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महाराष्ट्र : सर्वाधिक आत्महत्याग्रस्त विदर्भ के यवतमाल जिले की बदलेगी तस्वीर
सुरेंद्र मिश्र
Updated Tue, 13 Nov 2018 04:53 AM IST
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किसान
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महाराष्ट्र में सर्वाधिक आत्महत्या ग्रस्त विदर्भ के यवतमाल जिले की तस्वीर बदलने वाली है और किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। अखिल भारतीय किसान महासंघ (आइफा) यवतमाल जिले को गोद लेने जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यवतमाल जिले को गोद लेने के प्रस्ताव को महासंघ के दिल्ली में होने वाली बैठक में विधिवत मंजूरी दी जाएगी।
विदर्भ में बीते 3 साल के दौरान तकरीबन 10000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। हालांकि किसानों को कर्ज के मकड़जाल से निकालने तथा उन्हें अन्य प्रकार से सहायता देने के लिए राज्य व केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं घोषित की गई। लेकिन, इन योजनाओं से किसानों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। हाल ही में, बीते 1 अगस्त को महाराष्ट्र सरकार ने यवतमाल और मराठवाडा में उस्मानाबाद जिले के किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 15 करोड़ आवंटित किए हैं। किन्तु इस योजना का जमीन पर उतना असर नहीं दिख रहा है।
रविवार को यवतमाल जिले के सेंट्रल हाल सभागार में आयोजित एक किसान सभा में जनपद के प्रगतिशील किसानों ने यवतमाल को गोद लेने का प्रस्ताव रखा जिसे मंजूर कर लिया गया। इस संबंध में डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि अखिल भारतीय किसान महासंघ देश भर के किसान संगठनों के महासंघ के रूप में प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में जब यहां सरकारी मशीनरी विफल साबित हुई है तो अब किसानों को ही अपने भाइयों की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें दुर्दशा से उबारने के लिए पहल करनी होगी।
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विदर्भ में बीते 3 साल के दौरान तकरीबन 10000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। हालांकि किसानों को कर्ज के मकड़जाल से निकालने तथा उन्हें अन्य प्रकार से सहायता देने के लिए राज्य व केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं घोषित की गई। लेकिन, इन योजनाओं से किसानों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। हाल ही में, बीते 1 अगस्त को महाराष्ट्र सरकार ने यवतमाल और मराठवाडा में उस्मानाबाद जिले के किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 15 करोड़ आवंटित किए हैं। किन्तु इस योजना का जमीन पर उतना असर नहीं दिख रहा है।
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रविवार को यवतमाल जिले के सेंट्रल हाल सभागार में आयोजित एक किसान सभा में जनपद के प्रगतिशील किसानों ने यवतमाल को गोद लेने का प्रस्ताव रखा जिसे मंजूर कर लिया गया। इस संबंध में डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि अखिल भारतीय किसान महासंघ देश भर के किसान संगठनों के महासंघ के रूप में प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में जब यहां सरकारी मशीनरी विफल साबित हुई है तो अब किसानों को ही अपने भाइयों की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें दुर्दशा से उबारने के लिए पहल करनी होगी।
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