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2006 मुंबई ट्रेन धमाका: आरोपियों की रिहाई को महाराष्ट्र सरकार ने दी चुनौती; 24 जुलाई को होगी 'सुप्रीम' सुनवाई

Tue, 22 Jul 2025 11:16 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 22 Jul 2025 11:16 AM IST
सार

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोटों के सभी आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च कोर्ट का रुख किया। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई गुरुवार यानी 24 जुलाई को निर्धारित की है।

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Maharashtra govt moves SC against Bombay HC verdict acquitting 12 accused in 2006 Mumbai train bomb blast case
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में शीर्ष अदालत 24 जुलाई को सुनवाई करेगी। दरअसल,  बीते दिन 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामले में सभी 12 आरोपियों को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने 24 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई।

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पीठ ने मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि इसकी जल्द सुनवाई जरूरी है।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इससे यह विश्वास करना मुश्किल है कि आरोपी ने अपराध किया है। 
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12 में से पांच को मृत्युदंड और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी
विशेष अदालत ने 12 में से पांच को मृत्युदंड और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मृत्युदंड की सजा पाए एक दोषी की 2021 में मृत्यु हो चुकी है। 11 जुलाई, 2006 को पश्चिमी लाइन पर विभिन्न स्थानों पर मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए सात विस्फोटों में 180 से अधिक लोग मारे गए थे। हाईकोर्ट ने 2015 में एक विशेष अदालत की ओर से आरोपियों को दी गई सजा और उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली उनकी अपीलों को स्वीकार कर लिया था।


महाराष्ट्र एटीएस के लिए बड़ा झटका
हाईकोर्ट का यह फैसला मामले की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस के लिए बड़ा झटका है। एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य थे। उन्होंने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची थी।

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