राज्यसभा चुनाव: पवार के छह दशक की सियासी यात्रा पर नहीं लगेगा विराम, कांग्रेस का समर्थन; MVA में बढ़ी एकजुटता
करीब छह दशक से सक्रिय राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे शरद पवार की संसदीय पारी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस के समर्थन से महाविकास अघाड़ी में एकजुटता बढ़ी है, जिससे महाराष्ट्र की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
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एनसीपी (एसपी) के मुखिया शरद पवार की छह दशक की संसदीय और सियासी यात्रा जारी रहने के अनुमान हैं। राज्यसभा में उनकी उम्मीदवारी के सवाल पर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में सहमति बनती दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला किया है, जबकि अब तक अपना उम्मीदवार खड़ा करने की बात करनी वाली शिवसेना (यूबीटी) में भी पवार का नाम सामने आने के बाद नए सिरे से मंथन का दौर शुरू हुआ है। गौरतलब है कि राज्य में राज्यसभा की सात सीटों में से विपक्षी एमवीए को पूर्ण एकजुटता की शर्त पूरी करने के बाद ही इकलौती सीट हासिल होगी।
गौरतलब है कि डिप्टी सीएम अजीत पवार की असामयिक मृत्यु के बाद एनपीसी के दोनों धड़ों में विलय पर ग्रहण लगने के साथ ही सवाल उठ रहा था कि क्या यह पवार की संसदीय राजनीति के अंत का संकेत है? दरअसल 1967 में बारामती से पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से 85 वर्षीय पवार बीते करीब 60 साल से किसी न किसी सदन के सदस्य रहे हैं। इस दौरान उन्होंने तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और कई बार केंद्र सरकार में मंत्री पद का उत्तरदायित्व संभाला है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पवार की इच्छा के बाद सारे सवाल गौण हो गए। कांग्रेस नेतृत्व उनकी उम्मीदवारी के समर्थन का पक्षधर है। चूंकि कांग्रेस, एनसीपी (शरद) के समर्थन के बिना शिवसेना (यूबीटी) का उम्मीदवार भी नहीं जीत सकता। ऐसे में उद्धव ठाकरे को पवार की उम्मीदवारी का समर्थन करना ही होगा। उक्त सूत्र ने बताया कि बातचीत के दौरान शिवसेना (यूबीटी) ने भी पवार की उम्मीदवारी के सवाल पर अपने कदम पीछे खींचने के संकेत दिए हैं। ऐसे में उम्मीद है कि एमवीए जल्द ही पवार को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा करेगी।
यह है गणित
राज्यसभा चुनाव में महाराष्ट्र की सात सीटों पर चुनाव होने हैं। संख्याबल की दृष्टि से इनमें से छह सीटें राजग को मिलनी तय है। विपक्ष एक सीट तभी हासिल कर सकता है जब एमवीएम में शामिल शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करे। एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए और विधानसभा में एमवीए के पास 46 वोटों का संख्या बल है।
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