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महाराष्ट्र: पांच साल पुराने मामले में दो पुलिसकर्मियों पर FIR, वांछित आरोपी की फर्जी मुठभेड़ में हत्या का आरोप

Thu, 10 Aug 2023 02:53 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, पालघर।
पीटीआई, पालघर। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 10 Aug 2023 02:53 PM IST
सार

अदालत ने जोगिंदर राणा के भाई सुरेंद्र राणा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। याचिका में दावा किया गया था कि कथित फर्जी मुठभेड़ पुलिस नायक मनोज सकपाल और हेड पुलिस कांस्टेबल मंगेश चव्हाण ने की थी।

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Maharashtra: Two cops booked on charge of murder in 2018 fake encounter of wanted accused in theft cases
महाराष्ट्र पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Twitter

विस्तार

चोरी के कई मामलों में वांछित आरोपी जोगिंदर राणा की 2018 में कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या, सबूत गायब करने और आपराधिक साजिश के आरोप में दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ पालघर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के दो हफ्ते बाद बुधवार को मामला दर्ज किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि घटना की जांच के लिए ठाणे पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि चार सप्ताह के भीतर अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी जाए।

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अदालत ने जोगिंदर राणा के भाई सुरेंद्र राणा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। याचिका में दावा किया गया था कि कथित फर्जी मुठभेड़ पुलिस नायक मनोज सकपाल और हेड पुलिस कांस्टेबल मंगेश चव्हाण ने की थी, जो महाराष्ट्र के पालघर जिले के नालासोपारा में स्थानीय अपराध शाखा से जुड़े थे। पहले की सुनवाई के दौरान, पालघर के पुलिस अधीक्षक ने एक हलफनामा दायर कर दावा किया गया था कि जोगिंदर राणा ने ही सबसे पहले पुलिस पर हमला किया था।
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हलफनामे के अनुसार, 23 जुलाई, 2018 को चव्हाण और सकपाल पुलिस स्टेशन आ रहे थे, इस दौरान उन्होंने जोगिंदर को देखा। जब दोनों ने जोगिंदर को रोका तो उसने चाकू निकाल लिया और उन पर हमला करना शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई में चव्हाण ने जोगिंदर पर दो गोलियां चलाईं। जिसके बाद अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने कहा कि चव्हाण और सकपाल को इलाज के लिए नालासोपारा इलाके के तुलिंज के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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सुरेंद्र राणा के वकील दत्ता माने ने हाईकोर्ट को बताया था कि घटना के दौरान और बाद में सार्वजनिक और चश्मदीद गवाहों ने तस्वीरें खींची थीं और वीडियो क्लिप रिकॉर्ड की थीं, जिससे संकेत मिलता है कि पुलिस ने मृतक का "फर्जी" एनकाउंटर किया था। माने ने कहा कि सुरेंद्र राणा ने एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक और पालघर के पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कई अभ्यावेदन दिए थे।


अधिकारियों ने कहा, अदालत के आदेश के बाद तुलिंज पुलिस ने बुधवार को दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक साजिश), 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना), 386 (किसी भी व्यक्ति को मौत के भय में डालकर जबरन वसूली) और 34 (सामान्य इरादा) और शस्त्र अधिनियम के प्रावधान के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

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