{"_id":"6ab88dadae809dd4d50c6c90","slug":"maharashtra-drought-74-pc-area-hit-son-stays-by-father-to-prevent-suicides-govt-aid-reached-only-108-families-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"74% महाराष्ट्र में सूखा: बेटा हमेशा पिता के साथ, ताकि जान न दें अन्नदाता; सिर्फ 108 परिवारों तक पहुंची मदद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
74% महाराष्ट्र में सूखा: बेटा हमेशा पिता के साथ, ताकि जान न दें अन्नदाता; सिर्फ 108 परिवारों तक पहुंची मदद
Sun, 27 Sep 2026 09:00 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 27 Sep 2026 09:00 AM IST
विज्ञापन
किसानों की हालत चिंताजनक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
महाराष्ट्र में बारिश की बेरुखी ने सूखे का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को प्रदेश के 358 में से 265 तालुकाओं को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया। यह राज्य का करीब 74 फीसदी हिस्सा है। फडणवीस ने कुछ दिन पहले ही इन सूखा प्रभावित क्षेत्रों दौरा किया था। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण फसलें तबाह हो चुकी हैं, किसानों के आगे दुश्वारियां खड़ी हो गई है। हालात कितने बुरे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक पिता के साथ उसका बेटा हमेशा इसलिए साथ रहता है ताकि वह कहीं जान न दे दें।
विज्ञापन
दरअसल, यह किसान परिवार आदित्य ठाकरे के दौरे के समय उनसे मिलने आया था जहां उसका बेटा भी मौजूद था। पत्रकार ने पूछा कि बेटे को क्यों लेकर आए हो, तो किसान ने बताया कि उसके बेटे ने कभी उसे आत्महत्या करने की बात कहते सुन लिया था इसलिए हमेशा साथ रहता है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हर वर्ष औसतन 2,500 से 2,800 किसान जान देते हैं। इस साल सिर्फ मराठवाड़ा में जनवरी से जून के बीच 465 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। हाालात यह हैं कि कागजी कमी केे कारण अब तक सिर्फ 108 परिवारों को सहायता मिली। सूखे ने पशुओं और ग्रामीण आबादी के लिए पेयजल का संकट भी बढ़ा दिया है। सरकार ने राहत के लिए 12 योजनाएं लागू की हैं, लेकिन ऑडिट के अनुसार, मदद पहुंचन में एक से चार साल तक लग जाते हैं।
विज्ञापन
लातूर में कर्ज में फंसे किसान ने की आत्महत्या
महाराष्ट्र के लातूर जिले में कर्ज के दबाव के बीच 33 वर्षीय किसान अंकुश रमेश काले ने आत्महत्या कर ली। शुक्रवार को उन्होंने अपने खेत में यह कदम उठाया। उनके पास दो एकड़ जमीन थी, लेकिन उससे होने वाली आय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। रमेश पर करीब 1.40 लाख रुपये कर्ज था। बारिश नहीं होने से उनकी फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे वह आर्थिक परेशानी में थे।
किसान बोले-जिंदगी चलाना हुआ मुश्किल
धारूर के किसान सावता स्तोदधर और थीटे गोहान गांव के किसान शेख जुबेर यूसुफ ने कहा कि सूखे के कारण किसानों की आगे की जिंदगी चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार और प्रशासन को मौजूदा स्थिति का तत्काल जायजा लेकर प्रभावित किसानों के लिए उचित सहायता और आवश्यक उपाय करने चाहिए। उन्होंने पशुओं के लिए चारा शिविर शुरू करने की मांग की।
सामान्य से 18.8 फीसदी कम हुई बारिश
आंकड़ों के अनुसार, इस साल मानसून में महाराष्ट्र में सामान्य से 18.8 फीसदी कम बारिश हुई है। एक जून से 18 सितंबर तक राज्य में 755.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जबकि इस अवधि में सामान्य तौर पर 932.3 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। किसानों के आगे भविष्य का अंधेरा दिख रहा है। उनका कहना है कि जब फसल ही नहीं होगी तो आगे सभी काम रुक जाएंगे।
किसानों को हरसंभव मदद देगी सरकार : शिवराज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों को हरसंभव सहायता देगी। चौहान ने कहा कि प्रभावित जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं। आईसीएआर ने कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए कम अवधि और कम पानी वाली फसलों के विकल्प सुझाए हैं।