एनटीएफ: अंग्रेजी माध्यम वाले विद्यार्थी क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़े साथियों को कमतर आंकते हैं, जाति भी चुनौती
नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) की सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके मुताबिक भाषा भी भेदभाव की वजह है, हिंदी वालों को कमतर आंका जाता है। अंग्रेजी माध्यम वाले विद्यार्थी क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़े साथियों को कमतर आंकते हैं।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की गठित नेशनल टास्क फोर्स रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यािर्थयों के बीच भेदभाव की बड़ी वजह भाषा बनती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक के संस्थानों में हुए अध्ययन में तनाव की बड़ी वजह सामाजिक अलगाव पाया गया। संपन्न और महानगरीय परिवारों से आए विद्यार्थियों की बोलचाल, संगीत, पहनावा और रहन-सहन अलग होता है।
कौन तेज और मुहावरेदार अंग्रेजी बोलता है?
परिसरों में विद्यार्थी यह परखते हैं कि कौन तेज और मुहावरेदार अंग्रेजी बोलता है और महानगरीय तौर-तरीकों में फिट बैठता है। जो इसमें पीछे रह जाता है, वह दोस्ती के दायरे से भी बाहर हो जाता है।टास्क फोर्स के मुताबिक, कक्षा से छात्रावास तक भाषा भेदभाव की वजह बन रही है।
वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों का आत्मविश्वास टूटता है
अंग्रेजी माध्यम से आए विद्यार्थी हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं से पढ़कर आए साथियों को कमतर आंकते हैं, और कई बार शिक्षक भी ऐसा करते हैं। इससे ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों का आत्मविश्वास टूटता है और वे परिसर में खुद को अजनबी महसूस करने लगते हैं।
जातिगत भेदभाव भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों ने बताया कि संस्थान में उन्हें कमतर आंका जाता है, योग्यता पर सवाल उठाए जाते हैं। पढ़ाई बीच में छोड़ने वालों में 60% ने यही वजह गिनाई।
2.43 लाख विद्यार्थियों पर हुआ सर्वे
- 34 फीसदी परिसर में खुद को बाहरी महसूस करते हैं।
- 56% को ही संस्थान के प्रशासन पर भरोसा।
- 32% ने बताया, संस्थान में परामर्श की सुविधा नहीं।
- 26% को ऐसी सुविधा के बारे में पता ही नहीं।
- 15% ने छह माह में गंभीर मानसिक तनाव महसूस किया।
- 9 फीसदी को बार-बार आत्महत्या के विचार आए।
18 से कम उम्र में जान देने वालों में बेटियां ज्यादा
| वर्ग | छात्र | छात्राएं |
| 18 से कम | 2,904 | 3,633 |
| 18-30 | 3,774 | 2,347 |
2022 के एनसीआरबी डाटा के आधार पर
- पूरी आबादी के आंकड़े देखें तो 18 से कम उम्र के 10,204 मामलों में 55% लड़कियां थीं।
- 18-30 साल के 59,087 मामलों में 64.4 फीसदी और 30-45 साल के 54,346 मामलों में 77.8 फीसदी पुरुष थे।
शिक्षा के आधार पर आंकड़े
| कक्षा/शिक्षा स्तर | खुदकुशी |
|---|---|
| 10वीं | 23.9% |
| 8वीं | 18% |
| 12वीं | 15.9% |
| प्राइमरी | 14.5% |
| उच्च शिक्षित | 7.2% |
| अशिक्षित | 11.5% |
हेल्पलाइन बॉक्स का इस्तेमाल कैसे करें?
मदद मांगना कमजोरी नहीं है। अगर आप या आपका कोई अपना मानसिक तनाव या निराशा से गुजर रहा है तो केंद्र सरकार की टेली मानस हेल्पलाइन 14416 या 1800 891 4416 पर 24 घंटे निःशुल्क और गोपनीय बात कर सकते हैं।
कमेंट
कमेंट X