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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: कृषि भूमि बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क समाप्त, किसानों और आम जनता को होगा फायदा
Mon, 20 Apr 2026 11:51 PM IST
Nirmal Kant
आईएएनएस, मुंबई।
आईएएनएस, मुंबई।
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 20 Apr 2026 11:51 PM IST
सार
महाराष्ट्र सरकार ने पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। अब यह छूट तहसीलदार और उप-पंजीयक दोनों कार्यालयों में आपसी सहमति से होने वाले बंटवारे पर लागू होगी। पहले यह सुविधा सीमित थी, लेकिन अब दायरा बढ़ाकर किसानों को बड़ी राहत दी गई है। पढ़िए रिपोर्ट-
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों और आम जनता को राहत देने के लिए सोमवार को अहम फैसला लिया। सरकार ने पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे के दस्तावेजों पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। राजस्व विभाग ने इस छूट को लेकर एक आधिकारिक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया।
पंजीकरण शुल्क में छूट का दायरा बढ़ा
अब यह छूट पहले से ज्यादा मामलों में लागू होगी। पहले यह सिर्फ तहसीलदार की ओर से धारा 85 के तहत किए गए मामलों तक सीमित थी। यह धारा महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता,1966 के अंतर्गत आती है। नई व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब पैतृक कृषि भूमि (जो आपसी सहमति से सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत होते हैं) के बंटवारे पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर उठाया गया कदम
सरकारी आदेश के अनुसार यह फैसला राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने लिया। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद उठाया गया। मंत्री बावनकुले ने कहा, परिवार के सदस्यों के बीच जमीन के बंटवारे पर कोई पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। चाहे बंटवारा तहसीलदार के जरिए हो या सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकरण कराया जाए। यह छूट दोनों मामलों में लागू होगी।
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मुख्य बातें एक नजर में-
■ पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह समाप्त।
■ यह छूट केवल एक ही परिवार के सदस्यों के बीच होने वाले पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर लागू।
■ तहसीलदार कार्यालय और उप-पंजीयक कार्यालय दोनों जगह नया नियम लागू।
■ आपसी सहमति से किए गए सभी बंटवारे भी इस छूट में शामिल।
■ इससे किसानों और आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
नियम में बदलाव का मकसद क्या है?
सरकार का उद्देश्य लंबित भूमि विवादों को कम करना और पारिवारिक समझौतों को औपचारिक और कानूनी रूप देना है। 23 जून 2025 को पहले एक अधिसूचना जारी की गई थी। उसमें धारा 85 के तहत किए गए भूमि बंटवारे पर ही शुल्क माफ था। लेकिन कई लोग सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में जाकर बंटवारा पंजीकृत करवा रहे थे। मूल अधिसूचना में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस कारण उप-पंजीयक शुल्क लेते रहे। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ा और लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
ये भी पढ़ें: गर्मी की छुट्टियों में घर जाना होगा आसान: रेलवे ने चलाईं 908 स्पेशल ट्रेनें, किस जोन को मिलीं कितनी गाड़ियां?
अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। अगर बंटवारा पैतृक कृषि भूमि का है और वह एक ही परिवार के कानूनी वारिसों या सह-मालिकों के बीच हो रहा है तो किसी भी स्थिति में पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा।
पुराना नियम क्या था और समस्या क्या थी?
मंत्री बावनकुले ने कहा, पहले तहसीलदार के जरिये होने वाले बंटवारे पर शुल्क माफ किया गया था। लेकिन लोग सीधे उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) के पास जा रहे थे। नियम स्पष्ट नहीं थे। इसलिए शुल्क लिया जा रहा था। अब नया स्पष्टीकरण जारी किया गया है। किसान चाहे तहसीलदार के पास जाए या उप-पंजीयक कार्यालय जाए, उसे पंजीकरण शुल्क के रूप में एक रुपया भी नहीं देना होगा। इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को फायदा होगा।
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पंजीकरण शुल्क में छूट का दायरा बढ़ा
अब यह छूट पहले से ज्यादा मामलों में लागू होगी। पहले यह सिर्फ तहसीलदार की ओर से धारा 85 के तहत किए गए मामलों तक सीमित थी। यह धारा महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता,1966 के अंतर्गत आती है। नई व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब पैतृक कृषि भूमि (जो आपसी सहमति से सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत होते हैं) के बंटवारे पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर उठाया गया कदम
सरकारी आदेश के अनुसार यह फैसला राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने लिया। यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद उठाया गया। मंत्री बावनकुले ने कहा, परिवार के सदस्यों के बीच जमीन के बंटवारे पर कोई पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। चाहे बंटवारा तहसीलदार के जरिए हो या सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकरण कराया जाए। यह छूट दोनों मामलों में लागू होगी।
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मुख्य बातें एक नजर में-
■ पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह समाप्त।
■ यह छूट केवल एक ही परिवार के सदस्यों के बीच होने वाले पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर लागू।
■ तहसीलदार कार्यालय और उप-पंजीयक कार्यालय दोनों जगह नया नियम लागू।
■ आपसी सहमति से किए गए सभी बंटवारे भी इस छूट में शामिल।
■ इससे किसानों और आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
नियम में बदलाव का मकसद क्या है?
सरकार का उद्देश्य लंबित भूमि विवादों को कम करना और पारिवारिक समझौतों को औपचारिक और कानूनी रूप देना है। 23 जून 2025 को पहले एक अधिसूचना जारी की गई थी। उसमें धारा 85 के तहत किए गए भूमि बंटवारे पर ही शुल्क माफ था। लेकिन कई लोग सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में जाकर बंटवारा पंजीकृत करवा रहे थे। मूल अधिसूचना में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस कारण उप-पंजीयक शुल्क लेते रहे। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ा और लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
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अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। अगर बंटवारा पैतृक कृषि भूमि का है और वह एक ही परिवार के कानूनी वारिसों या सह-मालिकों के बीच हो रहा है तो किसी भी स्थिति में पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा।
पुराना नियम क्या था और समस्या क्या थी?
मंत्री बावनकुले ने कहा, पहले तहसीलदार के जरिये होने वाले बंटवारे पर शुल्क माफ किया गया था। लेकिन लोग सीधे उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) के पास जा रहे थे। नियम स्पष्ट नहीं थे। इसलिए शुल्क लिया जा रहा था। अब नया स्पष्टीकरण जारी किया गया है। किसान चाहे तहसीलदार के पास जाए या उप-पंजीयक कार्यालय जाए, उसे पंजीकरण शुल्क के रूप में एक रुपया भी नहीं देना होगा। इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को फायदा होगा।