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Maharashtra Diwali Bonus: आदर्श आचार संहिता से चंद मिनट पहले दिवाली बोनस का एलान; CM एकनाथ शिंदे ने गिनाए लाभ

Tue, 15 Oct 2024 04:55 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 15 Oct 2024 04:55 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने दिवाली से पहले बड़ा एलान किया है। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों, बीएमसी कर्मियों के साथ-साथ केजी कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं को इस फैसले का लाभ मिलेगा। पिछली बार की तुलना में अधिक पैसे मिलेंगे।

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सीएम एकनाथ शिंदे (फाइल) - फोटो : PTI

विस्तार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा एलान किया। उन्होंने निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों के लिए दिवाली बोनस की घोषणा की। शिंदे ने कहा कि बीएमसी (बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन) कर्मचारियों को भी 29 हजार रुपये बोनस मिलेगा। खास बात यह है कि इस साल राशि पिछली बार हुई घोषणा की तुलना में तीन हजार रुपये ज्यादा है। सरकार ने यह भी कहा है कि किंडरगार्टन (KG) कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों और आशा वर्कर्स को भी बोनस का लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार मदरसा शिक्षकों का वेतन बढ़ाने का एलान भी कर चुकी है।
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बोनस की घोषणा आदर्श आचार संहिता लागू होने से चंद मिनट पहले हुई
सरकार की आज की घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू हो गई है। अब किसी भी तरह के सरकारी लाभ वाले एलान पर पाबंदी रहेगी। हालांकि, कुछ अति विशिष्ट परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बाद सरकार पैसे जारी कर सकती है।
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मदरसा शिक्षकों को कितना लाभ?
इससे पहले बीते 11 अक्तूबर को राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षकों का पारिश्रमिक बढ़ाने का एलान किया। सीएम शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य की कैबिनेट ने डीएड डिग्री वाले मदरसा शिक्षकों का मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर 16,000 रुपये और बीए, बीएड और बीएससी डिग्री वाले शिक्षकों का वेतन 8,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये करने का भी फैसला किया।
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38 दिन बाद नई सरकार का गठन
महाराष्ट्र में सियासी गतिविधियों के तेज होने और सरकार के हालिया फैसलों के बीच यह जानना भी दिलचस्प है कि अगले 38 दिनों के बाद राज्य में नई सरकार का गठन होगा। चुनाव आयोग ने 20 नवंबर को मतदान और 23 नवंबर को नतीजों की घोषणा करने का एलान कर दिया है। प्रदेश की राजनीति में फिलहाल मुकाबला रोचक इसलिए भी है क्योंकि नेताओं-विधायकों का पाला बदलने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। फिलहाल सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना-भाजपा और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) महायुति सरकार में शामिल है।

देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा में सियासी समीकरण
महाराष्ट्र में इस बार सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगभग 25 महीने पहले जून, 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरी थी। इसके बाद भाजपा समर्थित सरकार बनी। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो-फाड़ होने के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के पास 202 विधायकों का समर्थन है। 102 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 40 विधायक हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 18 विधायक हैं। 14 निर्दलीय विधायकों ने भी एनडीए सरकार को समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार को पांच अन्य छोटे दलों का समर्थन भी हासिल है।

विपक्ष कितना मजबूत
इसके अलावा विपक्षी खेमे (महाविकास अघाड़ी- MVA) में कुल 71 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के 16 विधायक हैं। वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के 12 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के दो, सीपीआईएम और पीडब्लूपीआई के एक-एक विधायक हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दो विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं। 15 विधानसभा सीटें खाली हैं।


राजनीतिक चौसर पर तमाम जनप्रतिनिधियों की अग्निपरीक्षा
बता दें कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा महाराष्ट्र है। 2019 में हुए पिछले आम चुनावों के बाद महाराष्ट्र और झारखंड में भी मुख्यमंत्री बदलने की नौबत आई। ऐसे में अब दोनों राज्यों के राजनीतिक चौसर पर तमाम जनप्रतिनिधियों की अग्निपरीक्षा होगी।

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