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Hindi Row: हिंदी भाषा के मुद्दे पर ठाकरे बंधु फिर एकजुट; उद्धव और राज मुंबई में करेंगे संयुक्त विरोध प्रदर्शन

Fri, 27 Jun 2025 09:46 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 27 Jun 2025 09:46 AM IST
सार

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। एक बार फिर उद्धव और राज ठाकरे एक साथ आने जा रहे हैं। शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा कर इसका एलान किया है।

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Maharashtra Hindi Row: Shiv Sena UBT MP Sanjay Raut Post picture of Uddhav Thackeray Raj Thackeray together
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलग-थलग पड़े चचेरे भाइयों के बीच सुलह का एक बड़ा संकेत मिल रहा है। बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) 5 जुलाई को मुंबई में एक संयुक्त मार्च निकालने जा रहे हैं। पहले योजना थी कि दोनों ही दल अलग-अलग मार्च निकालेंगे, लेकिन अब राज्य पर हिंदी थोपे जाने के विरोध में दोनों ने साथ आने का फैसला किया है।

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दरअसल, शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की है, जिसमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एक साथ दिखाई दे रहे हैं। संजय राउत ने लिखा, 'महाराष्ट्र के स्कूलों में अनिवार्य हिंदी के खिलाफ एक एकीकृत मार्च होगा। ठाकरे ब्रांड हैं!' सूत्रों के मुताबिक, उद्धव और राज ठाकरे दोनों गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। यह कदम देवेंद्र फडणवीस सरकार की ओर से कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को वैकल्पिक तीसरी भाषा के रूप में पेश करने के फैसले के बीच उठाया गया है।
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'हम हिंदी के खिलाफ नहीं'
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने कहा कि हम हिंदी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने भी राज ठाकरे का रुख अपनाया है। 5 जुलाई को एक रैली होगी। हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि रैली कहां होगी और इसका समय क्या होगा।
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क्या है सरकार की नई भाषा नीति?
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि मराठी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, और किसी अन्य भारतीय भाषा को पढ़ने के लिए कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी होगी।


अजित पवार भी फैसले से खुश नहीं
विपक्ष के अलावा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस के साथी अजित पवार भी फैसले खुश नहीं हैं। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए पवार ने कहा, 'छात्रों को मराठी की शिक्षा कक्षा 1 से मिलनी चाहिए, ताकि वे भाषा को पढ़ने और लिखने में दक्ष हो सकें। हिंदी को कक्षा 1 से पढ़ाना जरूरी नहीं है।'

विरोध में साहित्यकार और कलाकार
अभिनेता सयाजी शिंदे ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा, 'छात्रों को मराठी सीखने की अनुमति दी जानी चाहिए, जो एक बहुत समृद्ध भाषा है। उन्हें कम उम्र में ही मराठी में पारंगत होना चाहिए और उन्हें किसी अन्य भाषा का बोझ नहीं डालना चाहिए। अगर इसे अनिवार्य बनाया ही जाना है, तो इसे कक्षा 5 के बाद ही बनाया जाना चाहिए।'


फडणवीस बोले- अंतिम फैसला सभी पक्षों से बातचीत के बाद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर साफ किया कि तीसरी भाषा नीति पर अंतिम निर्णय सभी हितधारकों-साहित्यकारों, भाषाविदों और राजनीतिक नेताओं से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

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