Pahalgam Attack: पहलगाम आतंकी हमले से बाल-बाल बचा महाराष्ट्र का परिवार, होटल मालिक की सतर्कता ने बचाई जान
पहलगाम में हुए आतंकी हमले से महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले का एक परिवार बाल-बाल बच गया। कश्मीर घूमने गए नीलेश जैन ने बताया कि वे अपने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ कश्मीर की यात्रा पर थे। इस दौरान वे मंगलवार दोपहर को अपने परिवार के साथ बाहर जाने की तैयारी कर ही रहे थे, लेकिन...
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जहां कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं, वहीं महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले का एक परिवार बाल-बाल बच गया। परिवार स्थानीय पर्यटन स्थलों की सैर के लिए बाहर निकलने ही वाला था, लेकिन होटल मालिक और कर्मचारियों की सतर्कता ने उन्हें समय रहते रोक लिया। यही सावधानी उनकी जान बचाने में मददगार साबित हुई।
होटल के स्टाफ ने बाहर जाने से रोका
बुलढाणा निवासी नीलेश जैन ने बताया कि वे अपने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ कश्मीर की यात्रा पर थे। उन्होंने सोनमर्ग, गुलमर्ग और श्रीनगर देखने के बाद मंगलवार को पहलगाम में एक होटल में ठहराव किया।
उन्होंने बताया कि हम दोपहर को बाहर जाने की तैयारी कर ही रहे थे, तभी होटल के मालिक और कर्मचारियों ने कहा कि बाहर गोलीबारी हो रही है। हमने तुरंत बाहर न निकलने का फैसला किया।
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सरकार से घर वापसी की अपील
साथ ही नीलेश जैन ने कहा कि हमले के बाद अब वे यात्रा आगे नहीं बढ़ाना चाहते और उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उनकी सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था की जाए। बुलढाणा में पत्रकार नीलेश के भाई अरुण जैन ने बताया कि इस यात्रा में नीलेश की पत्नी, दो बच्चे और एक भतीजी भी उनके साथ थे। सभी लोग 21 और 22 अप्रैल को पहलगाम में थे, जब यह हमला हुआ।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में नवी मुंबई के न्यू पनवेल निवासी 64 वर्षीय दिलीप देसले की मौत हो गई। उनके दोस्तो का कहना है कि दिलीप 'धरती के स्वर्ग' कश्मीर घूमने गए थे, लेकिन अब उनका सपना अधूरा रह गया। उनके दोस्तो के अनुसार देसले अपने दोस्तों और पड़ोसियों के बीच एक दयालु और मददगार इंसान के रूप में जाने जाते थे। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार, मित्र, पड़ोसी और पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंच गए।
सेवानिवृत्ति के बाद पूरा करना चाहा था कश्मीर घूमने का सपना
देसले के दोस्तो ने बताया कि देसले चार साल पहले ठाणे-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र की एक रसायन और स्नेहक निर्माण कंपनी से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने जीवन भर मेहनत की, बच्चों को अच्छी परवरिश दी और अब घूमने का सपना पूरा कर रहे थे। वे अपनी पत्नी के साथ निसर्ग पर्यटन टूर्स के 37 सदस्यीय दल में शामिल थे। हालांकि उनकी पत्नी इस हमले में बच गईं, लेकिन देसले आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।
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दोस्तों की आंखें नम, सुरक्षा पर उठाए सवाल
देसले के बचपन के दोस्त अशोक नेरकर ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि हम दोनों मालेगांव के एक ही गांव के हैं। उन्होंने हमेशा परिवार और समाज के लिए जीया। उनका सपना था कि एक बार कश्मीर जरूर जाएं। लेकिन यह यात्रा उनकी आखिरी बन गई। साथ ही एक अन्य मित्र बलिराम देशमुख ने दुख जताते हुए कहा कि धरती के स्वर्ग में ऐसा दर्दनाक अंत होगा, ये कभी सोचा नहीं था। जब हमला हुआ, तब सुरक्षा बल कहां थे?