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जूते के सोल में छिपाया महाराष्ट्र टीईटी का पेपर: ₹8 हजार में हुआ सौदा, आगरा प्रेस से ऐसे निकला प्रश्नपत्र
Sat, 19 Sep 2026 07:09 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2026 07:09 AM IST
सार
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस ने 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 18 आरोपियों को शामिल किया गया है और दो अब भी फरार हैं। पुलिस के अनुसार, आगरा की प्रिंटिंग प्रेस के दो कर्मचारियों ने आठ हजार रुपये के बदले प्रश्नपत्र जूते के इनसोल में छिपाकर बाहर निकाला। जांच में पेपर की बिहार तक पहुंच और रकम के लेनदेन की कड़ी सामने आई है।
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महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में ठाणे पुलिस ने 3500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है जिसमें आगरा के प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों की करतूत का जिक्र हैं। आरोप पत्र में कहा गया है कि आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से बेहद शातिर तरीके से परीक्षा प्रश्न पत्र बाहर निकाला गया। प्रेस में काम करने वाले दो कर्मचारियों ने महज आठ हजार रुपये के लिए जूते के इनसोल में प्रश्नपत्र छिपाया और उसे बाहर ले गए।
चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों को शामिल किया गया है जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने कोचिंग क्लास के पूर्व शिक्षक बिजेन्द्र गुप्ता को मुख्य आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक जांच में प्रश्नपत्र को प्रिटिंग प्रेस से बाहर निकालने के बाद उसे आगे पहुंचाने के साथ ही रकम की लेनदेन की कड़ी भी सामने आई है। चार्जशीट के अनुसार टीईटी का प्रश्नपत्र आगरा स्थित माहिम पैट्रन प्रा. लि. कंपनी में छापा जा रहा था। आरोप है कि प्रेस में मौजूद दो कर्मचारियों में से एक ने प्रश्नपत्र के सेट को अपने जूते की इनसोल में नीचे छुपाया और प्रेस से बाहर निकल गए।
कोचिंग क्लास के पूर्व शिक्षक ने दिए थे पैसे
पुलिस का दावा है कि इन कर्मचारियों को प्रश्नपत्र का सेट देने के बदले में बिजेन्द्र गुप्ता ने 8 हजार रुपए में दिए थे। जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग तब मिला जब लीक हुआ प्रश्नपत्र बिहार में गुप्ता के एक रिश्तेदार के घर से बरामद किया गया। पुलिस ने बिजेन्द्र गुप्ता के रिश्तेदार को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा आरोपियों के बीच आर्थिक लेनदेन को भी पुलिस ने अहम साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।
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पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य
डीसीपी पवन बनसोड ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है। आगे की जांच के आधार पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बता दें कि महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 28 जून को आयोजित की गई थी लेकिन परीक्षा के दो दिन पहले ही पेपर लीक का मामला सामने आ गया।
डिस्पोज बॉक्स में फेंके गए पेपर छिपाकर ले गए थे कर्मी
आगरा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आगरा प्रेस के कर्मचारी खराब प्रिंटिंग वाले पन्नों को डिस्पोज बाॅक्स में संभालकर रखते हैं। इसमें से ही पेपर निकालकर आरोपी कर्मचारियों ने अपने जूतों के सोल में छिपा लिया। बाहर ले जाकर बिहार के आरोपियों को आठ हजार रुपये में बेच दिया था। मुंबई पुलिस ने सोंठ की मंडी स्थित प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी नरेश कुमार, बाबूलाल कुशवाह के अलावा पूर्व कर्मचारी संजय शर्मा को गिरफ्तार किया था। कर्मचारियों ने लीक पेपर बिहार में सोनू सिंह को दिया था। सोनू ने पेपर को मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता को बेच दिया था।
12 से 15 हजार के वेतन पर काम करते थे आरोपी
आरोपी कर्मचारियों को प्रेस में 12 से 15 हजार रुपये महीना वेतन मिलता था। कर्मचारियों की अलग-अलग जिम्मेदारी होती है। छपाई के दाैरान खराब होने वाले पन्नों को नष्ट कर दिया जाता है। इसका कोई हिसाब नहीं रखा जाता। इसी का फायदा आरोपी कर्मचारियों ने उठाया। महाराष्ट्र पेपर लीक की जांच के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है कि आरोपी टीईटी के बाद स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट परीक्षा का पेपर लीक करने वाले थे। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए यह परीक्षा 27 सितंबर 2026 को होनी है।
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चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों को शामिल किया गया है जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने कोचिंग क्लास के पूर्व शिक्षक बिजेन्द्र गुप्ता को मुख्य आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक जांच में प्रश्नपत्र को प्रिटिंग प्रेस से बाहर निकालने के बाद उसे आगे पहुंचाने के साथ ही रकम की लेनदेन की कड़ी भी सामने आई है। चार्जशीट के अनुसार टीईटी का प्रश्नपत्र आगरा स्थित माहिम पैट्रन प्रा. लि. कंपनी में छापा जा रहा था। आरोप है कि प्रेस में मौजूद दो कर्मचारियों में से एक ने प्रश्नपत्र के सेट को अपने जूते की इनसोल में नीचे छुपाया और प्रेस से बाहर निकल गए।
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कोचिंग क्लास के पूर्व शिक्षक ने दिए थे पैसे
पुलिस का दावा है कि इन कर्मचारियों को प्रश्नपत्र का सेट देने के बदले में बिजेन्द्र गुप्ता ने 8 हजार रुपए में दिए थे। जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग तब मिला जब लीक हुआ प्रश्नपत्र बिहार में गुप्ता के एक रिश्तेदार के घर से बरामद किया गया। पुलिस ने बिजेन्द्र गुप्ता के रिश्तेदार को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा आरोपियों के बीच आर्थिक लेनदेन को भी पुलिस ने अहम साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।
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पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य
डीसीपी पवन बनसोड ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है। आगे की जांच के आधार पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बता दें कि महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 28 जून को आयोजित की गई थी लेकिन परीक्षा के दो दिन पहले ही पेपर लीक का मामला सामने आ गया।
डिस्पोज बॉक्स में फेंके गए पेपर छिपाकर ले गए थे कर्मी
आगरा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आगरा प्रेस के कर्मचारी खराब प्रिंटिंग वाले पन्नों को डिस्पोज बाॅक्स में संभालकर रखते हैं। इसमें से ही पेपर निकालकर आरोपी कर्मचारियों ने अपने जूतों के सोल में छिपा लिया। बाहर ले जाकर बिहार के आरोपियों को आठ हजार रुपये में बेच दिया था। मुंबई पुलिस ने सोंठ की मंडी स्थित प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी नरेश कुमार, बाबूलाल कुशवाह के अलावा पूर्व कर्मचारी संजय शर्मा को गिरफ्तार किया था। कर्मचारियों ने लीक पेपर बिहार में सोनू सिंह को दिया था। सोनू ने पेपर को मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता को बेच दिया था।
12 से 15 हजार के वेतन पर काम करते थे आरोपी
आरोपी कर्मचारियों को प्रेस में 12 से 15 हजार रुपये महीना वेतन मिलता था। कर्मचारियों की अलग-अलग जिम्मेदारी होती है। छपाई के दाैरान खराब होने वाले पन्नों को नष्ट कर दिया जाता है। इसका कोई हिसाब नहीं रखा जाता। इसी का फायदा आरोपी कर्मचारियों ने उठाया। महाराष्ट्र पेपर लीक की जांच के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है कि आरोपी टीईटी के बाद स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट परीक्षा का पेपर लीक करने वाले थे। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए यह परीक्षा 27 सितंबर 2026 को होनी है।