नाम और चुनाव निशान पर अपना दावा चुनाव आयोग में पेश किया था। इसी को देखते हुए चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न दोनों फ्रीज करके दोनों गुटों से तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न मांगे थे। 

उद्धव गुट को मशाल चुनाव चिह्न क्यों मिला? 

Maharashtra: Uddhav Thackeray's Shiv Sena gets new election symbol, party name; why Shinde remained empty hand
उद्धव ठाकरे - फोटो : ANI
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से कहा कि वे उपचुनावों के लिए अधिसूचित फ्री सिंबल की लिस्ट से अलग-अलग चुनाव चिह्न चुनें और दस तारीख तक बता दें। इसके बाद उद्धव गुट ने त्रिशूल, उगता सूरज और मशाल चुनाव चिह्न विकल्प के रूप में दिए थे। इनमें से उद्धव गुट को मशाल चुनाव चिह्न मिल गया। उद्धव गुट को 'त्रिशूल' का चिह्न इसलिए नहीं मिला क्योंकि इसका धार्मिक संकेत है। 'उगता सूरज' इसलिए नहीं मिला क्योंकि यह तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रमुक के पास है। 'मशाल' चुनाव चिह्न 2004 तक समता पार्टी के पास था। उसके बाद से यह किसी को आवंटित नहीं था, इसलिए यह चिह्न उद्धव गुट को दिया गया है।

शिंदे गुट का चुनाव निशान का क्या?

Maharashtra: Uddhav Thackeray's Shiv Sena gets new election symbol, party name; why Shinde remained empty hand
एकनाथ शिंदे - फोटो : ANI
शिंदे गुट ने गदा, उगता सूरज और त्रिशूल में से कोई एक चिह्न मांगा था। गदा और त्रिशूल के धार्मिक संकेत होने के चलते दोनों चुनाव निशान शिंदे गुट को नहीं मिले। वहीं, उगता सूरज द्रमुक का चुनाव निशान होने के कारण नहीं मिला। शिंदे गुट को 11 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए चुनाव चिह्न बताने होंगे। उसी आधार पर आगे फैसला होगा। 

दोनों गुटों के नाम का क्या?

दोनों गुट  ने अपने पहले वैकल्पिक नाम के तौर पर शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) नाम दिया था। इस वजह से यह नाम दोनों ही गुटों को यह नाम नहीं मिला। इसके साथ ही उद्धव गुट के विकल्प में पार्टी के नाम के रूप में दूसरा विकल्प शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नाम था। इसे उद्धव गुट को आवंटित कर दिया गया। इसी तरह शिंदे गुट के विकल्प में दूसरा विकल्प बालासाहेबची शिवसेना नाम शिंदे गुट को आवंटित कर दिया गया। 

दोनों गुटों का पहला वैकल्पिक चुनाव निशान त्रिशूल, किसी को नहीं मिला

Maharashtra: Uddhav Thackeray's Shiv Sena gets new election symbol, party name; why Shinde remained empty hand
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे - फोटो : सोशल मीडिया
दोनों गुटों ने चुनाव निशान के तौर पर पहला विकल्प त्रिशूल को दिया था। चुनाव आयोग ने इसे तीन कारण बताकर निरस्त कर दिया। पहला कारण यह की ये धार्मिक संकेत है। जो 1968 के चुनाव चिह्न आवंटन आदेश के मुताबिक किसी भी पार्टी को आवंटित नहीं किया जा सकता। 

दोनों गुटों ने वैकल्पिक चुनाव चिह्न के रूप में पहला विकल्प त्रिशूल को ही दिया था। इसलिए चुनाव आयोग ने इस चुनाव चिह्न को नहीं आवंटित करने का दूसरा कारण बताया। वहीं, तीसरे कारण के रूप में चुनाव आयोग ने कहा कि यह चुनाव चिह्न चुनाव आयोग की फ्री सिंबल लिस्ट का हिस्सा नहीं है। इसी तरह उगता सूरज दोनों गुटों का दूसरा वैकल्पिक चुनाव चिह्न होने के कारण दोनों ही गुटों को आवंटित नहीं किया गया। 

इससे पहले कब चुनाव आयोग ने किसी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न को लेकर इस तरह का फैसला लिया?

What really went wrong between Uddhav Thackeray and Eknath Shinde? | Mumbai  news - Hindustan Times

इससे पहले जून 2021 में लोजपा के चुनाव निशान को चुनाव आयोग फ्रीज कर चुका है। तब, चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस के बीच पार्टी पर कब्जे को लेकर जंग हुई थी। पशुपति ने पार्टी के छह में से पांच सांसदों को अपने साथ मिलाकर चिराग से संसदीय दल के पद और पार्टी की कमान दोनों ही छीन ली। पशुपति पारस अब केंद्र में मंत्री हैं। लोजपा का नाम पशुपति पारस गुट को मिला। वहीं, चिराग अब लोजपा (रामविलास) के नेता हैं। वहीं, पार्टी का चुनाव निशान बंगला चुनाव आयोग ने फ्रीज कर दिया।
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