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Maharashtra: कैसे 'दही हांडी' के जरिए शिवसेना को उसके गढ़ में कमजोर करने में जुटी BJP, जानें पूरी राजनीति
Fri, 19 Aug 2022 09:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 19 Aug 2022 09:54 PM IST
सार
कोरोनावायरस महामारी की वजह से तकरीबन दो साल तक इस त्योहार के दौरान पाबंदियां लगी रहीं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार दही हांडी मनाने पर छूट दी है। इस बीच त्योहार के आयोजन किए जाने के एलान के बाद से ही शिवसेना के दोनों धड़ों, भाजपा और मनसे ने एलानों की झड़ी लगा दी है।
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शिवसेना के दो गुटों में दही हांडी को लेकर वर्चस्व की जंग।
- फोटो : Social Media
विस्तार
महाराष्ट्र में आखिरकार दही-हांडी को एक 'खेल' का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन राज्य में राजनीति का खेल अभी थमा नहीं है। खासकर भाजपा-एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और उद्धव ठाकरे के समर्थन वाली शिवसेना के बीच। इस राजनीति में एंट्री लेने वाला एक और दल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी है। जन्माष्टमी के दौरान खेला जाने वाला दही हांडी लगभग पूरे महाराष्ट्र में प्रचलित है। हालांकि, अगर मौजूदा समय में देखें तो इसे लेकर राजनीति मुंबई में सबसे तेज है।
कोरोनावायरस महामारी की वजह से तकरीबन दो साल तक इस त्योहार के दौरान पाबंदियां लगी रहीं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार दही हांडी मनाने पर छूट दी है। इस बीच त्योहार के आयोजन किए जाने के एलान के बाद से ही शिवसेना के दोनों धड़ों, भाजपा और मनसे ने एलानों की झड़ी लगा दी है। किसी पार्टी ने दही हांडी के विजेता 'गोविंदा' के लिए इनामी राशि को 55 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है, तो किसी ने विजयी गोविंदा को स्पेन की ट्रिप तक का वादा किया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर महाराष्ट्र में दही हांडी की यह राजनीति है क्या? दही हांडी को खेल घोषित कराने से महाराष्ट्र सरकार को क्यों फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट को उसके गढ़ में घेरने की अलग-अलग पार्टियों की राजनीति क्या है? आइये जानते हैं...
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कोरोनावायरस महामारी की वजह से तकरीबन दो साल तक इस त्योहार के दौरान पाबंदियां लगी रहीं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार दही हांडी मनाने पर छूट दी है। इस बीच त्योहार के आयोजन किए जाने के एलान के बाद से ही शिवसेना के दोनों धड़ों, भाजपा और मनसे ने एलानों की झड़ी लगा दी है। किसी पार्टी ने दही हांडी के विजेता 'गोविंदा' के लिए इनामी राशि को 55 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है, तो किसी ने विजयी गोविंदा को स्पेन की ट्रिप तक का वादा किया है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर महाराष्ट्र में दही हांडी की यह राजनीति है क्या? दही हांडी को खेल घोषित कराने से महाराष्ट्र सरकार को क्यों फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट को उसके गढ़ में घेरने की अलग-अलग पार्टियों की राजनीति क्या है? आइये जानते हैं...
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क्या है दही हांडी का खेल?
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर ही दही हांडी का भी आयोजन होता है। दही हांडी में हिस्सा लेने के लिए रंग-बिरंगे कपड़े पहन कर कुछ युवा हिस्सा लेते हैं। इन्हें 'गोविंदा' कहा जाता है। यह गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर हवा में लटकी दही से भरी मटकी को फोड़ने की कोशिश करते हैं। इस खेल में हिस्सा लेने वाला जो भी दल मटकी फोड़ता है, उसे अलग-अलग इनाम दिए जाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर ही दही हांडी का भी आयोजन होता है। दही हांडी में हिस्सा लेने के लिए रंग-बिरंगे कपड़े पहन कर कुछ युवा हिस्सा लेते हैं। इन्हें 'गोविंदा' कहा जाता है। यह गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर हवा में लटकी दही से भरी मटकी को फोड़ने की कोशिश करते हैं। इस खेल में हिस्सा लेने वाला जो भी दल मटकी फोड़ता है, उसे अलग-अलग इनाम दिए जाते हैं।
इसे खेल घोषित करवाने से क्या फायदा?
महाराष्ट्र में यह खेल संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि, कुछ और राज्यों में भी दही हांडी के आयोजन किए जाने लगे हैं। अब महाराष्ट्र ने दही हांडी को राज्य में एक एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा देकर लोगों में इसकी दिलचस्पी और बढ़ा दी है। दरअसल, दही हांडी को खेल का दर्जा देने के बाद अब गोविंदाओं को खिलाड़ियों का दर्जा मिल सकता है। यानी यह खिलाड़ी आने वाले समय में किसी अन्य खिलाड़ी की तरह ही स्पोर्ट्स कोटा से सरकारी नौकरी पाने के योग्य हो जाएंगे।
इतना ही नहीं सरकार दही हांडी में हिस्सा लेने वालों को इंश्योरेंस भी मुहैया करा रही है। किसी खिलाड़ी की जान जाने पर उसके परिवार को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। जबकि गंभीर रूप से घायल हुए गोविंदाओं को सात लाख रुपये और फ्रैक्चर का सामना करने वालों को पांच लाख रुपये मिलेंगे।
महाराष्ट्र में यह खेल संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि, कुछ और राज्यों में भी दही हांडी के आयोजन किए जाने लगे हैं। अब महाराष्ट्र ने दही हांडी को राज्य में एक एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा देकर लोगों में इसकी दिलचस्पी और बढ़ा दी है। दरअसल, दही हांडी को खेल का दर्जा देने के बाद अब गोविंदाओं को खिलाड़ियों का दर्जा मिल सकता है। यानी यह खिलाड़ी आने वाले समय में किसी अन्य खिलाड़ी की तरह ही स्पोर्ट्स कोटा से सरकारी नौकरी पाने के योग्य हो जाएंगे।
इतना ही नहीं सरकार दही हांडी में हिस्सा लेने वालों को इंश्योरेंस भी मुहैया करा रही है। किसी खिलाड़ी की जान जाने पर उसके परिवार को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। जबकि गंभीर रूप से घायल हुए गोविंदाओं को सात लाख रुपये और फ्रैक्चर का सामना करने वालों को पांच लाख रुपये मिलेंगे।
दही हांडी से राजनीति कैसे जुड़ी?
महाराष्ट्र में दही हांडी का केंद्र बना है मुंबई, जो कि पारंपरिक तौर पर शिवसेना का गढ़ बना रहा है। हालांकि, अब शिंदे शिवसेना और ठाकरे शिवसेना के बीच इस शहरी क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की भिड़ंत शुरू हो गई है। दोनों ही कैंपों ने पूरे मुंबई के अलावा ठाणे और कुछ अन्य शहरों में भी पोस्टर-बैनरों का प्रदर्शन किया है। दोनों ही गुटों ने इनमें शिवसेना के दिवंगत सुप्रीमो बाल ठाकरे और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दिघे को भी जगह दी है।
महाराष्ट्र में दही हांडी का केंद्र बना है मुंबई, जो कि पारंपरिक तौर पर शिवसेना का गढ़ बना रहा है। हालांकि, अब शिंदे शिवसेना और ठाकरे शिवसेना के बीच इस शहरी क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की भिड़ंत शुरू हो गई है। दोनों ही कैंपों ने पूरे मुंबई के अलावा ठाणे और कुछ अन्य शहरों में भी पोस्टर-बैनरों का प्रदर्शन किया है। दोनों ही गुटों ने इनमें शिवसेना के दिवंगत सुप्रीमो बाल ठाकरे और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दिघे को भी जगह दी है।
1. शिवसेना के दोनों गुट आमने-सामने
एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने तो यहां तक कहा कि वह इन समारोह के जरिए स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं ठाकरे गुट के सांसद राजन विचारे ने कहा है कि शिवसेना की तरफ से कराए जा रहे कार्यक्रम हिंदुत्व के प्रति पार्टी की एकता, वफादारी और संस्कृति को दिखाता है।
2. शिंदे के गुट में ठाकरे शिवसेना का दांव
ऐसा नहीं है कि शिंदे गुट ही शिवसेना से उसके शहरी वोटरों को छीनने की कोशिश में जुटा है। ठाकरे गुट भी ठाणे, जो कि एकनाथ शिंदे का गढ़ रहा है, वहां जबरदस्त तरह से दही हांडी का आयोजन करा रहे हैं। ठाणे में दोनों गुट एक-दूसरे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर दही हांडी आयोजित करवा रहे हैं। जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तेंभी नाका पर दही हांडी का आयोजन करवाया है। इस इलाके में शिवसेना के संस्थापक सदस्य आनंद दिघे ने दही हांडी शुरू करवाया था, शिंदे परिवार उसी प्रथा को आगे बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ राजन विचारे (ठाकरे गुट) ने जंभाली नाका पर कार्यक्रम रखा है।
इस बीच उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे अपने कैंप द्वारा आयोजित दही हांडियों का दौरा करेंगे। सीएम एकनाथ शिंदे भी उन कार्यक्रमों में जाएंगे जिन्हें उनके गुट की तरफ से तय किया गया।
एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने तो यहां तक कहा कि वह इन समारोह के जरिए स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं ठाकरे गुट के सांसद राजन विचारे ने कहा है कि शिवसेना की तरफ से कराए जा रहे कार्यक्रम हिंदुत्व के प्रति पार्टी की एकता, वफादारी और संस्कृति को दिखाता है।
2. शिंदे के गुट में ठाकरे शिवसेना का दांव
ऐसा नहीं है कि शिंदे गुट ही शिवसेना से उसके शहरी वोटरों को छीनने की कोशिश में जुटा है। ठाकरे गुट भी ठाणे, जो कि एकनाथ शिंदे का गढ़ रहा है, वहां जबरदस्त तरह से दही हांडी का आयोजन करा रहे हैं। ठाणे में दोनों गुट एक-दूसरे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर दही हांडी आयोजित करवा रहे हैं। जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तेंभी नाका पर दही हांडी का आयोजन करवाया है। इस इलाके में शिवसेना के संस्थापक सदस्य आनंद दिघे ने दही हांडी शुरू करवाया था, शिंदे परिवार उसी प्रथा को आगे बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ राजन विचारे (ठाकरे गुट) ने जंभाली नाका पर कार्यक्रम रखा है।
इस बीच उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे अपने कैंप द्वारा आयोजित दही हांडियों का दौरा करेंगे। सीएम एकनाथ शिंदे भी उन कार्यक्रमों में जाएंगे जिन्हें उनके गुट की तरफ से तय किया गया।
कैसे इनाम के जरिए वोटर तैयार कर रहे दोनों गुट?
भाजपा, शिवसेना के दो गुटों और अन्य पार्टियों में वर्चस्व की यह जंग सिर्फ दही हांडी के आयोजन तक ही नहीं सीमित है। बल्कि इसके लिए लाखों रुपये के इनामों तक का एलान किया गया है। मुंबई और ठाणे में हो रही दही हांडी प्रतियोगिताओं के लिए शिंदे कैंप ने 2.51 लाख रुपये के इनाम का एलान किया है। इसके जवाब में राजन विचारे का कहना है कि ठाणे में उन्होंने दो हांडी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जिनमें 11-11 लाख का पुरस्कार घोषित किया गया है।
इसके अलावा ठाणे से ही एक और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने अपने क्षेत्र में आयोजित दही हांडी में विजेता टीम के लिए 21 लाख रुपये की इनामी राशि का एलान किया है। इनामों की इस रेस में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी पीछे नहीं है। पार्टी ने इस साल अपने समर्थकों द्वारा आयोजित दही हांडियों के लिए 55 लाख रुपये की इनामी राशि का एलान किया है। कहा गया है कि विजेता को 11 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा, जबकि विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने वाली या इसे तोड़ने वाली टीम को स्पेन भेजा जाएगा।
भाजपा, शिवसेना के दो गुटों और अन्य पार्टियों में वर्चस्व की यह जंग सिर्फ दही हांडी के आयोजन तक ही नहीं सीमित है। बल्कि इसके लिए लाखों रुपये के इनामों तक का एलान किया गया है। मुंबई और ठाणे में हो रही दही हांडी प्रतियोगिताओं के लिए शिंदे कैंप ने 2.51 लाख रुपये के इनाम का एलान किया है। इसके जवाब में राजन विचारे का कहना है कि ठाणे में उन्होंने दो हांडी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जिनमें 11-11 लाख का पुरस्कार घोषित किया गया है।
इसके अलावा ठाणे से ही एक और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने अपने क्षेत्र में आयोजित दही हांडी में विजेता टीम के लिए 21 लाख रुपये की इनामी राशि का एलान किया है। इनामों की इस रेस में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी पीछे नहीं है। पार्टी ने इस साल अपने समर्थकों द्वारा आयोजित दही हांडियों के लिए 55 लाख रुपये की इनामी राशि का एलान किया है। कहा गया है कि विजेता को 11 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा, जबकि विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने वाली या इसे तोड़ने वाली टीम को स्पेन भेजा जाएगा।
राजनीतिक दलों के बीच इस रेस की वजह क्या?
गौरतलब है कि मुंबई में जल्द ही नगरपालिका- बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के चुनाव होने हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पूरे मुंबई में 370 दही हांडी कार्यक्रम रखे हैं। यह पहली बार है, जब महाराष्ट्र की स्थानीय पार्टियों के साथ-साथ भाजपा ने भी दही हांडी कार्यक्रमों के आयोजन में अपना नाम दिया है। ज्यादातर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन शिवसेना और मनसे की तरफ से ही करवाया जाता था।
भाजपा ने इस बार मुंबई के वर्ली में बड़ा समारोह रखा है। इस जगह पर 2019 तक शिवसेना ही दही हांडी कार्यक्रम कराती थी। मौजूदा समय में वर्ली से आदित्य ठाकरे विधायक हैं। इसके अलावा पर्ली, लालबाग, दादर और गिरगाम में भी भाजपा ने दही हांडी का आयोजन किया है। भाजपा ने करीब 20 हजार गोविंदाओं को 10 लाख के इंश्योरेंस का कवर दिया है।
गौरतलब है कि मुंबई में जल्द ही नगरपालिका- बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के चुनाव होने हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पूरे मुंबई में 370 दही हांडी कार्यक्रम रखे हैं। यह पहली बार है, जब महाराष्ट्र की स्थानीय पार्टियों के साथ-साथ भाजपा ने भी दही हांडी कार्यक्रमों के आयोजन में अपना नाम दिया है। ज्यादातर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन शिवसेना और मनसे की तरफ से ही करवाया जाता था।
भाजपा ने इस बार मुंबई के वर्ली में बड़ा समारोह रखा है। इस जगह पर 2019 तक शिवसेना ही दही हांडी कार्यक्रम कराती थी। मौजूदा समय में वर्ली से आदित्य ठाकरे विधायक हैं। इसके अलावा पर्ली, लालबाग, दादर और गिरगाम में भी भाजपा ने दही हांडी का आयोजन किया है। भाजपा ने करीब 20 हजार गोविंदाओं को 10 लाख के इंश्योरेंस का कवर दिया है।
उधर ठाकरे शिवसेना ने मुंबई के दादर में स्थित अपने मुख्यालय सेना भवन के सामने निष्ठा दही हांडी का आयोजन किया है। पार्टी 1960-70 के दशक से इस त्योहार पर आयोजन करती आ रही है। इससे उसे मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के अन्य शहरी इलाकों में भी राज्य की अपनी सांस्कृति पार्टी के तौर पर वोटरों का भरोसा मिलता रहा है। केंद्रीय मुंबई में शिवसेना के इस तरह के कार्यक्रम काफी लोकप्रिय रहे हैं और इन क्षेत्रों में अब तक उद्धव ठाकरे का जोर रहा है। अब भाजपा ने अपनी ओर से कार्यक्रमों का आयोजन करा कर शिवसेना को उसके गढ़ में चुनौती दे दी है।