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महाराष्ट्रः बीएमसी में 43 करोड़ का ऑक्सीजन पाइपलाइन घोटाला, काली सूची में शामिल कंपनी को दिया ठेका

Wed, 14 Oct 2020 08:24 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 14 Oct 2020 08:24 PM IST
सार

बीएमसी में नियम है कि यदि कोई कंपनी देश में कहीं भी ब्लैकलिस्टेड है, तो वह टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकती। जबकि यह कंपनी पीजीआई चंडीगढ़ में ब्लैकलिस्टेड है...

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Maharashtra: Rs 43 crore oxygen pipeline scam in BMC, contract awarded to blacklisted company
bmc - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

एशिया की वैभवशाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 43 करोड़ के ऑक्सीजन पाइपलाइन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यह घोटाला हिंदुहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ट्रामा सेंटर जोगेश्वरी व कूपर हास्पिटल में हुआ है। भाजपा पार्षद व बीएमसी में पार्टी दल के नेता विनोद मिश्र ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है। 

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ऑक्सीजन पाइपलाइन का घोटाला पर तब चर्चा शुरू हुई थी जब मई में कोरोना संकट के बीच ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन की सप्लाई में कमीं के कारण 12 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो गई थी। इसकी जांच के लिए बीएमसी ने एक कमेटी गठित की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
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विनोद मिश्र ने आरोप लगाया है कि ब्लैकलिस्टेड मैसर्स एमडीडी मेडिकल सिस्टम कंपनी की लापरवाही के कारण 12 मरीजों की मौत हुई। उन्होंने इस मामले की बीएमसी आयुक्त आईएस चहल से शिकायत की है। उन्होंने आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि ऑक्सीजन पाइपलाइन सप्लाई करने का ठेका जिस कंपनी को दिया गया है वह कालीसूची में है। इधर, मामले की जांच के बीच बीएमसी ने नए सिरे से ऑक्सीजन के लिए टेंडर आमंत्रित कर लिया है। भाजपा पार्षद की मांग है कि मामले की जांच होने तक टेंडर को रद्द किया जाए।

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पीजीआई चंडीगढ़ में ब्लैकलिस्टेड है कंपनी

बीएमसी में भाजपा दल के नेता मिश्र ने कहा, बीएमसी में नियम है कि यदि कोई कंपनी देश में कहीं भी ब्लैकलिस्टेड है, तो वह टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकती। जबकि यह कंपनी पीजीआई चंडीगढ़ में ब्लैकलिस्टेड है। इसलिए इस कंपनी को बीएमसी के किसी टेंडर में हिस्सा लेने से रोका जाना चाहिए। उनकी मांग है कि बीएमसी इस पूरी निविदा प्रक्रिया की समीक्षा करे और जोगेश्वरी ट्रामा सेंटर में हुई मौत की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर कार्रवाई हो।

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