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Maharashtra Political Crisis: बागी MLA का बड़ा आरोप- राकांपा विधायकों को मिले 800 करोड़, पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा

Sat, 25 Jun 2022 05:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 25 Jun 2022 05:05 PM IST
सार

कोरेगांव सीट से विधायक महेश शिंदे अभी एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी में हैं जो 21 जून से ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व कर रहे हैं, उनकी मुख्य मांग है कि पार्टी महा विकास अघाड़ी से हट जाए, जिसमें राकांपा और कांग्रेस भी शामिल हैं। 

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Maharashtra political crisis NCP stabbed Sena in the back discussions with CM on this were in vain says rebel MLA mahesh shinde
राकांपा ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा, पवार ने धन आवंटन में शिवसेना विधायकों से किया भेदभाव - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

महाराष्ट्र के सतारा जिले से शिवसेना के बागी विधायक महेश शिंदे ने शनिवार को कहा कि सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी के तीन घटकों में से एक राकांपा ने उनकी पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा था और उन्होंने व अन्य लोगों ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ उठाया लेकिन सफलता नहीं मिली। 
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कोरेगांव सीट से विधायक महेश शिंदे अभी एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी में हैं जो 21 जून से ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व कर रहे हैं, उनकी मुख्य मांग है कि पार्टी महा विकास अघाड़ी से हट जाए, जिसमें राकांपा और कांग्रेस भी शामिल हैं। 
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महेश शिंदे ने एक रिकॉर्डेड संदेश में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार पर विकास निधि आवंटन में शिवसेना विधायकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "कुछ अधिकारियों की मौजूदगी में वर्षा बंगले में मुख्यमंत्री साहब के साथ बैठक के दौरान हमने अपने निर्वाचन क्षेत्र में आवंटित धन का विवरण मांगा। अधिकारियों ने फंड के बारे में गलत नंबर दिए। जब हमने उन्हें असली आंकड़ों के बारे में बताया तो मुख्यमंत्री हैरान रह गए।"
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शिंदे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राकांपा नेताओं ने पार्टी को धोखा दिया है। लेकिन इसके बावजूद कोई बदलाव नहीं देखा गया। शिवसेना के विधायकों को जहां उनके निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 50 से 55 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई, वहीं राकांपा के विधायकों को 700 करोड़ - 800 करोड़ रुपये मिले। 

उन्होंने आरोप लगाया कि राकांपा के जिन विधायकों को पहले शिवसेना नेताओं ने हराया था उनको अधिक धन दिया गया और शिवसेना के कई विधायकों को आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। 

उन्होंने कहा, "हमने मुख्यमंत्री के साथ तीन बैठकें कीं, जिसमें उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि (धन के आवंटन में) सुधार होगा। कई चीजों पर स्टे दिया था लेकिन मुख्यमंत्री ने इस तरह के स्थगन आदेशों को स्वीकार नहीं किया। इसके विपरीत मुख्यमंत्री के स्टे ऑर्डर को कूड़ेदान में फेंक दिया गया और हमारे विरोधियों के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई।"


शिंदे ने कहा, "हमने इस तरह के मुद्दों पर सीएम को अवगत कराया था और उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि ये रुक जाएगा परंतु सफलता नहीं मिली। ऐसी स्थिति में हमारे लिए काम करना मुश्किल था। राकांपा और महा विकास अघाड़ी के एकजुट रहने की बात पर उन्होंने कहा कि राकांपा शिवसेना की पीठ में छुरा घोंप रही थी। कोरेगांव के विधायक ने कहा कि राकांपा की इस भूमिका के कारण असंतुष्ट विधायक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एकत्र हुए। 
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