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Maharashtra: जरांगे का आरोप- भाजपा को वोट न देने वाले मराठों को किया जा रहा प्रताड़ित, कार्रवाई की मांग की
Sun, 09 Jun 2024 02:19 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Sun, 09 Jun 2024 02:19 PM IST
सार
रविवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री देंवेंद्र फडणवीस से कुछ लोगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ये लोग लोकसभा चुनाव में बीड में भाजपा को वोट न देने पर मराठों पर हमला कर रहे थे।
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मनोज जरांगे
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
रविवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री देंवेंद्र फडणवीस से कुछ लोगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने शिकायत की कि ये लोग लोकसभा चुनाव में बीड में भाजपा को वोट न देने पर मराठों पर हमला कर रहे थे।
जरांगे ने शनिवार को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। जिसमें मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग की गई। इसमें मराठा समुदाय के सभी रक्त संबंधियों को कुनबी के रूप में मान्यता दी गई है। साथ ही कुनबी को मराठा के रूप में पहचानने के लिए कानून बनाने की मांग की गई है। अंतरवाली सारथी गांव में अपने अनिश्चितकालीन अनशन के दूसरे दिन जरांगे ने दावा किया कि बीड जिले के कुछ गांवों में मराठों पर भाजपा की पंकजा मुंडे को वोट न देने पर हमला किया जा रहा है। हाल ही में हुए चुनावों में एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार बजरंग सोनावणे से हार गई थीं।
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीड के पुलिस अधीक्षक से ऐसी हिंसा के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने बताया कि भाजपा को वोट न देने पर मराठों को प्रताड़ित किया गया। साथ ही मराठा युवाओं से शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया। एक कार्यकर्ता ने कहा कि मराठा हितों का विरोध करने वाले नेताओं को आगामी विधानसभा चुनावों में परिणाम भुगतने होंगे।
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बता दें कि कुनबी, एक कृषि समूह है। जो पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आता है। मनोज जरांगे की मांग है कि सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। जिससे वे कोटा लाभ के पात्र बन सकें। कार्यकर्ता ने मराठों को खेती पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। खासतौर पर बुवाई के मौसम के दौरान और अंतरवाली सारथी में विरोध स्थल पर उनके साथ शामिल न हों।
इस बीच अंतरवाली सारथी गांव की ग्राम पंचायत ने जरांगे के विरोध का समर्थन करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। हालांकि जिला प्रशासन को ग्रामीणों के एक वर्ग ने पहले ही ज्ञापन सौंप दिया था। ज्ञापन में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए संभावित खतरे का हवाला देते हुए गांव में जरांगे के विरोध को अनुमति न देने का आग्रह किया गया था। इससे पहले कार्यकर्ता ने 10 से 26 फरवरी के बीच आरक्षण के मुद्दे पर आंदोलन किया था। 20 फरवरी को महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए एक अलग श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया।
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जरांगे ने शनिवार को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। जिसमें मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग की गई। इसमें मराठा समुदाय के सभी रक्त संबंधियों को कुनबी के रूप में मान्यता दी गई है। साथ ही कुनबी को मराठा के रूप में पहचानने के लिए कानून बनाने की मांग की गई है। अंतरवाली सारथी गांव में अपने अनिश्चितकालीन अनशन के दूसरे दिन जरांगे ने दावा किया कि बीड जिले के कुछ गांवों में मराठों पर भाजपा की पंकजा मुंडे को वोट न देने पर हमला किया जा रहा है। हाल ही में हुए चुनावों में एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार बजरंग सोनावणे से हार गई थीं।
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मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीड के पुलिस अधीक्षक से ऐसी हिंसा के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने बताया कि भाजपा को वोट न देने पर मराठों को प्रताड़ित किया गया। साथ ही मराठा युवाओं से शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया। एक कार्यकर्ता ने कहा कि मराठा हितों का विरोध करने वाले नेताओं को आगामी विधानसभा चुनावों में परिणाम भुगतने होंगे।
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बता दें कि कुनबी, एक कृषि समूह है। जो पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आता है। मनोज जरांगे की मांग है कि सभी मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। जिससे वे कोटा लाभ के पात्र बन सकें। कार्यकर्ता ने मराठों को खेती पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। खासतौर पर बुवाई के मौसम के दौरान और अंतरवाली सारथी में विरोध स्थल पर उनके साथ शामिल न हों।
इस बीच अंतरवाली सारथी गांव की ग्राम पंचायत ने जरांगे के विरोध का समर्थन करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। हालांकि जिला प्रशासन को ग्रामीणों के एक वर्ग ने पहले ही ज्ञापन सौंप दिया था। ज्ञापन में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए संभावित खतरे का हवाला देते हुए गांव में जरांगे के विरोध को अनुमति न देने का आग्रह किया गया था। इससे पहले कार्यकर्ता ने 10 से 26 फरवरी के बीच आरक्षण के मुद्दे पर आंदोलन किया था। 20 फरवरी को महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए एक अलग श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया।