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महाराष्ट्र: अभी आने वाली कई रातें भारी हैं...

Mon, 25 Nov 2019 02:36 PM IST
बीबीसी Published by: अनिल पांडेय Updated Mon, 25 Nov 2019 02:36 PM IST
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Maharashtra govt formation live updates: Supreme Court to pass order on Maharashtra on Tuesday
महाराष्ट्र की राजनीति - फोटो : ANI

महाराष्ट्र की सियासत में नजारा पल-पल बदल रहा है। अभी यह ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किसके पास कितने विधायक हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास 145 विधायकों का समर्थन है मौजूदा हालात को देखें तो ऐसा नहीं लगता।

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ताजा आंकड़ें देखें जो भाजपा के पास 105 के विधायक, निर्दलीय और छोटे दलों के 14 विधायकों को मिलाकर कुल 119 विधायक हो गए। सुबह अजित पवार के साथ एनसीपी के 11 विधायक गए थे। अब इनमें से छह शरद पवार के पास वापस आ गए हैं और उन्होंने कहा कि हमें तो कुछ पता ही नहीं था हमें तो अचानक पकड़ कर राजभवन ले गए।
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ऐसे में अजित पवार के पास अब बच गए पांच विधायक। इन पांच को अगर 119 के साथ जोड़ दें तो संख्या होती है 124 और बहुमत का आंकड़ा है 145. ऐसे में भाजपा को 20 विधायकों की जरूरत है और वह कहां से लाएगी शायद किसी को नहीं पता।

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'बाजार में बहुत विधायक बाकी हैं'

शनिवार सुबह तक अजित पवार के साथ एनसीपी के 11 विधायक गए थे। अब इनमें से छह विधायक शरद पवार के पास वापस आ गए हैं। इन विधायकों का कहना है कि उन्हें कुछ मालूम नहीं था, उन्हें अचानक पकड़कर राजभवन ले जाया गया।


इस तरह छह विधायकों के जाने के बाद अजित पवार के पास बचे पांच विधायक। अजित पवार के इन पांचों विधायकों को अगर भाजपा के 119 विधायकों के साथ जोड़ें तो कुल संख्या होती है 124 और बहुमत का आंकड़ा है 145।

ऐसे में बहुमत साबित करने के लिए भाजपा को 20 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। थोड़ी देर पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता नारायण राणे ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि बाजार में बहुत सारे विधायक बाकी हैं।

इसका मतलब यह है कि भाजपा यह सोच रही है कि वो बहुमत के लिए एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के अलावा और कहां-कहां से विधायक ला सकती है। ऐसा लग रहा है कि जैसे कर्नाटक में 'ऑपरेशन कमल' कई चरण में हुआ था, वैसे ही महाराष्ट्र मे भी 'ऑपरेशन कमल' अभी बाकी है।

भाजपा के धुरंधर क्या कर रहे होंगे?

देवेंद्र फडणवीस आगे क्या रणनीति अपनाएंगे, इस बारे में अभी कोई अंदाजा लगाना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास उतने विधायक नहीं है। फिलहाल कोई नहीं जानता कि फडणवीस 145 विधायक कहां से लाएंगे। उन्हें 30 नवंबर को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

शनिवार तड़के देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के बाद कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। तीनों पार्टियों का कहना है कि राज्य में जो कुछ भी हुआ है, असंवैधानिक है। कांग्रेस ने इसे विशेष रूप से चुनौती दी है।

अतीत में पिछले राज्यों में पैदा हुई ऐसी ही परिस्थितियों पर वापस नजर डालें तो ऐसे में विधानसभा में शक्ति परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ है। महाराष्ट्र में शक्ति परीक्षण 30 नवंबर को होगा जिसमें अभी छह दिन-छह रातें बाकी हैं। ये रातें ही नहीं बल्कि अगली कई रातें भी महाराष्ट्र पर भारी पड़ने वाली हैं और ऐसा पिछले एक महीने से चलता रहा है।

ईमानदारी से कहें तो जो कुछ हो रहा है, उसकी ठीक-ठीक जानकारी नेताओं और पत्रकारों को भी नहीं है। सारे सूत्र फेल हो गए हैं।

इस राजनीति में अजित पवार कहां खड़े हैं?

एक जमाने में अजित पवार एनसीपी के बहुत बड़े नेता हुए करते थे। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने कई मामलों पर कई बार अपनी नाराजगी जताई।

धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद छोटा होता गया और ऐसा शरद पवार ने जानबूझकर भी किया। चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) की आपस में नहीं बनती है लेकिन कोई इस बारे में खुलकर बात नहीं करता।

अब अजित पवार ने शपथ तो ले ली है लेकिन उनके पास सिर्फ पांच विधायक ही बचे हैं। ऐसे में वो एनसीपी में अलगाव पैदा करके विधायकों को अपने साथ ला पाएंगे, ये मुश्किल लगता है।

अमित शाह बनाम शरद पवार

देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बावजूद अगर आज महाराष्ट्र में अगर किसी के पास ताकत है तो शरद पवार के पास है। फिर चाहे वो अलग-अलग पार्टियों के साथ रिश्तों के मामले में हो या फिर संख्याबल के बारे में।

मिशन नाकाम रहा तो क्या होगा?

अगले कुछ दिनों में क्या होगा, अभी इस बारे में ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता। यह भी ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किस पार्टी के विधायक किसके संपर्क में हैं। इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण बात ये है कि कई लोगों पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच चल रही है, जिसमें अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल भी शामिल हैं।

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