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Maharashtra: हत्या के 32 साल बाद सभी आरोपी बरी, अभियोजन पक्ष की खामियों पर जज ने जताई हैरानी

Fri, 03 Oct 2025 12:32 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 03 Oct 2025 12:32 PM IST
सार

मुकदमे में काफी बाधाएं आईं जिसके कारण मुकदमा लंबा खिंचा। आरोपी जमानत पर रिहा हो गए थे। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश को गवाहों के बयान और आरोपपत्र सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज फटे हुए मिले।

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Maharashtra Five acquitted in 32-year-old murder case over torn records lack of evidence
judge court हथोड़ा - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक सत्र अदालत ने 32 साल पहले हुई एक व्यक्ति की हत्या के मामले में सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय गवाह जुटाने और पुख्ता सबूत देने में असफल रहा। साथ ही मामले से जुड़े अहम दस्तावेज भी खराब हो चुके थे। ऐसे में अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए पांचों आरोपियों को रिहा कर दिया। 
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क्या है मामला
कल्याण के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. एफ. सैय्यद ने 26 सितंबर को यह फैसला सुनाया, जिसकी एक प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 दिसंबर, 1992 को सम्राट अशोक नगर में लकी प्रेमचंद भाटिया नाम के व्यक्ति पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में सुरेश दीनानाथ उपाध्याय, गौतम महादेव गायकवाड़, मोहिद्दीन सिद्दीक खान, कन्हैया बसन्ना कोली और कुमार चेतुमल नागरानी को आरोपी बनाया गया था।
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अभियोजन पक्ष की खामियों से जज भी हैरान
मुकदमे में काफी बाधाएं आईं जिसके कारण मुकदमा लंबा खिंचा। आरोपी जमानत पर रिहा हो गए थे। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश को गवाहों के बयान और आरोपपत्र सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज फटे हुए मिले। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं था। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष केवल दो गवाहों से पूछताछ कर पाया, लेकिन उनमें से एक की गवाही को अविश्वसनीय माना गया क्योंकि उसे पार्किंसन की बीमारी थी। पांचों आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके अपराध को साबित करने में विफल रहा।
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